अतीक अहमद के बेटे मोहम्मद उमर के काफिले से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. आरोप है कि अपने भाई के जनाजे में शामिल होने के बाद जेल वापस लौटते समय प्रयागराज के नवाबगंज टोल प्लाजा पर पुलिस एस्कॉर्ट के आगे निकलने के बाद उसके पीछे चल रही करीब 30 कारें बिना टोल टैक्स दिए निकल गईं. टोल प्लाजा प्रबंधन का दावा है कि इन वाहनों ने बूम बैरियर को तोड़ दिया और कर्मचारियों के रोकने पर उनके साथ अभद्रता की गई.
मामला दोपहर करीब 3:50 बजे का बताया जा रहा है. टोल प्लाजा प्रबंधन की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है. एफआईआर में कई वाहनों के नंबर भी दर्ज कराए गए हैं. अब पुलिस इन्हीं नंबरों के आधार पर वाहन मालिकों और घटना में शामिल लोगों की पहचान करने में जुटी है. टोल प्लाजा प्रबंधन की शिकायत के मुताबिक, 8 अगस्त को लखनऊ जेल से मोहम्मद उमर को ले जाया जा रहा था. उसके साथ पुलिस का एस्कॉर्ट भी था. जब पुलिस की सरकारी गाड़ियां नवाबगंज टोल प्लाजा से गुजरीं तो टोल कर्मचारियों ने अपनी नियमित प्रक्रिया के तहत गाड़ियां निकलवाई.
आरोप है कि पुलिस वाहनों के पीछे कई प्राइवेट कारें भी काफिले के साथ चल रही थीं. इन कारों की संख्या करीब 25 से 30 के आसपास बताई गई है. टोल प्रबंधन का आरोप है कि इन गाड़ियों ने टोल का पैसा दिए बिना निर्धारित लेन पर रुकने के बजाय एक साथ तेजी से निकलने की कोशिश की. इसी दौरान टोल बूथ पर तैनात कर्मचारियों ने कारों को रोकने का प्रयास किया. आरोप है कि इसके बाद स्थिति बिगड़ गई और कुछ वाहन बूम बैरियर को तोड़ते हुए आगे निकल गए.
सफेद XUV और काली Creta समेत कई गाड़ियों का जिक्र
मामले में दी गई तहरीर में कुछ वाहनों के नंबर भी दर्ज कराए गए हैं. इनमें सफेद रंग की महिंद्रा XUV, जिसका नंबर UP32 NJ 1458 बताया गया है, और काले रंग की Creta, जिसका नंबर UP70 HP 8416 है, समेत कई अन्य वाहन शामिल हैं. टोल प्लाजा प्रबंधन ने अपनी शिकायत में कई वाहनों के नंबर पुलिस को उपलब्ध कराए हैं. अब जांच के दौरान इन वाहनों के रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड के आधार पर उनके मालिकों की पहचान की जा सकती है. पूरे मामले में सबसे अहम आरोप बूम बैरियर तोड़कर वाहनों के निकलने का है. टोल प्लाजा प्रबंधन के मुताबिक, निजी वाहनों को टोल भुगतान के लिए रोका जाना था, लेकिन आरोप है कि कई वाहन बिना भुगतान किए आगे बढ़ गए. तहरीर के मुताबिक, वाहनों की रफ्तार इतनी तेज थी कि टोल बूथ पर लगा बूम बैरियर टूट गया. कर्मचारियों ने जब वाहनों को रोकने की कोशिश की तो कथित तौर पर उनके साथ गाली-गलौज और अभद्रता की गई. टोल प्लाजा प्रबंधन का आरोप है कि कर्मचारियों को जान से मारने की धमकी भी दी गई. इतना ही नहीं, तहरीर में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ वाहनों से कर्मचारियों को कुचलने की कोशिश की गई. स्थिति को देखते हुए कर्मचारियों ने पीछे हटकर अपनी जान बचाई.
