पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदर का अंदरूनी घमासान अब पूरी तरह चरम पर पहुंच गया है. टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के सबसे वफादार और भरोसेमंद रहे वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने भी अब बगावती तेवर अपनाते हुए विद्रोही खेमे का हाथ थाम लिया है. सूत्रों का कहना है कि ये खेमा सोमवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर खुद को 'असली TMC' संसदीय समूह के तौर पर मान्यता दिलाने की तैयारी कर रहा है. साथ ही इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच शनिवार को पश्चिम बंगाल की पूर्व ममता बनर्जी सरकार में मंत्री रहे मानस भूनिया ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है.
टीएमसी के बागी गुट में शामिल होने के बाद सुदीप बंदोपाध्याय ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की. इस दौरान उनके साथ विद्रोही टीएमसी सांसद शताब्दी रॉय भी मौजूद थीं. इसके बाद उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की. इस घटनाक्रम के बाद बागी खेमे के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि वह चाहते हैं कि लोकसभा में इस विद्रोही गुट की कमान अनुभवी सुदीप बंदोपाध्याय ही संभालें.
लोकसभा स्पीकर से करेंगे मुलाकात
बागी सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसूनिया ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए साफ किया कि उन्होंने पत्र सौंप दिया है और सोमवार को सभी बागी सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के पास जाकर संसद में 'असली टीएमसी' संसदीय दल के रूप में अपना दावा पेश करेंगे. उन्होंने कहा कि हम स्पीकर से हमारे इस दावे को कानूनी मान्यता देने के लिए कहेंगे. वर्तमान में लोकसभा के अंदर टीएमसी के कुल 28 सदस्य हैं, जिनमें से 20 अब खुलकर बगावत पर उतर आए हैं.
इस बड़े दलबदल पर टीएमसी के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने बेहद भावुक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वो सुदीप बंदोपाध्याय के इस कदम से गहराई से आहत हैं. उन्होंने तीन-चार दिन पहले ही सुदीप से बात की थी, तब उन्होंने कहा था कि वे कहीं नहीं जा रहे हैं. सौगत के अनुसार, सुदीप का पश्चिम बंगाल में 'ऑपरेशन लोटस' के प्रभारी भूपेंद्र यादव के घर जाना कई इशारे करता है. वहीं, कल्याण बनर्जी ने इसे खारिज करते हुए कहा कि कई लोग गए हैं, सुदीप दा भी चले गए, इसमें कोई बड़ी बात नहीं है.
विद्रोहियों के दावों को सिरे से खारिज करते हुए पूर्व टीएमसी राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने कहा कि अगर ये बागी सांसद बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का समर्थन करते हैं तो उन्हें अयोग्यता का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने तर्क दिया कि संविधान के 91वें संशोधन के बाद कानून में पार्टी के अंदर 'विभाजन' (Split) को कोई संरक्षण प्राप्त नहीं है. अलग संसदीय समूह बनाने को शून्य संरक्षण प्राप्त है और यदि वे व्हिप का उल्लंघन करते हैं तो उनकी सदस्यता रद्द होना तय है.
राज्यसभा में भी TMC को झटका
केंद्र और राज्य में टीएमसी विधायकों और सांसदों के बीच मची ये भगदड़ सिर्फ लोकसभा तक सीमित नहीं है. इसी हफ्ते राज्यसभा के अंदर भी तृणमूल कांग्रेस को बड़े झटके लगे हैं. पार्टी के तीन वरिष्ठ राज्यसभा सांसदों- सुखेंदु शेखर राय, सुस्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाइक ने न केवल तृणमूल कांग्रेस पार्टी से बल्कि उच्च सदन (राज्यसभा) की सदस्यता से भी अपना इस्तीफा सौंप दिया है, जिससे पार्टी की मुश्किलें दोगुनी हो गई हैं.
फर्जी हैं विलय की खबरें
इस राजनीतिक तूफान के बीच नई दिल्ली में ममता बनर्जी और सोनिया गांधी के साथ ही अभिषेक बनर्जी और राहुल गांधी की बैठकों के बाद टीएमसी के कांग्रेस में विलय की अफवाहें उड़ने लगी थीं. इस पर टीएमसी के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव डेरेक ओ'ब्रायन ने शनिवार को विराम लगाते हुए कहा कि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) के किसी अन्य दल में विलय की खबरें पूरी तरह 'फेक न्यूज' और बेबुनियाद हैं. कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने भी इसे पूरी तरह अफवाह बताया है.
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