उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद पर हुई कार्रवाई को लेकर महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरि का बयान सामने आया है. उत्तराखंड से सहारनपुर पहुंचे स्वामी प्रबोधानंद गिरि SSP कार्यालय पहुंचे और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से मुलाकात कर कलेक्ट्रेट परिसर में हुई कार्रवाई के लिए उन्हें बधाई दी. उन्होंने कहा कि कलेक्ट्रेट शासन और प्रशासन का केंद्र होता है और इसका इस्तेमाल प्रशासनिक कामकाज के लिए होना चाहिए.
महामंडलेश्वर ने कार्रवाई को लेकर पुलिस और प्रशासन की तारीफ करते हुए कहा कि कप्तान ने कलेक्ट्रेट को सुरक्षित करने का काम किया है. उन्होंने दावा किया कि कलेक्ट्रेट में लंबे समय से अवैध गतिविधियां चल रही थीं और कार्रवाई के बाद परिसर को सुरक्षित किया गया है. उन्होंने कहा कि पुलिस ने अपने स्तर पर कोई फैसला नहीं लिया, बल्कि मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद कार्रवाई की गई.
कलेक्ट्रेट में धार्मिक गतिविधियों पर उठाए सवाल
स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने कहा कि कलेक्ट्रेट का काम शासन और प्रशासन से जुड़ा है. उनके मुताबिक कलेक्ट्रेट में नमाज पढ़ने का कोई औचित्य नहीं है. उन्होंने कहा कि प्रशासनिक परिसर का इस्तेमाल प्रशासनिक कार्यों के लिए ही होना चाहिए. उन्होंने SSP को कार्रवाई के लिए धन्यवाद देते हुए इसे सराहनीय कदम बताया. उनका कहना था कि कलेक्ट्रेट को सुरक्षित करना जरूरी था और पुलिस कप्तान ने इस दिशा में बड़ा काम किया है.
महामंडलेश्वर ने कलेक्ट्रेट परिसर में कार्रवाई के बाद सामने आई कुएं जैसी संरचना को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने इसे हिंदू धार्मिक परंपराओं से जोड़ते हुए कहा कि कुएं का हिंदू समाज में धार्मिक महत्व माना जाता है. उन्होंने दावा किया कि इसी कुएं के ऊपर मस्जिद का निर्माण किया गया था और पूरे मामले की जांच होनी चाहिए. हालांकि, उन्होंने खुद यह भी कहा कि कुएं की वास्तविक स्थिति को लेकर जांच अभी जारी है. उनके मुताबिक SSP ने उन्हें बताया है कि जांच पूरी होने के बाद ही इस बारे में स्थिति स्पष्ट हो पाएगी. इसलिए अभी इस मामले में अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं होगा.
1906 और 1909 लिखी ईंटों पर भी उठाया सवाल
स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने कलेक्ट्रेट परिसर में मिली ईंटों पर लिखे पुराने साल को लेकर भी सवाल उठाया. उन्होंने 1906 और 1909 जैसी तारीखों वाली ईंटों का जिक्र करते हुए कहा कि इन तारीखों को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं. महामंडलेश्वर ने दावा किया कि ईंटों पर लिखे ये साल किसी भट्ठे के ट्रेडमार्क से जुड़े हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच जरूरी है और बिना जांच के किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि इन ईंटों को लेकर मीडिया को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही सामने आएगी.
महामंडलेश्वर ने कहा कि मस्जिद को हटाने की कार्रवाई पुलिस ने अपने स्तर पर नहीं की. उनके मुताबिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद कार्रवाई की गई. उन्होंने कहा कि पुलिस कप्तान ने उन्हें बताया है कि मामले में कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया. वक्फ की जमीन होने के दावे पर भी स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि अगर जमीन वास्तव में वक्फ बोर्ड की थी तो संबंधित पक्ष को अदालत में इससे जुड़े दस्तावेज पेश करने चाहिए थे.
उन्होंने दावा किया कि मामला सिटी मजिस्ट्रेट और जिला अदालत तक पहुंचा, लेकिन संबंधित पक्ष अपने दावे के समर्थन में दस्तावेज नहीं दिखा पाया. इसी आधार पर उन्होंने अवैध कब्जे का आरोप लगाया. हालांकि, जमीन और संरचना से जुड़े दावों की अंतिम स्थिति कानूनी और प्रशासनिक जांच से ही स्पष्ट होगी.
'आपको दिक्कत है तो पाकिस्तान चले जाइए'
बयान के दौरान स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने उन लोगों को लेकर भी विवादित टिप्पणी की, जिन्हें कलेक्ट्रेट परिसर में हुई कार्रवाई पर आपत्ति है. उन्होंने कहा कि अगर किसी को कार्रवाई से दिक्कत है तो वह पाकिस्तान या बांग्लादेश जा सकता है. उन्होंने कहा कि भारत नियम-कानून और संविधान से चलता है और यहां रहने वाले सभी लोगों को कानून का पालन करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि अगर किसी पक्ष को कार्रवाई पर आपत्ति है तो वह हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और उपलब्ध न्यायिक रास्तों का रुख कर सकता है. महामंडलेश्वर ने अपने बयान में यहां तक कहा कि अगर किसी के पास पाकिस्तान या बांग्लादेश जाने का किराया नहीं है तो वह उनसे पैसे ले सकता है. उन्होंने कहा कि वह किराया देने के लिए भी तैयार हैं.
स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की कानून व्यवस्था की भी तारीफ की. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में अब दादागिरी और गुंडागर्दी नहीं चलेगी और सभी को नियम-कानून का पालन करना होगा. उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ करते हुए कहा कि वह नियम-कानून का पालन कराने वाली सरकार चला रहे हैं. उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए.
महामंडलेश्वर ने कहा कि अगर किसी को प्रशासन की कार्रवाई गलत लगती है तो उसके लिए अदालत का रास्ता खुला है. उनके मुताबिक संबंधित पक्ष हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जा सकता है. उन्होंने दोहराया कि उत्तर प्रदेश में नियम और कानून के अनुसार ही काम होना चाहिए.
कुएं की जांच पूरी होने के बाद स्थिति होगी साफ
कलेक्ट्रेट परिसर में मिली कुएं जैसी संरचना को लेकर भी उन्होंने SSP से हुई बातचीत का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन इसकी बारीकी से जांच कर रहे हैं. अभी केवल संरचना के सामने आने की बात स्पष्ट है, जबकि उसकी वास्तविक स्थिति और इतिहास को लेकर जांच जारी है. उन्होंने कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस बारे में कोई अंतिम बात कहना उचित नहीं होगा. साथ ही उन्होंने कुएं को हिंदू धार्मिक परंपरा से जोड़ते हुए कहा कि हिंदू समाज में कुएं का धार्मिक महत्व माना जाता है.
स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने कलेक्ट्रेट परिसर में हुई कार्रवाई को हिंदू समाज के सम्मान से भी जोड़कर देखा. उन्होंने जिला प्रशासन और पुलिस को इसके लिए बधाई दी और कहा कि कार्रवाई के बाद परिसर को सुरक्षित करने का प्रयास किया गया है. पूरे मामले में उनका जोर इस बात पर रहा कि सरकारी परिसर में किसी भी तरह की गतिविधि कानून और प्रशासनिक नियमों के अनुसार ही होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि किसी भी पक्ष को कानून अपने हाथ में लेने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया का रास्ता अपनाना चाहिए.
राहुल कुमार