13 साल का बच्चा, सामने DM-SP और कई अफसर... फिर जो बोला, उसका वीडियो वायरल हो गया

लखीमपुर खीरी के संपूर्ण समाधान दिवस में उस वक्त हर कोई 13 साल के अमिताभ गुप्ता को सुनने लगा, जब वह जिले के डीएम और दूसरे अधिकारियों के सामने अपनी शिकायत लेकर पहुंचा. घर के विवाद से शुरू हुई बात कुछ ही मिनटों में गरीबी, पढ़ाई और सरकारी सिस्टम तक पहुंच गई. बातचीत का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है.

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समाधान दिवस में पहुंचा 13 साल का फरियादी अमिताभ गुप्ता. (Photo: Screengrab) समाधान दिवस में पहुंचा 13 साल का फरियादी अमिताभ गुप्ता. (Photo: Screengrab)

अभिषेक वर्मा

  • लखीमपुर खीरी,
  • 19 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:26 PM IST

'सर... करवा देंगे नहीं, करवा दीजिए.' सामने जिले के सबसे बड़े अफसर बैठे थे. डीएम, पुलिस अधिकारी और कई विभागों के अधिकारी. एक-एक कर लोग अपनी शिकायतें लेकर आ रहे थे. लेकिन अचानक एक दुबला-पतला 13 साल का लड़का सामने पहुंचा और फिर जो बातचीत शुरू हुई, उसने पूरे हॉल का माहौल बदल दिया.

यह मामला उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी का है. वायरल वीडियो में दिख रहा लड़का है अमिताभ गुप्ता, जो आठवीं कक्षा का छात्र है. उसके हाथ में एक प्रार्थना पत्र था और मन में घरेलू परेशानियां सुलझने की उम्मीद. संपूर्ण समाधान दिवस चल रहा था. डीएम अंजनी कुमार सिंह ने बच्चे को देखा और सवाल पूछा, अकेले आए हो? बच्चे ने बिना हिचक जवाब दिया, 'जी...' इसके बाद उसने अपनी कहानी सुनानी शुरू की.

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यहां देखें Video

13 साल के बच्चे ने बताया कि उसके पिता मानसिक रूप से बीमार हैं. मां घरों में काम करके परिवार चलाती हैं. परिवार जिस मकान में रहता है, उसके एक हिस्से पर रिश्तेदारी में ताई ने ताला लगा रखा है. इसी ताले को खुलवाने के लिए वह कई बार अधिकारियों के चक्कर लगा चुका है. उसने बताया कि पहले भी वह तत्कालीन डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल के पास गया था. वहां से आदेश भी मिला, लेकिन उसके मुताबिक आगे कार्रवाई नहीं हुई.

'सर, करवा देंगे नहीं... करवा दीजिए'

बच्चे की बात सुनकर मौजूद पुलिस अधिकारी ने कहा, 'करवा देंगे.' अमिताभ तुरंत बोल पड़ा- 'करवा देंगे नहीं... करवा दीजिए जल्दी. बस आप लोग बोलते हैं. ताला कभी खुलता ही नहीं. हॉल में बैठे कई अधिकारी मुस्कुराने लगे. लेकिन बच्चा नहीं रुका. उसे शायद पहली बार लगा था कि जिले के सबसे बड़े अफसर उसकी बात सुन रहे हैं.

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डीएम ने बच्चे को समझाने की कोशिश की. कहा कि अभी तुम्हारा काम पढ़ाई करना है. लेकिन अमिताभ का जवाब फिर सबको चौंका गया. उसने कहा कि आप अपनी सैलरी से हम लोगों को पढ़ा तो देंगे नहीं. उसमें पैसे चाहिए. हमारी मम्मी रोज 50 रुपये की सब्जी लाती हैं. आजकल 50 रुपये में क्या होता है?

यह सिर्फ एक जवाब नहीं था. यह उस घर की कहानी थी, जहां पढ़ाई से पहले रोटी का सवाल खड़ा होता है. बच्चे ने बताया कि उसकी मां की आमदनी करीब तीन हजार रुपये है. उसी में घर भी चलाना है और बच्चों की पढ़ाई भी.

यह भी पढ़ें: PM बनूंगा तो स्कूल बंद कर दूंगा...  42 डिग्री में स्कूल जाते बच्चे का वीडियो वायरल

बातचीत के दौरान अचानक अमिताभ ने एक और टिप्पणी कर दी. उसने पुलिस अफसरों की तरफ देखते हुए कहा कि आप लोगों को तो बस थोड़ा कमीशन दे दो, बस काम हो जाता है. यह सुनकर वहां मौजूद कुछ अधिकारी मुस्कुराते नजर आए. डीएम ने बच्चे को तुरंत टोका और कहा कि इतना ज्यादा नहीं बोलना चाहिए. कई बार ऐसी बातें बोल देते हो जो सामने वाले को अच्छी नहीं लगतीं.

डीएम ने बच्चे को समझाया कि अभी उसकी उम्र पढ़ने की है और अगर कोई परेशानी हो तो प्रशासन को बताए. लेकिन बच्चा अपनी बात पर डटा रहा. उसका कहना था कि जब घर की समस्या ही खत्म नहीं होगी, तो पढ़ाई कैसे होगी?

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बाद में मीडिया से बातचीत में 13 साल के अमिताभ ने कहा कि उसकी मां कई बार शिकायत दे चुकी हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ. वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय पुलिस अमिताभ के घर पहुंची. वहां उसकी मां से भी बात की गई.

मां ने बताया कि बेटा उनसे यह कहकर निकला था कि स्कूल से टीसी कटवाने जा रहा है. बाद में पता चला कि वह सीधे संपूर्ण समाधान दिवस में पहुंच गया. मां ने यह भी कहा कि परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा है. पति मानसिक रूप से बीमार हैं और घर चलाने की जिम्मेदारी उन्हीं पर है. उन्होंने उम्मीद जताई कि अब शायद उनके घर का विवाद सुलझ जाए.

वायरल हुआ वीडियो, शुरू हुई बहस

अब इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. कुछ लोग अमिताभ की बेबाकी की तारीफ कर रहे हैं. उनका कहना है कि जिस उम्र में बच्चे खेलते हैं, उस उम्र में वह सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहा है.

एक 13 साल का बच्चा जब जिले के सबसे बड़े अफसर के सामने खड़ा होकर अपने घर, अपनी मां, अपनी पढ़ाई और अपने भविष्य की बात करता है, तो वह सिर्फ एक शिकायत नहीं सुनाता. वह उस व्यवस्था का आईना भी दिखाता है, जहां कई बार फाइलों से ज्यादा असर एक वायरल वीडियो का होता है.

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