पहले ऑनलाइन नेटवर्क बनाया, फिर 'PASSIVE INCOME' के नाम पर बिजनौर के 3 हजार लोगों से ₹25 करोड़ की ठगी

बिजनौर में कथित निवेश घोटाले का बड़ा मामला सामने आया है. करीब 3 हजार निवेशकों ने आरोप लगाया है कि ऑनलाइन मीटिंग और पैसिव इनकम का लालच देकर उनसे ₹20 से ₹25 करोड़ तक का निवेश कराया गया. रकम वापस मांगने पर धमकियां देने का आरोप है. पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

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निवेश के नाम पर करोड़ों का घोटाला. (Photo: Representational) निवेश के नाम पर करोड़ों का घोटाला. (Photo: Representational)

ऋतिक राजपूत

  • बिजनौर ,
  • 27 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:08 PM IST

उत्तर प्रदेश के जनपद बिजनौर में कथित निवेश घोटाले का एक बड़ा मामला सामने आया है. करीब 3 हजार निवेशकों ने पुलिस अधीक्षक बिजनौर को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि कुछ लोगों ने हर महीने मोटी कमाई और पैसिव इनकम का लालच देकर उनसे करोड़ों रुपये का निवेश कराया. शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क के जरिए जिले के लोगों से करीब ₹20 से ₹25 करोड़ तक की रकम जुटाई गई. निवेशकों की शिकायत के आधार पर बिजनौर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है.

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पीड़ितों के अनुसार, आरोपी नवीन नेगी, राजेश वशिष्ठ, पूजा विश्वास, मोहित कुमार, मुकेश कुमार समेत अन्य लोगों ने मिलकर एक नेटवर्क तैयार किया था. आरोप है कि यह समूह ऑनलाइन मीटिंग और व्यक्तिगत बैठकों के माध्यम से लोगों को जोड़ता था. शुरुआत में लोगों का भरोसा जीतने के लिए नेटवर्क तैयार किया गया और फिर उन्हें हर महीने निश्चित और आकर्षक कमाई का भरोसा देकर निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया.

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि आरोपियों ने पहले ऑनलाइन मीटिंग और व्यक्तिगत बैठकों के जरिए लोगों का नेटवर्क तैयार किया. इसके बाद लोगों को बताया गया कि निवेश करने पर हर महीने नियमित और आकर्षक आय मिलेगी. इसी भरोसे के आधार पर बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जमा पूंजी निवेश कर दी.

अलग-अलग बैंक खातों और नकद के जरिए जुटाई गई रकम का आरोप

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प्रार्थना पत्र के अनुसार, आरोपियों ने निवेशकों को अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराने के लिए कहा. कई मामलों में नकद पैसे भी लिए गए. शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पूरी योजना को वैध दिखाने के लिए कथित तौर पर फर्जी और कूटरचित कंपनियों का सहारा लिया गया. पीड़ितों का दावा है कि बिजनौर जिले के करीब 3,000 लोगों से ₹20 से ₹25 करोड़ तक की रकम जुटाई गई. निवेशकों का कहना है कि उन्हें हर महीने अच्छी कमाई का भरोसा दिया गया था, लेकिन बाद में उन्हें न तो तय लाभ मिला और न ही उनकी मूल रकम वापस की गई.

शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि निवेशकों का विश्वास जीतने के लिए निवेश और मासिक कमाई से जुड़े वीडियो और फोटोग्राफ तैयार किए गए. इनका इस्तेमाल कथित तौर पर लोगों को यह विश्वास दिलाने के लिए किया गया कि योजना सफल है और निवेश करने पर अच्छा मुनाफा मिलेगा. पीड़ितों का आरोप है कि जब उन्होंने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की तो उन्हें धमकियां मिलने लगीं. शिकायत में कहा गया है कि आरोपियों ने रुपये मांगने वालों को आत्महत्या के झूठे मुकदमे में फंसाने और जेल भिजवाने तक की धमकी दी.

धोखाधड़ी, जालसाजी और कूटरचना की धाराओं में कार्रवाई की मांग

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प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस पूरे नेटवर्क का कथित मुख्य सरगना दुबई भाग चुका है. इसी आशंका को देखते हुए शिकायतकर्ताओं ने अन्य आरोपियों के पासपोर्ट जब्त करने, उनकी चल और अचल संपत्तियों की जांच कराने और देश छोड़कर फरार होने से रोकने की मांग की है. पीड़ितों ने पुलिस अधीक्षक अभिषेक झा से पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराने की मांग की है.

साथ ही आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और कूटरचना सहित संबंधित धाराओं में सख्त कार्रवाई करने तथा निवेशकों की मेहनत की कमाई वापस दिलाने की अपील की है. बिजनौर पुलिस ने शिकायतकर्ताओं की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्र के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली है. फिलहाल मामले की जांच की जा रही है. पुलिस का कहना है कि जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लगाए गए आरोपों की पुष्टि हो सकेगी.
 

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