जर्जर इमारतें, बदहाल टॉयलेट और मंडराता खतरा... UP के सरकारी स्कूलों का रियलिटी चेक

यूपी के कई सरकारी स्कूलों के हालात काफी खराब हैं. कहीं जर्जर इमारत के सामने बच्चों की कक्षाएं चल रही हैं, तो कहीं पानी टपक रहा है. कई स्कूलों में टॉयलेट की व्यवस्था नहीं है.

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बेसिक एजुकेशन विभाग ने कुछ सरकारी स्कूलों में काम किया है. (Photo: ITG) बेसिक एजुकेशन विभाग ने कुछ सरकारी स्कूलों में काम किया है. (Photo: ITG)

समर्थ श्रीवास्तव

  • लखनऊ,
  • 31 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 9:42 PM IST

माध्यमिक स्कूलों में व्यवस्थाओं पर आए दिन सवाल होते हैं, चर्चा कभी छतों से टपकते पानी तो कभी जर्जर बनी इमारत को लेकर होती रही है. कई राज्यों में तो बच्चे बेसिक मांगो के लिए सड़क तक उतर आए. इस बार संसद में भी यह मुद्दा उठाया गया.

आजतक ने यूपी की राजधानी समेत कई जिलों से सरकारी स्कूलों की हालत पर पड़ताल की है. लखनऊ के मोहनलालगंज स्थित कई स्कूलों में पड़ताल की तो पता चला कि हालात बद्तर हैं, कहीं जर्जर इमारत के सामने क्लास चल रही है तो कहीं पानी टपक रहा है, कहीं टॉयलेट की व्यवस्था नहीं है तो कहीं महिला टीचरों को गंदगी के चलते UTI जैसी बीमारियों का खतरा डरा रहा है.

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प्राथमिक विद्यालय सिसेंडी

आजतक की टीम प्राथमिक विद्यालय सिसेंडी पहुंची. स्कूल पहुंचते ही लंबी-लंबी जंगली घास दिखाई पड़ी इसके ठीक अंदर जाने पर बच्चों की क्लास चल रही थी. बड़ी बात यह है कि जहां बच्चों के क्लास चल रही थी, वहां से कुछ दूरी पर ठीक सामने एक काफी बड़ा खंडहर नुमा इमारत खड़ा है. इमारत को देखा जाएगा तो बारिश और तूफान में वह कभी भी गिर सकता है इस प्रकार से उसकी हालत जर्जर बन गई है. 

बच्चे अक्सर खेलते हुए इस जर्जर भवन में चले भी जाते हैं. इतना ही नहीं स्कूल के टॉयलेट इतने गंदे हैं कि रिपोर्टर वहां 10 सेकंड से अधिक नहीं खड़ा हो पाया. जब बच्चे वहां पहुंचे तो उन्होंने बताया कि यह इतना गंदा रहता है कि यहां वॉशरूम नहीं जा पाते हैं, बच्चे और बच्चियों ने कहा कि वॉशरूम जाना होता है तो खंडहर में ही चले जाते हैं और अगर पेट गड़बड़ होता है तो सीधे घर जाते हैं और फिर वापस स्कूल आते हैं. 

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खंडहर में जंगली घास है कीड़े-मकोड़े हैं और कभी भी गिरने का खतरा है. उसके बाद भी बच्चे इसके आसपास मंडराते हैं. यहां के टीचरों ने बताया कि यहां स्वीपर एक महीने में एक बार आता है ऐसे में वॉशरूम का साफ रहना पॉसिबल ही नहीं है. एक अध्यापिका ने यह तक कहा की महिलाओं को UTI का खतरा रहता है और इतनी गंदगी में अगर वह वॉशरूम जाएगी तो पक्का बीमार हो जाएगी.

अध्यापिका ने महिलाओं के पीरियड्स की समस्या का भी हवाला दिया और कहा अगर सरकारी स्कूलों में इतनी गंदगी रहेगी तो कैसे पठन-पाठन होगा. इतना ही नहीं जहां वाटर कूलर लगा हैं वहां भी गंदगी है, पानी फैला हुआ, एक नल है जो लगातार बहा जा रहा है.

प्राथमिक विद्यालय लालुमार

इसके बाद आजतक प्राथमिक विद्यालय लालुमार पहुंचा. जहां के हालात चिंताजनक थे. स्कूल के किनारे जहां क्लास चल रही थी वहां जाकर देखा तो पूरा भवन जर्जर दिखाई पड़ा, जो खिड़की लगी थी वह कभी भी टूट सकती थी और इस खिड़की पर कैमरा देख बच्चे पहुंच गए. बच्चों ने बताया कि बारिश होने पर यहां पानी गिरता है गंदगी रहती है और बहुत समस्या होती है.

