वेनेजुएला में जिस शख्स पर US ने बरसाए बम वो कौन था? जानें प्रिजन गैंग चीफ की क्राइम स्टोरी

एक ऐसा अपराधी जिसने जेल के अंदर बैठकर बड़ा क्राइम नेटवर्क खड़ा कर दिया. स्विमिंग पूल और नाइट क्लब वाली जेल से लेकर पूरे दक्षिण अमेरिका में फैले गैंग नेटवर्क तक, जानिए नीनो गुएरेरो की कहानी, जिस पर अमेरिका ने बड़ा सैन्य हमला कर मार गिराने का दावा किया है.

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हेक्टर रुस्टनफोर्ड ग्युरेरो फ्लोरेस, नीनो गुरेरो बड़ा अपराधी था. (Photo- ITG) हेक्टर रुस्टनफोर्ड ग्युरेरो फ्लोरेस, नीनो गुरेरो बड़ा अपराधी था. (Photo- ITG)

एम. नूरूद्दीन

  • नई दिल्ली,
  • 13 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:21 AM IST

अगर कोई आपसे कहे कि एक शख्स जेल में बंद था, लेकिन उसी जेल के अंदर से वह करोड़ों डॉलर का क्राइम नेटवर्क चला रहा था, नेताओं और अधिकारियों तक उसकी पहुंच थी, और उसके इशारे पर कई देशों में हत्याएं, अपहरण और ह्युमन ट्रैफिकिंग जैसी वारदातें होती थीं, तो शायद यकीन करना मुश्किल हो. लेकिन दुनिया में 'नीनो गुएरेरो' के नाम से पहचाने जाने वाले वेनेजुएला के हेक्टर रुस्थेनफोर्ड गुएरेरो फ्लोरेस की कहानी कुछ ऐसी ही है.

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अब यह नाम एक बार फिर सुर्खियों में है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने एक स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन में नीनो गुएरेरो को मार गिराया है. ट्रंप ने इसे दुनिया के सबसे खूंखार अपराधियों में से एक बताया और कहा कि वह एक ऐसे संगठन का प्रमुख था, जिसने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर दिया था.

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लेकिन आखिर एक जेल में बंद अपराधी इतना बड़ा नाम कैसे बन गया कि अमेरिका को उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई करनी पड़ी? इसकी कहानी किसी हॉलीवुड फिल्म से कम नहीं है.

एक हत्या से शुरू हुआ अपराध का सफर

नीनो गुएरेरो का जन्म 30 मई 1983 को वेनेजुएला के माराके शहर में हुआ था. उसके शुरुआती जीवन के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी पब्लिक नहीं है, लेकिन अपराध की दुनिया में उसका नाम पहली बार 2005 में सामने आया.

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वेनेजुएला के ज्यूडिशियल रिकॉर्ड के मुताबिक, उस पर एक पुलिस अधिकारी की हत्या का आरोप लगा. यही वह अपराध था जिसने उसे जेल पहुंचाया और उसकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी. 2010 में उसे वेनेजुएला की कुख्यात टोकोरोन जेल में भेजा गया. लेकिन यह कोई सामान्य जेल नहीं थी.

दुनिया भर में जेलों की तस्वीर आमतौर पर ऊंची दीवारों, सख्त सुरक्षा और बंद दरवाजों वाली होती है. लेकिन टोकोरोन जेल अलग थी. यहां गैरकानूनी काम होते थे. जेल के कुछ हिस्सों का नियंत्रण अपराधी सरगनाओं के हाथों में था. इन्हें स्थानीय भाषा में "प्रान" कहा जाता था. नीनो गुएरेरो जल्द ही इन्हीं प्रानों में सबसे ताकतवर बन गया.

हालात ऐसे हो गए कि जेल के अंदर एक मिनी शहर खड़ा हो गया. वहां चिड़ियाघर था, स्विमिंग पूल था, नाइट क्लब था, रेस्तरां थे और खेलकूद की सुविधाएं भी थीं. कई रिपोर्टों के मुताबिक, जेल के अंदर हथियार लेकर घूमना भी आम बात थी. सरकार के नियंत्रण से दूर यह जगह नीनो गुएरेरो के लिए क्राइम नेटवर्किंग का हेडक्वार्टर बन चुका था.

जेल से पैदा हुई 'ट्रेन दे अरागुआ'

नीनो गुएरेरो ने इसी टोकोरोन जेल से ट्रेन दे अरागुआ नाम के संगठन की शुरुआत की. नाम सुनने में किसी रेलवे कंपनी जैसा लगता है, लेकिन धीरे-धीरे यह दक्षिण अमेरिका की सबसे खतरनाक गैंग में बदल गई. शुरुआत में यह एक लोकल गैंग हुआ करता था, लेकिन गुएरेरो ने इसे राष्ट्रीय और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा दिया. 

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गुएरेरो ने अपने भरोसेमंद साथियों का नेटवर्क तैयार किया. कई छोटे अपराधी गिरोह उसके साथ जुड़ते गए. कुछ ने समझौता किया और कुछ को ताकत के दम पर झुकाया गया. देखते ही देखते ट्रेन दे अरागुआ ने वेनेजुएला के कई राज्यों में अपना प्रभाव स्थापित कर लिया.

वेनेजुएला का संकट और गैंग का विस्तार

2010 के दशक के आखिर तक वेनेजुएला आर्थिक संकट में डूब चुका था. महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी. लाखों लोग देश छोड़ने को मजबूर हो गए. यहीं नीनो गुएरेरो ने अपना सबसे बड़ा मौका देखा. कोलंबिया, पेरू, चिली और इक्वाडोर की तरफ जा रहे लाखों वेनेजुएलाई प्रवासी गैंग के लिए कमाई का नया जरिया बन गए.

ट्रेन दे अरागुआ ने सीमा पार कराने के नाम पर वसूली शुरू की. कई जगहों पर प्रवासियों को धमकाकर पैसे लिए गए. ह्यमुन ट्रैफिकिंग, खासकर महिलाओं के यौन शोषण से जुड़े नेटवर्क में भी गैंग की भूमिका सामने आई. ड्रग्स तस्करी, हथियारों की तस्करी, अपहरण, फिरौती और साइबर अपराध जैसे धंधे भी गैंग की कमाई का हिस्सा बन गए.

2018 से 2023 के बीच ट्रेन दे अरागुआ ने तेजी से अपने पैर पसारे. कोलंबिया में उसकी मौजूदगी मजबूत हुई. फिर पेरू और चिली में उसके सेल बनने लगे. बाद में ब्राजील, बोलिविया और इक्वाडोर में भी उसके नेटवर्क की रिपोर्ट सामने आने लगी.

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विशेषज्ञों का कहना है कि गैंग वहां पहुंचती थी जहां बड़ी संख्या में वेनेजुएलाई प्रवासी मौजूद होते थे. शुरुआत में वह सिर्फ प्रवासियों को निशाना बनाते थे, जिससे स्थानीय पुलिस का ध्यान कम जाता था. लेकिन जैसे-जैसे संगठन मजबूत होता गया, उसने स्थानीय अपराधों में भी दखल देना शुरू कर दिया. गैंग का तरीका बेहद हिंसक था. विरोध करने वालों को सार्वजनिक रूप से निशाना बनाया जाता था ताकि डर का माहौल बने.

अमेरिका क्यों डर गया?

अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने पिछले कुछ वर्षों में चेतावनी दी कि ट्रेन दे अरागुआ अब सिर्फ दक्षिण अमेरिकी समस्या नहीं रह गई है. अमेरिका का दावा है कि गैंग के कुछ सदस्य अवैध प्रवासी मार्गों का इस्तेमाल करते हुए अमेरिकी शहरों तक पहुंच गए. ट्रंप प्रशासन ने सत्ता में लौटने के बाद इस गैंग को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का हिस्सा बना लिया. फरवरी 2025 में ट्रेन दे अरागुआ को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया गया.

इसके बाद अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने नीनो गुएरेरो पर आतंकवाद, संगठित अपराध, ड्रग्स की तस्करी और हिंसक गतिविधियों से जुड़े आरोप लगाए. अमेरिका ने उसकी गिरफ्तारी की सूचना देने वालों के लिए 50 लाख डॉलर तक का इनाम भी घोषित किया था.

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सितंबर 2023 में वेनेजुएला सरकार ने हजारों सैनिकों के साथ टोकोरोन जेल पर बड़ा ऑपरेशन चलाया. सरकार ने जेल का नियंत्रण वापस ले लिया. दुनिया भर में इसकी तस्वीरें वायरल हुईं. लोगों ने पहली बार देखा कि जेल के अंदर किस तरह का साम्राज्य खड़ा किया गया था. लेकिन इस पूरी कार्रवाई का सबसे बड़ा सवाल यही था कि नीनो गुएरेरो कहां गया?

जब सुरक्षा बल जेल के अंदर पहुंचे, तब तक वह फरार हो चुका था. कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि उसे पहले से कार्रवाई की जानकारी मिल गई थी. हालांकि इसकी कभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई.

करीब तीन साल तक उसका ठिकाना एक ग्लोबल मिस्ट्री बनी रही. अमेरिकी और दक्षिण अमेरिकी एजेंसियां लगातार उसकी तलाश में लगी थीं. अब ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने एक स्पेशल ऑपरेशन में उसे मार गिराया है. उनके मुताबिक यह हमला उस ठिकाने पर किया गया जहां गुएरेरो छिपा हुआ था. ट्रंप ने इसका एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें एक मकान पर बम गिराया जाता है. अगर यह दावा सही साबित होता है तो यह ट्रेन दे अरागुआ के इतिहास का सबसे बड़ा झटका होगा.

क्या खत्म हो जाएगी गैंग?

यहीं कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा है. विशेषज्ञ मानते हैं कि नीनो गुएरेरो की मौत से गैंग कमजोर जरूर होगी, लेकिन शायद खत्म नहीं. पिछले कुछ वर्षों में संगठन कई हिस्सों में बंट चुका है. उसके अलग-अलग गुट कई देशों में काम कर रहे हैं. कई नए नेता उभर चुके हैं.

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यानी जिस साम्राज्य को नीनो गुएरेरो ने टोकोरोन जेल की दीवारों के भीतर बैठकर बनाया था, वह अब उसके बिना भी कुछ हद तक जिंदा रह सकता है. फिर भी यह तय है कि अगर अमेरिकी दावा सही साबित होता है, तो दक्षिण अमेरिका के सबसे कुख्यात अपराधियों में गिने जाने वाले नीनो गुएरेरो का चैप्टर खत्म हो जाएगा. लेकिन उसके बनाए अपराध नेटवर्क की कहानी शायद अभी खत्म नहीं हुई है.

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