'ट्रस्ट ने पहले ही बरामद कर लिए थे करोड़ों, जांच एजेंसी से छिपाई बात', राम मंदिर चढ़ावा चोरी में SIT की रिपोर्ट से आया नया मोड़

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि असली चोरी की रकम करोड़ों रुपये में थी, जबकि एसआईटी को सिर्फ लाखों रुपये की बरामदगी बताई गई. सूत्रों के मुताबिक ट्रस्ट ने सीसीटीवी फुटेज से पकड़े गए संदिग्धों से ढाई से तीन करोड़ रुपये बरामद किए थे, लेकिन इसकी पूरी जानकारी जांच एजेंसी को नहीं दी गई.

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राम मंदिर में चोरी की वास्तविक रकम करोड़ों रुपये में हो सकती है (File Photo: PTI) राम मंदिर में चोरी की वास्तविक रकम करोड़ों रुपये में हो सकती है (File Photo: PTI)

आशीष श्रीवास्तव

  • लखनऊ, उत्तर प्रदेश,
  • 16 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 12:30 PM IST

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी एक नई रिपोर्ट ने हलचल मचा दी है. रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि चोरी की असली रकम करोड़ों रुपये में थी, जबकि एसआईटी और पुलिस के सामने सिर्फ लाखों रुपये की बरामदगी दिखाई गई. 

दावा है कि मंदिर ट्रस्ट ने इससे कहीं ज्यादा पैसा पहले ही बरामद कर लिया था लेकिन पूरी जानकारी जांच एजेंसी को नहीं दी गई. इन दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

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रिपोर्ट के मुताबिक ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से संदिग्धों को पकड़ा था. इस दौरान करीब ढाई से तीन करोड़ रुपये बरामद किए जाने की बात सामने आई है. लेकिन सूत्रों का कहना है कि एसआईटी को इस पूरी रकम की जानकारी नहीं दी गई, बल्कि सिर्फ एक हिस्सा ही बताया गया.

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि मामले को जानबूझकर सीमित रखने की कोशिश हुई. इसकी वजह यह बताई जा रही है कि अगर पूरी बरामदगी की जानकारी सामने आती तो इससे कई बड़े सवाल खड़े हो सकते थे. 

यह भी पढ़ें: 'बहुत बड़ा पाप हुआ है..', राममंद‍िर चढ़ावा चोरी पर बोले रवि‍ क‍िशन, देखें

सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने पकड़े जाने से पहले दो से ढाई करोड़ रुपये खर्च भी कर दिए थे. इन सभी आंकड़ों को जोड़कर रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि कुल चोरी की रकम पांच करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकती है. 

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यह आंकड़ा शुरुआत में सामने आई रकम से कहीं ज्यादा है, जिसके चलते मामला अब नए सिरे से चर्चा में है. हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह पूरी जानकारी सूत्रों पर आधारित है और अभी तक इसकी कोई सरकारी या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही असली तस्वीर साफ हो पाएगी.

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