निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने बनाई नई पार्टी, नाम रखा 'RAM'

निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने वृंदावन में अपनी नई राजनीतिक पार्टी 'राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा' (RAM) बनाने का ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि पार्टी भगवान राम व कृष्ण के आदर्शों पर चलेगी. उन्हें 26 जनवरी को अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित किया गया था और बाद में विभागीय जांच शुरू हुई.

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अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि पार्टी भगवान राम और कृष्ण के आदर्शों पर चलेगी. (Photo: Screengrab) अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि पार्टी भगवान राम और कृष्ण के आदर्शों पर चलेगी. (Photo: Screengrab)

aajtak.in

  • लखनऊ,
  • 23 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:54 PM IST

निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को वृंदावन में अपनी नई राजनीतिक पार्टी बनाने का ऐलान किया. उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी का नाम राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा (RAM) रखा गया है. अग्निहोत्री ने यह घोषणा श्री हरिदास धाम आश्रम में पत्रकारों से बातचीत के दौरान की. 

उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी की विचारधारा भगवान राम और भगवान कृष्ण दोनों के आदर्शों को साथ लेकर चलेगी और वह इन्हीं मूल्यों के साथ जनता के बीच जाएंगे. उन्होंने कहा कि वृंदावन की पवित्र भूमि से राजनीतिक यात्रा शुरू करना उनके लिए सौभाग्य की बात है. ठाकुर बांके बिहारी मंदिर की नगरी से संकल्प लेना उनके लिए विशेष महत्व रखता है.

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कौन हैं अलंकार अग्निहोत्री?

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 26 जनवरी को अनुशासनहीनता के आरोप में अग्निहोत्री को निलंबित कर दिया था. उसी दिन उन्होंने अपना इस्तीफा भी दिया था. बाद में उन्हें शामली जिलाधिकारी कार्यालय से संबद्ध किया गया. मंडलायुक्त ने उन्हें 15 दिन के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है.

क्यों दिया इस्तीफा?

अग्निहोत्री ने यूजीसी नियमों को लेकर आपत्ति जताते हुए प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) से इस्तीफा दिया था. उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी और सरकार को 'ब्राह्मण विरोधी' बताने का आरोप भी लगाया था. साथ ही उन्होंने बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह पर 45 मिनट तक रोककर रखने का आरोप लगाया. बाद में डीएम की अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश पर उन्हें निलंबित किया गया और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई.

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अधिकारियों के अनुसार उनके खिलाफ तीन मुख्य आरोप हैं- केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देना, सरकारी कर्मचारी होते हुए जातिगत टिप्पणियां करना और सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन करते हुए प्रदर्शन व नारेबाजी में शामिल होना. विभागीय जांच जारी है.

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