बूथ नंबर-3 पर हुआ पूरा घटनाक्रम
घटना के समय टोल प्लाजा के बूथ नंबर-3 पर कंप्यूटर ऑपरेटर अजीत और हेल्पर अंशुमन शुक्ला ड्यूटी पर तैनात थे. बताया गया है कि इसी बूथ के आसपास वाहनों के गुजरने के दौरान विवाद की स्थिति बनी. टोल प्लाजा पर तैनात कर्मचारियों की जिम्मेदारी वाहनों से निर्धारित टोल शुल्क लेना और टोल लेन को नियंत्रित करना होता है. प्रबंधन का आरोप है कि जब निजी वाहनों को रोकने की कोशिश की गई तो वाहन सवार लोग कर्मचारियों से उलझ गए. आरोपों के मुताबिक, कर्मचारियों को पीछे हटना पड़ा. इसके बाद वाहन बैरियर तोड़ते हुए आगे निकल गए. इस घटना के बाद टोल प्लाजा प्रबंधन ने मामले को लेकर नवाबगंज थाने में शिकायत दी.
असिस्टेंट मैनेजर ने दी पुलिस को तहरीर
नवाबगंज टोल प्लाजा के असिस्टेंट मैनेजर जयप्रकाश यादव की ओर से थाने में तहरीर दी गई. शिकायत में कथित तौर पर टोल टैक्स नहीं देने, टोल प्लाजा के बैरियर को नुकसान पहुंचाने, कर्मचारियों के साथ अभद्रता और धमकी देने सहित कई आरोप लगाए गए हैं. प्रबंधन ने यह भी कहा है कि बड़ी संख्या में वाहनों के बिना टोल दिए निकल जाने से टोल राजस्व को नुकसान हुआ. तहरीर में कई वाहनों के नंबर दर्ज कराए जाने के कारण अब पुलिस के सामने जांच का शुरुआती आधार मौजूद है. पुलिस इन नंबरों की मदद से वाहन मालिकों तक पहुंच सकती है और उनसे घटना के संबंध में पूछताछ कर सकती है.
CCTV फुटेज से साफ हो सकती है तस्वीर
नवाबगंज टोल प्लाजा पर हुई इस घटना की जांच में सीसीटीवी फुटेज महत्वपूर्ण हो सकती है. टोल प्लाजा पर वाहनों की आवाजाही रिकॉर्ड होने की संभावना रहती है. ऐसे में घटना के समय की फुटेज से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कितने वाहन मौके से गुजरे और किस तरह से टोल बैरियर पार किया गया. अगर फुटेज में वाहनों के नंबर साफ दिखाई देते हैं तो एफआईआर में दर्ज नंबरों से उनका मिलान किया जा सकता है. इसके अलावा टोल बूथ पर मौजूद कर्मचारियों के बयान भी पुलिस जांच का हिस्सा बन सकते हैं. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि विवाद किस वजह से शुरू हुआ और बैरियर किस वाहन की वजह से क्षतिग्रस्त हुआ.
पुलिस के सामने अब ये सवाल
नवाबगंज टोल प्लाजा मामले में पुलिस की जांच कई बिंदुओं पर केंद्रित हो सकती है. सबसे पहले यह पता लगाना होगा कि घटना के समय वास्तव में कितने वाहन वहां से गुजरे. इसके बाद यह देखा जाएगा कि इनमें से कितने वाहनों ने टोल का भुगतान किया और कितने बिना भुगतान किए निकले. इसके साथ ही बैरियर टूटने की घटना की भी जांच होगी. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि बैरियर किस वाहन से क्षतिग्रस्त हुआ और क्या इसे जानबूझकर तोड़ा गया या तेज रफ्तार में वाहन के निकलने के दौरान यह क्षतिग्रस्त हुआ. कर्मचारियों के साथ कथित अभद्रता और धमकी के आरोपों की भी जांच की जाएगी. यदि सीसीटीवी फुटेज या अन्य साक्ष्यों से इन आरोपों की पुष्टि होती है तो पुलिस आगे की कार्रवाई कर सकती है.
वाहन नंबरों से आगे बढ़ेगी जांच
एफआईआर में दर्ज वाहन नंबर इस मामले में जांच की महत्वपूर्ण कड़ी बन सकते हैं. पुलिस संबंधित वाहनों के रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड की जानकारी जुटाकर उनके मालिकों तक पहुंच सकती है. इसके बाद यह पता किया जा सकता है कि घटना के समय वाहन किसके कब्जे में था और उसे कौन चला रहा था. पुलिस यह भी जांच सकती है कि सभी वाहन एक-दूसरे से जुड़े थे या अलग-अलग थे. फिलहाल नवाबगंज पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. अब जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों से ही यह स्पष्ट होगा कि 8 अगस्त की दोपहर नवाबगंज टोल प्लाजा पर वास्तव में क्या हुआ था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे.
पंकज श्रीवास्तव