आजतक बच्चों से बात कर ही रहा था कि एकदम से बारिश शुरू हो गई और इस बीच जो दावा किया जा रहा था वह सही साबित हुआ. इस जर्जर बनी स्कूली इमारत से पानी टपकने लगा जहां अंदर क्लास चल रही थी उसी के ठीक बाहर कमरे पर टपकता हुआ पानी और नीचे बच्चों की नोटबुक्स पर गिरता हुआ पानी दिखाई पड़ा. 

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कैमरे से बचने के लिए टीचरों ने खिड़की के दरवाजे बंद कर दिए लेकिन तब तक कमरे में सब कुछ कैद हो चुका था. बड़ी बात यह भी है कि यहां की प्रिंसिपल के द्वारा विभाग को कई दफा पत्र दिया जा चुका है जिसमें यहां के टीचरों के द्वारा इस स्कूली इमारत को जर्जर माना गया है लेकिन उसके बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है. क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है वह भी तब जब बारिश का सीजन चरम पर है.

उच्च प्राथमिक विद्यालय बरवलिया

ऐसा नहीं है कि हर कहीं मुसीबत है या कहीं पर भी काम नहीं हुआ. बेसिक एजुकेशन विभाग ने कुछ सरकारी स्कूलों में काम किया है. इसका जीता जागता उदाहरण उच्च प्राथमिक विद्यालय बरवलिया है. यहां बच्चों को पढ़ने के लिए लगाए ब्लैक बोर्ड की जगह अब एलईडी लग गया है, जिससे बच्चे वीडियो के माध्यम से भी टेक्नोलॉजी का पूरा उपयोग करते हुए अपने कोर्स को समझते हैं. 

यहां पर तमाम तरीके के खेलकूद के झूले लगाए गए हैं, नई टेबल मेज़ है और साफ सफाई भी है. बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए यहां तरह-तरह के मोटिवेशनल कोट्स भी लगाए गए हैं. सवाल बस यह है कि अगर ऐसा ही काम अन्य जर्जर इमारत के आसपास बसे स्कूलों में हो जाए तो ना सवाल उठाएंगे और ना बच्चों की सेफ्टी के साथ खिलवाड़ होगा. 

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इस पूरे मामले पर विनय कुमार सिंह, प्रान्तीय अध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन उत्तर प्रदेश (टीचर यूनियन) और उच्च प्राथमिक विधायक बरवलिया के प्रिंसिपल ने आजतक को बताया कि यूपी मे अभी भी तमाम ऐसे स्कूल हैं जिनकी हालत खराब है, यहां बजट कहां चला जाता कोई नहीं जानता. टॉयलेट-वॉशरूम गंदे रहते हैं. टीचरों के वॉशरूम की तो किसी स्कूल में व्यवस्था ही नहीं है. कई बार अध्यापकों और प्रिंसिपल पर भी काफी कुछ निर्भर करता है आगे आकर अपनी लड़ाई लड़नी पड़ती है, कुछ लोगों ने लड़ी तो वहां काम हुए जो नहीं लड़ पाए वहां हालात ऐसी ही है. विभाग मौन बैठा हुआ है.

इस पूरे मामले पर जब BSA लखनऊ विपिन कुमार से फोन पर सवाल किए गए तो उन्होंने कहा कि ऑपरेशन कायाकल्प के जरिए जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा एक टीम बनाई गई है, जिसमें इंजीनियर भी है जो कई ऐसे स्कूलों को चिन्हित कर रहे हैं जो जर्जर हैं इन स्कूलों पर बुलडोजर की कार्रवाई होगी और बच्चों को बेहतर जगह शिफ्ट किया जाएगा. टॉयलेट की गंदगी के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह देखा जाता है कि वह टॉयलेट नगर निगम के अंतर्गत आता है या फिर पंचायत के अंतर्गत. अगर किसी स्कूल में सफाई नहीं रखी जा रही है तो इसका संज्ञान लेकर मैं निर्देशित करूंगा. 

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विपक्ष लगातार सरकारी स्कूलों की हालत को लेकर मुद्दे उठाता रहा है इसके जवाब में यूपी सरकार में बेसिक एजुकेशन मंत्री संदीप सिंह ने अपना एक वीडियो साझा किया और कहा आज उत्तर प्रदेश का शिक्षा बजट मैं अगर आप सब लोगों को अवगत कराना चाहूं, जो समाजवादी पार्टी की सरकार के समय में 28,000 करोड़ का मात्र होता था, आज उस शिक्षा बजट को बढ़ा करके 1,13,000 करोड़ से अधिक तक लेकर जाने का काम किया गया है.

सरकारी विद्यालयों में नामांकन जो सपा सरकार के समय में मात्र 1 करोड़ 34 लाख तक था, उस आंकड़े को बढ़ाते हुए हम सब लोग 1 करोड़ 90 लाख के आंकड़े को छूने में सफल हुए हैं. स्कूल में ड्रॉपआउट रेट 19% से घटकर के 3% तक लेकर के आने का लक्ष्य हम सब लोगों ने प्राप्त किया.

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