जज को फोन करना पड़ा भारी: IAS दुर्गा शक्ति नागपाल पर भड़का हाईकोर्ट, अवमानना नोटिस की तैयारी

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने गोंडा के एक तीन दशक पुराने भूमि विवाद मामले में सिविल जज को कथित रूप से फोन कर प्रभावित करने की कोशिश पर देवीपाटन मंडल की आयुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल को फटकार लगाई है. अदालत ने इस कृत्य को न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला मानते हुए आपराधिक अवमानना पीठ के समक्ष भेजने का निर्देश दिया.

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देवीपाटन मंडल की आयुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल (File Photo) देवीपाटन मंडल की आयुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल (File Photo)

aajtak.in

  • प्रयागराज ,
  • 24 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 9:51 AM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में न्यायमूर्ति सैयद क़मर हसन रिज़वी ने गोंडा के 1997 के एक भूमि विवाद से जुड़े मामले की सुनवाई की. अदालत ने इस दौरान देवीपाटन मंडल की आयुक्त IAS दुर्गा शक्ति नागपाल द्वारा सिविल जज (सीनियर डिवीजन) शबीना खान को कथित तौर पर फोन कर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के प्रयास पर सख्त रुख अपनाया. 

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न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इस घटना की रिपोर्ट जज शबीना खान ने जिला जज को दी थी, जिसके बाद मामला ट्रांसफर किया गया. हाई कोर्ट ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए इस पूरे प्रकरण को आपराधिक अवमानना से जुड़ी पीठ के समक्ष विचार करने के लिए भेजने के निर्देश दिए.

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'न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा हमला'

हाईकोर्ट ने कहा कि फोन कॉल के माध्यम से एक मुकदमेबाज़ पक्ष का न्यायाधीश से संपर्क साधना बेहद चौंकाने वाला है. जज शबीना खान द्वारा रिपोर्ट की गई बातचीत की भाषा और शैली से स्पष्ट प्रभाव डालने का संकेत मिलता है. अदालत ने स्पष्ट किया कि अधीनस्थ अदालतों को किसी भी प्रकार के दबाव से बचाना अनिवार्य है.

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'न्याय के रास्ते में बाधा'

न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि न्यायाधीशों पर दबाव बनाने या उन्हें धमकाने का प्रयास न्याय के रास्ते में बाधा डालता है. आयुक्त नागपाल द्वारा फोन करने से इनकार न किए जाने पर अदालत ने इसे गंभीर माना और कहा कि पीठासीन अधिकारियों को बिना किसी डर के काम करने की आजादी मिलनी चाहिए.

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