लखनऊ में धर्मांतरण के अंतरराज्यीय सिंडिकेट का पर्दाफाश, पास्टर दंपति समेत 7 गिरफ्तार

लखनऊ के मोहनलालगंज में पुलिस ने कथित धर्मांतरण से जुड़े एक अंतरराज्यीय सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए मुख्य सरगना पास्टर डेनियल, उसकी पत्नी समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने उनके पास से धार्मिक साहित्य, बैंक स्टेटमेंट, बोलेरो और एक अहम डायरी बरामद की है.

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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी. (Photo: Screengrabs) पुलिस की गिरफ्त में आरोपी. (Photo: Screengrabs)

अंकित मिश्रा

  • लखनऊ,
  • 25 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:34 AM IST

राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज थाना क्षेत्र में धर्मांतरण के एक अंतरराज्यीय सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ है. रात के अंधेरे में बोलेरो गाड़ी से गांवों में दबिश देने वाले इस गिरोह का ताना-बाना तमिलनाडु से लेकर यूपी के कई जिलों तक फैला हुआ था. पुलिस ने मामले में गिरोह के मुख्य सरगना पास्टर और उसकी पत्नी समेत 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. इनके पास से धार्मिक साहित्य, धर्मांतरण की बुकलेट, बैंक स्टेटमेंट, बोलेरो गाड़ी और एक बेहद रहस्यमयी डायरी बरामद हुई है. जिसने पुलिस जांच की दिशा ही बदल दी है.

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ऐसे कराते थे धर्मांतरण
एडीसीपी साउथ रल्लापल्ली बसंत कुमार ने बताया कि इस पूरे खेल की शुरुआत एक प्रेम कहानी से हुई थी. पुलिस कस्टडी में आए गिरोह के मुख्य सरगना डेनियल ने पूछताछ में बड़ा खुलासा किया है. डेनियल का असली नाम बाला सुब्रमण्यम है और वह मूल रूप से तमिलनाडु का रहने वाला है. 16 साल की उम्र में उसे सुबला नाम की ईसाई युवती से प्यार हुआ, जिसके कहने पर उसने अपना धर्म त्याग दिया. शादी के बाद वह डेनियल बन गया और फिर तमिलनाडु के एफजीपीसी चर्च के इशारे पर धर्मांतरण का खेल शुरू हुआ.

साल 1998 में इस दंपत्ति को लखनऊ भेजा गया और डेनियल को वाराणसी सर्किल का पास्टर बनाकर प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी सौंप दी गई. एडीसीपी रल्लापल्ली बसंत कुमार ने आगे बताया कि इस सिंडिकेट को बकायदा हर साल अधिक से अधिक लोगों का धर्म परिवर्तन कराने का सालाना टारगेट मिलता था, जिसके बदले चर्च की तरफ से मोटी फंडिंग भेजी जाती थी. यह गिरोह गरीब और लाचार ग्रामीणों को निशाना बनाता था. घुटनों का दर्द ठीक करने, असाध्य बीमारियों के इलाज, आर्थिक तंगी दूर करने, शादी-विवाह कराने और संतान प्राप्ति का झांसा देकर 'प्रार्थना सभा' के नाम पर लोगों का ब्रेनवाश किया जाता था.

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ऐसे हुई आरोपियों की गिरफ्तारी
मामले का खुलासा तब हुआ जब मोहनलालगंज के भरसवा गांव के रहने वाले अमित कुमार ने इस खेल का विरोध किया. आरोपियों ने जब उन पर धर्म बदलने का दबाव बनाया और बदसलूकी करते हुए गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी, तो ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा. बुधवार रात बोलेरो से पहुंचे आरोपियों को ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया. तलाशी के दौरान पुलिस के हाथ लगी एक डायरी ने गिरोह के कई गहरे राज खोल दिए हैं. इस डायरी में आर्थिक मदद पाने वाले परिवारों की सूची, धर्मांतरण के लिए टारगेट किए गए लोगों के नाम और बीमारियों के इलाज के नाम पर दिए गए प्रलोभनों का पूरा ब्योरा दर्ज है. शुरुआती जांच में इस नेटवर्क के तार सुल्तानपुर और वाराणसी समेत यूपी के कई जिलों से जुड़े होने के संकेत मिले हैं.

प्रभारी निरीक्षक रामबाबू सिंह के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में तमिलनाडु निवासी डेनियल (58), उसकी पत्नी सुबला (51), भरसवां निवासी चंद्रभान (50), उसकी पत्नी आरती (40), सीमा (35) और ठाकुरखेड़ा निवासी अजय रावत (46) व उसकी पत्नी शीला (39) शामिल हैं. पुलिस अब इनके बैंक खातों के लेनदेन और अन्य जिलों में फैले नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है, जिसके बाद कई और बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं.

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