'यह कार्रवाई मुस्लिम विरोधी है...', बंगाल में 252 मदरसे बंद होने पर भड़के पीरजादा ताहा सिद्दीकी

पश्चिम बंगाल सरकार के 252 गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों को बंद करने के नोटिस के बीच फुरफुरा शरीफ के पीरजादा ताहा सिद्दीकी ने कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि धार्मिक शिक्षा दूसरे धर्मों के प्रति प्यार और सम्मान करना सिखाती है.

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252 मदरसों पर कार्रवाई के बीच ताहा सिद्दीकी ने सरकार के फैसले पर उठाए सवाल.(Photo- ITG) 252 मदरसों पर कार्रवाई के बीच ताहा सिद्दीकी ने सरकार के फैसले पर उठाए सवाल.(Photo- ITG)

इंद्रजीत कुंडू

  • कोलकाता,
  • 14 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:16 PM IST

पश्चिम बंगाल सरकार ने मदरसों के इंफ्रास्ट्रक्चर, मान्यता की स्थिति और मैनेजमेंट सिस्टम की जांच के लिए अहम कदम उठाए हैं. वेरिफिकेशन के पहले चरण के बाद, 252 गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों को बंद करने का नोटिस जारी किया गया है. फुरफुरा शरीफ के पीरजादा ताहा सिद्दीकी ने बिना सरकारी मान्यता वाले मदरसों को बंद करने के राज्य सरकार के निर्देश पर खुलकर अपनी बात रखी है. ताहा सिद्दीकी का कहना है कि धार्मिक शिक्षा दूसरे धर्मों से प्यार और सम्मान करना सिखाती है. उनका कहना है कि धार्मिक शिक्षा हर धर्म के बच्चों को दी जानी चाहिए.

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उन्होंने कहा कि 252 मदरसों को बंद कर दिया गया है और 100 मदरसों को शो-कॉज नोटिस दिया गया है. लेकिन किस जानकारी, किस आधार और किस वजह से यह कार्रवाई की गई, इसकी जानकारी अभी तक पश्चिम बंगाल की जनता को नहीं है.

ताहा सिद्दीकी ने सवाल किया कि अगर 252 मदरसे बंद कर दिए जाते हैं और 100 मदरसों को शो-कॉज किया जाता है, तो वहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के भविष्य का क्या होगा? उन्होंने कहा कि मदरसों में सिर्फ धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाती. ज्यादातर मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ सामान्य शिक्षा भी दी जाती है. स्कूलों की तरह यहां भी सामान्य विषयों के पाठ्यक्रम की पढ़ाई होती है.

धार्मिक शिक्षा सम्मान करना सिखाती है

ताहा सिद्दीकी ने कहा कि धार्मिक शिक्षा के जरिए एक धर्म का इंसान दूसरे धर्म के लोगों से प्यार और सम्मान करना सीखता है. देश से प्रेम करने की भावना भी इसी शिक्षा के जरिए विकसित होती है. धार्मिक शिक्षा हमें यह समझने का अवसर देती है कि हम हिंदू, मुस्लिम, जैन या ईसाई होने से पहले इंसान हैं. उन्होंने कहा कि जिन मदरसों के पास सरकारी मान्यता नहीं है, उन्हें बंद करना समाधान नहीं है.

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सरकार को चाहिए कि उन्हें सरकारी मान्यता देकर व्यवस्थित तरीके से चलाने की पहल करे. जहां पढ़ाई या व्यवस्था में कोई कमी है, उसे सुधारकर बेहतर तरीके से संचालित किया जाए. हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि मदरसों को बंद करने की यह कार्रवाई मुस्लिम विरोधी है और मुसलमानों के साथ अन्याय किया जा रहा है.

ताहा सिद्दीकी ने सरकार से अपील की कि मदरसे बंद करके बंगाल के बच्चों का भविष्य प्रभावित न किया जाए. 252 मदरसों को सरकारी मान्यता देकर उन्हें बेहतर तरीके से संचालित करने की व्यवस्था की जाए.

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