'पेपर लीक रोकना है तो सिस्टम बदलना होगा', नए बिल पर मायावती ने उठाए सवाल

लोकसभा से एंटी पेपर लीक बिल पास होने के बाद मायावती ने कहा कि सिर्फ सख्त कानून बनाने से पेपर लीक नहीं रुकेंगे, इसके लिए पूरी शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली में सुधार जरूरी है. वहीं अखिलेश यादव ने दावा किया कि 2024 में भी ऐसा कानून था, फिर भी पेपर लीक की घटनाएं नहीं रुकीं.

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मायावती ने कहा- सिर्फ नया बिल लाने से नहीं रुकेगा पेपर लीक. (Photo: PTI) मायावती ने कहा- सिर्फ नया बिल लाने से नहीं रुकेगा पेपर लीक. (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:07 PM IST

लोकसभा से एंटी पेपर लीक संशोधन बिल 2026 पास तो हो गया, लेकिन इस पर शुरू हुई राजनीति अब और तेज हो गई है. हालांकि इस बिल का संसद के दूसरे सदन यानी राज्यसभा से पास होना अभी बाकी है, लेकिन लोकसभा से पास होने के बाद अब इस बिल पर विपक्षी नेताओं के बयान सामने आए हैं. बसपा प्रमुख मायावती ने साफ कहा है कि 'पेपर लीक रोकना है तो सिस्टम बदलना होगा', सिर्फ नया बिल ले आने से यह बीमारी खत्म नहीं होने वाली. वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह बदलाव सरकार ने अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि सड़कों पर उतरे छात्रों के भारी दबाव में आकर किया है.

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उत्तर प्रदेश के इन दो बड़े राजनीतिक चेहरों के बयानों ने साफ कर दिया है कि भले ही यह बिल कानून बनने की प्रक्रिया में आगे बढ़ रहा हो, लेकिन इस मुद्दे पर सियासत अभी लंबी चलने वाली है. आइए जानते हैं कि दोनों नेताओं ने क्या-क्या सवाल खड़े किए हैं:

मायावती ने क्या कहा?

मायावती ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखते हुए सरकार के इस कदम पर सिलसिलेवार तरीके से सवाल खड़े किए.

  1. जल्दबाजी में लिया गया फैसला: उन्होंने लिखा कि युवाओं का भविष्य अंधकार में जाते देख और आत्महत्या जैसी दुखद घटनाओं को रोकने के लिए लोकसभा से सख्त सजा वाला बिल पास हुआ है. हालांकि, लोगों को चिंता है कि यह जल्दबाजी में उठाया गया कदम है, जबकि दूसरे जरूरी उपायों को लागू करना ज्यादा महत्वपूर्ण था.
  2. सजा से ज्यादा रोकथाम जरूरी: मायावती के मुताबिक यह बिल पेपर लीक होने के बाद सजा देने की बात करता है, जबकि असल चुनौती इस अपराध को होने से पहले रोकने की है. अपराध पर नियंत्रण सबसे जरूरी है, जिसमें पिछला कानून भी नाकाम रहा.
  3. शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग: उन्होंने कहा कि केवल सख्त कानून काफी नहीं है. शिक्षा के लिए मिलने वाले महंगे कर्ज को सस्ता और कल्याणकारी बनाना होगा. सरकारी स्कूलों में अच्छी पढ़ाई का इंतजाम करना होगा, ताकि गरीब, शोषित और मेहनतकश परिवारों के बच्चे भी बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के बनाए संविधान के मुताबिक बराबरी से आगे बढ़ सकें.
  4. अमीर और गरीब का फर्क: उन्होंने लिखा कि अमीर लोग तो पैसे के दम पर मनचाही पढ़ाई हासिल कर लेते हैं, लेकिन उन करोड़ों गरीब परिवारों के होनहार बच्चों का क्या होता है, जो प्रतिभा होने के बाद भी आगे नहीं बढ़ पाते.
  5. जड़ से इलाज की जरूरत: पेपर लीक पूरी शिक्षा व्यवस्था में फैली खराबी का बस एक उदाहरण है. इसकी जड़ें बहुत गहरी हैं. देश के 140 करोड़ लोगों के विकास के लिए सरकार को मजबूत इच्छाशक्ति और साफ नीयत के साथ लगातार काम करने की जरूरत है.
  6. राजनीति से निराशा: मायावती ने इस बात पर दुख जताया कि इतने अहम बिल पर चर्चा के दौरान ज्यादातर पार्टियां दलगत राजनीति से ऊपर नहीं उठ पाईं. सदन में गंभीरता कम और आरोप-प्रत्यारोप ज्यादा दिखे. ऐसे में इस कानून के असरदार होने पर लोगों को शक होना लाजिमी है.
  7. मूल सवाल: आखिर में उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कानून पर कानून बनाने से इस जटिल समस्या का हल निकलेगा? सरकार को बाकी जरूरी उपायों पर भी सोचना चाहिए, तभी देश का भविष्य सुधर सकता है.

अखिलेश यादव ने क्या कहा?

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अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए सरकार की नीयत और कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए.

  1. छात्रों के दबाव में फैसला: उन्होंने कहा कि 2024 में भी ऐसा कानून मौजूद था. 2026 में नया बिल सरकार अपनी मर्जी से नहीं लाई, बल्कि जब बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतरे, तो उनके भारी दबाव में आकर यह कदम उठाना पड़ा.
  2. संस्थानों पर खास सोच का कब्जा: अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि देश के तमाम शैक्षणिक संस्थानों पर एक खास विचारधारा से जुड़े अनधिकृत तत्वों का कब्जा है. जो लोग इस विचारधारा को नहीं मानते, उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया जाता है. जब सदन में इस पर जवाब मांगा गया, तो सरकार शांत रही.
  3. यूपी में पेपर लीक का हवाला: उन्होंने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 20 से ज्यादा भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं, लेकिन किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई. इसमें शामिल लोग सरकार के भीतर ही मौजूद हैं. युवाओं को रोजगार देना इस सरकार के एजेंडे में है ही नहीं.

क्या है आगे का रास्ता?

लोकसभा से एंटी पेपर लीक बिल का पास होना निसंदेह एक बड़ा विधायी कदम है, लेकिन मायावती और अखिलेश यादव की तीखी प्रतिक्रियाएं बताती हैं कि यह लड़ाई सिर्फ कागजी प्रावधानों तक सीमित नहीं है. छात्रों के भरोसे को बहाल करना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है. अब देखना यह होगा कि जब यह बिल राज्यसभा में चर्चा के लिए आता है, तो वहां सरकार विपक्ष के इन तीखे सवालों का क्या जवाब देती है और जमीनी स्तर पर लीक रोको तंत्र को कितना मजबूत बना पाती है.
 

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