विधवा की FD से 19.90 लाख निकालना SBI को पड़ा भारी, HC ने दिया ब्याज सहित लौटाने का आदेश

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने SBI को महिला की FD से निकाले गए 19.90 लाख रुपये ब्याज सहित वापस करने का आदेश दिया है. बैंक ने महिला के दिवंगत पति के पर्सनल लोन की वसूली के लिए यह राशि निकाली थी, जबकि महिला न तो लोन की सह-उधारकर्ता थी और न ही गारंटर.

Advertisement
सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 3:45 AM IST

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने SBI को एक विधवा की FD से निकाले गए 19.90 लाख रुपये तुरंत वापस करने का आदेश दिया है. बैंक ने यह रकम महिला के दिवंगत पति के पर्सनल लोन की वसूली के लिए उसके FD खाते से निकाली थी. कोर्ट ने बैंक की इस कार्रवाई को बैंकिंग नियमों का उल्लंघन मानते हुए महिला को 1 लाख रुपये का हर्जाना देने का भी आदेश दिया. 

Advertisement

कोर्ट ने नेहा मिश्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. नेहा के पति लखनऊ में असिस्टेंट प्रोफेसर थे. उन्होंने नवंबर 2020 में SBI से 15 लाख रुपये का पर्सनल लोन लिया था.  मई 2021 में कोविड-19 के दौरान उनकी मौत हो गई.

कोर्ट ने पाया कि नेहा मिश्रा न तो उनकी पति के लोन में उनकी सह-उधारकर्ता (co-borrower) थी और न ही गारंटर या नॉमिनी. उनके और बैंक के बीच लोन को लेकर कोई भी कानूनी अनुबंध नहीं था.  खास बात तो ये थी कि लोन एक इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत कवर था, जिसके लिए मृतक ने 8,803 रुपये का प्रीमियम भी भरा था. 

बैंक ने पहले भेजा नोटिस, फिर FD से निकाले पैसे

मई 2021 में नेहा के पति की मौत के बाद, SBI ने सितंबर 2025 में नेहा को कानूनी नोटिस भेजा. इस नोटिस में 13.87 लाख रुपये के बकाया लोन का भुगतान करने को कहा गया था. इसके बाद बैंक ने उनकी सैलरी अकाउंट को भी रोक दिया. हालांकि, RBI लोकपाल के हस्तक्षेप के बाद इस रोक को हटा दिया गया. 

Advertisement

यह भी पढ़ें: डिजिटल अरेस्ट गैंग का भंडाफोड़, IIT इंजीनियर और बैंक मैनेजर समेत कई अरेस्ट

इस दौरान बातचीत चल ही रही थी लेकिन SBI ने नेहा की FD को भुना दिया और उसमें से 19.90 लाख रुपये निकाल लिए.

बैंक देगा महिला को 1 लाख का मुआवजा

कोर्ट के मुताबिक, महिला ने 2025 में SBI की आशियाना ब्रांच में FD कराई थी. बाद में इसे जानकीपुरम ब्रांच में ट्रांसफर कर दिया, जहां से उनके पति ने लोन लिया था. इसके बाद FD की रकम निकाल ली गई और अकाउंट को फिर से आशियाना ब्रांच में ट्रांसफर कर दिया गया.

जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने कहा कि बैंक ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं दिखा पाया, जो उसे पति के लोन की वसूली के लिए पत्नी से खाते से सीधे पैसे निकालने की अनुमति देता हो. कोर्ट ने बैंक की इस कार्रवाई को 'चोरी-छिपे' किया गया काम बताया. कोर्ट ने कहा कि बैंक ग्राहकों के पैसे के संरक्षक होते हैं और उसे अमानत के तौर पर रखते हैं. 

कोर्ट ने SBI को आदेश दिया कि वह चार हफ्ते के भीतर 19.90 लाख रुपये की पूरी रकम FD की दर से ब्याज सहित वापस करे. साथ ही, महिला को 1 लाख रुपये का मुआवजा भी दिया जाए. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »