हुगली के गुप्तिपाड़ा में 286 साल पुरानी पारंपरिक 'भंडार लूट'- VIDEO

हुगली जिले के गुप्तीपाड़ा में गुरुवार को भंडार लूट का आयोजन किया गया. सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु भगवान के महाप्रसाद की लूट करने के लिए गुप्तीपाड़ा पहुंचे.

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गुप्तीपाड़ा भंडार लूट गुप्तीपाड़ा भंडार लूट

aajtak.in

  • कोलकाता,
  • 24 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 4:50 PM IST

पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के गुप्तीपाड़ा में कल 286 साल पुरानी परंपरा भंडार लूट का आयोजन किया गया. यह बहुत ही अनोखी और लोकप्रिय परंपरा है. यह भगवान जगन्नाथ के उल्टा रथ यात्रा से ठीक पहले आयोजित की जाती है. पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी इस कार्यक्रम में मौजूद रहे. 

गुरुवार को हुगली के गुप्तीपाड़ा में यह रस्म आयोजित की गई. जहां बड़ी तादाद में श्रद्धालु मंदिर के अंदर महाभोग की लूट करने पहुंचे थे. 

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क्या है परंपरा

इस अनुष्ठान में भगवान के भोग यानि महाप्रसाद को श्रद्धालुओं के बीच नहीं बांटा जाता, वे खुद इसे लूटते हैं. इसीलिए इसे भंडार लूट कहा जाता है. जैसे ही मंदिर के कपाट खुलते हैं, तब सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर के अंदर भागते हैं और भगवान का आशीर्वाद लेने के लिए यह लूट करने की कोशिश करते हैं. 

इस परंपरा का बहुत महत्व है. यह सन् 1730 से चली आ रही 286 साल पुरानी परंपरा है. ऐसा कहा जाता है कि अगर किसी को इस प्रसाद का छोटा सा अंश भी मिलता है तो उस पर भगवान जगन्नाथ की असीम कृपा होती है.  

इस साल रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू हुई है और यह 27 जुलाई तक चलेगी. बहुडा यात्रा(उल्टी रथ यात्रा) 24 जुलाई को है. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा, पुरी मंदिर से निकलकर 3 किलोमीटर दूर स्थित गुंडिचा मंदिर (अपनी मौसी के घर) जाते हैं, जहाँ वे 9 दिनों तक रहते हैं. रथ यात्रा हर साल आषाढ़ मास में मनाई जाती है. 
 

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