बरी होने के बाद बृजभूषण बोले- मैं सांसद बनने के लिए डिजर्व करता हूं, यौन उत्पीड़न कानून की समीक्षा हो

गोंडा में सत्यमेव जयते रैली के बाद पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि अगर पार्टी विचार करेगी तो जनता उन्हें सांसद बनाएगी, क्योंकि वह खुद को इसके योग्य मानते हैं. उन्होंने कहा कि वह पार्टी से ऊपर नहीं हैं. साथ ही उन्होंने यौन उत्पीड़न से जुड़े कानून की समीक्षा की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि इसके दुरुपयोग से परिवार बर्बाद हो रहे हैं.

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पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह. (Photo: ITG) पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह. (Photo: ITG)

अंचल श्रीवास्तव

  • गोंडा ,
  • 06 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:08 PM IST

गोंडा के नंदिनी नगर महाविद्यालय, नवाबगंज में आयोजित सत्यमेव जयते रैली के बाद पूर्व सांसद और भारतीय जनता पार्टी के नेता बृजभूषण शरण सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कई मुद्दों पर अपनी बात रखी. उन्होंने सांसद बनने की संभावना, अदालत के फैसले, यौन उत्पीड़न से जुड़े कानून की समीक्षा, विपक्ष की राजनीति और पहलवानों के आंदोलन पर अपने विचार व्यक्त किए. सांसद बनने की संभावना पर पूछे गए सवाल के जवाब में बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि अगर पार्टी विचार करेगी तो जनता उन्हें जरूर भेजेगी. उन्होंने कहा कि वह खुद को सांसद बनने के योग्य मानते हैं, लेकिन पार्टी से ऊपर नहीं हैं. उनके मुताबिक अंतिम फैसला पार्टी का होगा.

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बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि वह सुबह अयोध्या पहुंचे और सबसे पहले हनुमानगढ़ी जाकर दर्शन किए. इसके बाद एयरपोर्ट से लेकर नंदिनी नगर तक बड़ी संख्या में समर्थकों ने उनका स्वागत किया. उन्होंने कहा कि उनके स्वागत में प्रदेश के लगभग सभी हिस्सों से लोग पहुंचे थे और बड़ी संख्या में उनका समर्थन देखने को मिला. उन्होंने कहा कि अदालत से बरी होना खुशी का विषय नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सही नहीं थे.

127 तारीखों और साढ़े तीन साल की सुनवाई का किया जिक्र

उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही उनका कहना था कि यदि आरोप सही साबित हुए तो वह फांसी की सजा स्वीकार करेंगे. उन्होंने बताया कि इस मामले में 127 तारीखें पड़ीं और करीब साढ़े तीन साल तक सुनवाई चली. उन्होंने कहा कि उन्होंने अदालत की एक भी तारीख नहीं छोड़ी और पूरी न्यायिक प्रक्रिया का पालन किया. उन्होंने दावा किया कि शिकायतकर्ताओं की ओर से कई बार सुनवाई टालने की कोशिश की गई और कुछ गवाह भी अदालत में पेश नहीं हुए. उनके अनुसार, इस मामले में कुल 27 गवाह पेश हुए.

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बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि अदालत ने उन्हें 'बाइज्जत बरी' किया. उन्होंने कहा कि यदि फैसला केवल सबूतों के अभाव में राहत देने वाला होता तो उन्हें दुख होता. उन्होंने यह भी कहा कि फैसले में 'बाइज्जत' और 'षड्यंत्र' जैसे शब्दों का उल्लेख हुआ है. उन्होंने दावा किया कि इस पूरे मामले में कुल 42 बड़े लोग शामिल थे. उन्होंने कहा कि यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर इतना बड़ा आंदोलन दुनिया के किसी भी देश में नहीं हुआ. उनके अनुसार, आंदोलन कई महीनों तक चला और आरोप लगाने वालों में विश्व और ओलंपिक स्तर के खिलाड़ी शामिल थे, जिससे पूरे देश में इस मामले को लेकर चर्चा हुई.

उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले से केवल उन्हें ही नहीं, बल्कि उन खिलाड़ियों और उनके परिवारों को भी राहत मिली है जो कुश्ती से जुड़े हैं. उनके मुताबिक शुरुआत में इस मामले के कारण कई परिवारों के मन में खेल व्यवस्था को लेकर डर पैदा हो गया था. रैली के दौरान उठी कानून की समीक्षा की मांग पर बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि अयोध्या के संतों ने इस कानून की समीक्षा करने और इसके दुरुपयोग को रोकने की मांग की है.

उन्होंने कहा कि उनका भी यही मत है कि कानून की समीक्षा होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यह मांग उनके लिए नहीं है, क्योंकि वह बाइज्जत बरी हो चुके हैं, बल्कि उन लोगों के लिए है जो कथित दुरुपयोग के कारण परेशान होते हैं. उन्होंने दावा किया कि ऐसे मामलों में परिवार बर्बाद हो रहे हैं और कुछ लोग आत्महत्या तक कर लेते हैं. उन्होंने कहा कि कानून महिलाओं की सुरक्षा के उद्देश्य से बनाया गया था, लेकिन अब इसका राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल होने का आरोप भी सामने आ रहा है. उनके अनुसार, इसकी समीक्षा की जरूरत है.

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हाईकोर्ट जाने का अधिकार सबको, पहले पूरी हो न्यायिक प्रक्रिया

पहलवानों की ओर से हाई कोर्ट जाने की संभावना पर उन्होंने कहा कि यह उनका कानूनी अधिकार है. अगर उन्हें लगता है कि न्याय नहीं मिला तो वे हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं. उन्होंने कहा कि पहले न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने दी जाए, उसके बाद वह तय करेंगे कि उन्हें आगे कोई कानूनी कदम उठाना है या नहीं. विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि विरोधी दल कभी अपने एजेंडे के साथ आंदोलन नहीं करते. उन्होंने कहा कि कभी किसानों, कभी शाहीन बाग, कभी महिलाओं और अब बच्चों के मुद्दे के सहारे राजनीति की जाती है. उनके अनुसार, विपक्ष सीधे राजनीतिक मुकाबला करने के बजाय दूसरे मुद्दों का सहारा लेकर सरकार और विरोधियों पर हमला करता है.
 

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