'राम नाम सत्य है...', गोरखपुर में सपा कार्यकर्ताओं ने निकाली बुलडोजर की शव यात्रा- Video

सुप्रीम कोर्ट ने 1 अक्तूबर तक बुलोडजर की कार्रवाई पर रोक लगा दी है. ऐसे में अब सिर्फ सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जे पर ही बुलडोजर चल सकेगा. इसी बीच सपा कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को गोरखपुर में बुलडोजर की शव यात्रा निकाली.

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गोरखपुर में सपा कार्यकर्ताओं ने निकाली बुलडोजर की शव यात्रा गोरखपुर में सपा कार्यकर्ताओं ने निकाली बुलडोजर की शव यात्रा

गजेंद्र त्रिपाठी

  • गोरखपुर,
  • 20 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 2:19 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर कार्रवाई को लेकर बड़ा आदेश दिया है. इस आदेश के बाद से विपक्ष बीजेपी पर हमलावर है. इसी बीच शुक्रवार को गोरखपुर में सपा कार्यकर्ताओं ने बुलडोजर की शव यात्रा निकाली. इस दौरान कार्यकर्ताओं ने रूमाल पर प्लास्टिक का बुलडोजर रखा और राम नाम सत्य का नारा लगाया.

इसके अलावा गोरखपुर में सपा कार्यकर्ताओं ने विभिन्न मांगों को लेकर शहर के पंत पार्क से जिलाधिकारी कार्यालय तक भी पैदल मार्च निकाला और योगी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. सपा कार्यकर्ताओं ने बुलडोजर को लेकर सुप्रीम के हलिया आदेश पर खुशी जताई है. 

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सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर पर दिया है ये आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने डिमोलिशन यानी बुलडोजर एक्शन पर मंगलवार को रोक लगा दी है. यह रोक एक अक्टूबर तक के लिए लगाई गई है. कोर्ट का कहना है कि सार्वजनिक अतिक्रमण पर ही एक्शन होगा.

कोर्ट ने बुलडोजर कार्रवाई पर राज्यों को निर्देश देते हुए कहा है कि बुलडोजर न्याय का महिमामंडन बंद होना चाहिए. कानूनी प्रक्रिया के तहत ही अतिक्रमण हटाएं. 

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सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अवैध निर्माण पर तो नोटिस के बाद ही बुलडोजर चल रहे हैं. इस पर जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि सड़कों, गलियों, फुटपाथ या सार्वजनिक जगहों पर किए अवैध निर्माण को समुचित प्रक्रिया के साथ ढहाने की छूट रहेगी.

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बता दें कि उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में बुलडोजर से ध्वस्तीकरण कार्रवाई के खिलाफ दाखिल जमीयत उलेमा-ए-हिंद की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह बात कही. 

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ के समक्ष सॉलिसिटर तुषार मेहता ने कहा कि डिमोलिशन की कार्रवाई जहां हुई है, वो कानूनी प्रकिया का पालन करके हुई है. एक समुदाय विशेष को टारगेट करने का आरोप गलत है. एक तरह से गलत नैरेटिव फैलाया जा रहा है.

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इस पर जस्टिस गवई ने कहा कि इस नैरेटिव से हम प्रभावित नहीं हो रहे हैं. हम ये साफ कर चुके हैं कि हम अवैध निर्माण को संरक्षण देने के पक्ष में नहीं है. हम एग्जीक्यूटिव जज नहीं बन सकते हैं. जरूरत है कि डिमोलिशन की प्रकिया स्ट्रीमलाइन हो.

जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि कोर्ट के बाहर जो बातें हो रही हैं, वो हमें प्रभावित नहीं करती. हम इस बहस में नहीं जाएंगे कि किसी खास समुदाय को टारगेट किया जा रहा है या नहीं. अगर गैरकानूनी डिमोलिशन का एक भी मसला है तो वो संविधान की भावना के खिलाफ है.
 

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