PM मोदी से सपरिवार मिले वरुण गांधी, क्या जल्द खत्म होने वाला है सियासी 'वनवास'?

पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के बेटे व बीजेपी के पूर्व सांसद वरुण गांधी ने अपने परिवार के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है. इस मुलाकात को बंगाल चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन सवाल यही है कि क्या वरुण गांधी का सियासी वनवास खत्म होने वाला है?

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पीएम मोदी से वरुण गांधी ने सपरिवार मुलाकात की (Photo-X) पीएम मोदी से वरुण गांधी ने सपरिवार मुलाकात की (Photo-X)

कुमार अभिषेक

  • लखनऊ,
  • 17 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 12:49 PM IST

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से बीजेपी के सांसद रहे वरुण गांधी ने मंगलवार को सपरिवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. इस दौरान वरुण गांधी के साथ उनकी पत्नी और बेटी उपस्थित रहीं. वरुण गांधी ने पीएम से आशीर्वाद लिया और मार्गदर्शन हासिल करने की बात कही है.

वरुण गांधी ने पीएम मोदी से मुलाकात की तस्वीर अपने  सोशल मीडिया एक पोस्ट किया. वरुण गांधी ने कहा कि परिवार सहित  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर उनका आर्शीर्वाद और मार्गदर्शन पाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. पीएम मोदी को लेकर वरुण ने लिखा, 'आपके आभामंडल में अद्भुत पितृवत स्नेह और संरक्षण का भाव है. आपसे हुई भेंट इस विश्वास को और भी दृढ़ बना देती है कि आप देश और देशवासियों के सच्चे अभिभावक हैं.'

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वरुण गांधी की मुलाकात को लेकर सियासी अटकले लगी जा रही है. वरुण गांधी ने पीएम से मुलाकात ऐसे समय किया है, जब पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों में चुनावी बिगुल फुंक चुका है.  ऐसे में क्या वरुण गांधी का सियासी वनवास क्या खत्म होने वाला है? 

वरुण गांधी की मुलाकात का बंगाल कनेक्शन?

वरुण गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की है इस मुलाकात को बंगाल चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि वरुण गांधी की पत्नी मूल रूप से बंगाली है. बीजेपी बंगाल की सत्ता में वापसी के लिए पूरी जोर इस बार लगा रही है. ऐसे में वरुण गांधी का इस्तेमाल बीजेपी बंगाल चुनाव प्रचार में कर सकती है.

वरुण गांधी बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव रहते हुए पश्चिम बंगाल के प्रभारी रहे हैं. बंगाल में बीजेपी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए उन्होंने उस समय के बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष रहे राहुल सिन्हा के साथ काम किया. बीजेपी ने राहुल सिन्हा को राज्यसभा भेजा है तो अब वरुण गांधी की पीएम मोदी को बंगाल में उन्हें सक्रिय करने के रूप में देखा जा रहा है. 

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वरुण गांधी का क्या खत्म होगा सियासी वनवास

बीजेपी के पूर्व सांसद वरुण गांधी काफी समय से बीजेपी से नाराज चल रहे थे,  2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने पीलीभीत से उनका टिकट काट दिया था और उनकी जगह पर ब्राह्मण समाज से आने वाले जितिन प्रसाद को दिया गया था. जितिन प्रसाद पीलीभीत से सांसद चुने जाने के बाद मोदी सरकार में मंत्री हैं 

वरुण गांधी की मां व पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी को सुल्तानपुर से लोकसभा टिकट 2024 में दिया गया था, लेकिन वो चुनाव हार गई थी.  बीजेपी ने उन्हें पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी और महासचिव के पद से हटा दिया था. इसके बाद से भाजपा के इस गांधी परिवार और बीजेपी के बीच एक बड़ी दूरी देखी जा रही थी. वरुण गांधी भी सरकार पर निशाना साधने का कोई मौका नहीं छोड़ते थे. किसान से लेकर नौजवान तक के मुद्दे पर मुखर थे. 

हालांकि, पीएम मोदी से मुलाकात के बाद अब जिस तरीके से वरुण गांधी ने प्रधानमंत्री के साथ अपनी तस्वीर शेयर की है और उनके साथ हुई मुलाकात को एक पिता के समान का व्यवहार करार दिया है ऐसा लगता है अब राजनीतिक दूरियां खत्म हो रही हैं. ऐसे में उनका सियासी वनवास भी खत्म हो सकता है. 

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वरुण गांधी तीन बार सांसद रहे, जिसमें 2009 में पीलीभीत, 2014 मे ंसुल्तानपुर और 2019 में फिर से पीलीभीत से चुने गए, लेकिन 2024 में उनका टिकट काट दिया गया था. 

वरुण की संगठन या फिर सरकार में होगी वापसी

वरुण गांधी की पीएम मोदी से मुलाकात ऐसे समय हुई जब बीजेपी की राष्ट्रीय टीम से लेकर यूपी में पंकज चौधरी की टीम बनाने की कवायद चल रही है. यही नहीं उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और इस साल अक्तूबर में राज्यसभा के चुनाव है. 

 बीजेपी की कमान जब तक राजनाथ सिंह के पास रही, तब तक वरुण गांधी की पार्टी में सम्मानजनक हैसियत रही. वे पार्टी महासचिव रहे, पश्चिम बंगाल में पार्टी के प्रभारी भी रहे. राजनाथ सिंह के बीजेपी अध्यक्ष रहते हुए वरुण गांधी पहली बार 2009 में पीलीभीत से लोकसभा चुनाव लड़े थे.  

जब बीजेपी में नरेंद्र मोदी को पीएम प्रत्याशी बनाने के लिए 2013 में उठापटक जारी थी, तब वरुण गांधी ने केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह की तुलना अटल बिहारी वाजपेसी से करते हुए पीएम उम्मीदवार बनाने की वक़ालत की थी. 

वहीं, बीजेपी की कमान जब अमित शाह के हाथ में आई, तो उन्होंने वरुण गांधी को पार्टी महासचिव से हटा दिया. उनसे बंगाल की भी ज़िम्मेदारी वापस ले ली गई. इसके बाद से बीजेपी में हाशिए पर चले गए.

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प्रयागराज में आयोजित 2016 की बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक दौरान, उनके समर्थकों ने वरुण गांधी को 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश करने के लिए 'शक्ति प्रदर्शन' किया. यह भाजपा और संघ नेतृत्व को रास नहीं आया. इसके बाद से वरुण गांधी धीरे-धीरे हाशिए पर चले गए और फिर उन्होंने बागी तेवर अपना लिया. 

वरुण गांधी ने जिस तरह से पीएम मोदी से मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री को अपना अभिवाहक बताया और मार्गदर्शन देने की बात कही है, उससे साफ है कि बीजेपी में फिर से उनके अच्छे दिन आने वाले हैं. यूपी में राज्यसभा की 10 सीटें नंवबर में खाली हो रही है. ऐसे में बीजेपी उन्हें राज्यसभा भेज सकती है. इसके अलावा बीजेपी के बन रहे नए संगठन में कोई अहम रोल दिया जा सकता है. 

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