अखिलेश यादव को बताया 'कृष्ण', हाथ में संविधान... पोस्टर पर BJP ने माफी की मांग की

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के 53वें जन्मदिन पर उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया. वाराणसी में समाजवादी पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं ने अखिलेश यादव का एक पोस्टर जारी किया, जिसमें उन्हें भगवान श्रीकृष्ण के रूप में दिखाया गया. पोस्टर सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इसे सनातन धर्म का अपमान बताते हुए सपा कार्यकर्ताओं से सार्वजनिक माफी की मांग की है.

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अखिलेश की इसी पोस्टर पर विवाद हो गया. Photo Social Media अखिलेश की इसी पोस्टर पर विवाद हो गया. Photo Social Media

aajtak.in

  • लखनऊ,
  • 01 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:02 PM IST

अखिलेश यादव के जन्मदिन के अवसर पर वाराणसी में समाजवादी युवजन सभा के करीब 25-30 कार्यकर्ताओं ने हवन-पूजन का आयोजन किया. इस दौरान जारी किए गए पोस्टर में अखिलेश यादव को भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप में संविधान की प्रति हाथ में लिए हुए दिखाया गया. समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश महासचिव अजय फौजी ने कहा कि इस पोस्टर का उद्देश्य अखिलेश यादव की संविधान और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाना है.

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अजय फौजी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने हमेशा धर्म और न्याय का मार्ग दिखाया था. उसी तरह अखिलेश यादव भी संविधान की रक्षा और न्याय की आवाज उठाने का काम कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू मान्यताओं के अनुसार भगवान कल्कि, भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं और पोस्टर के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि अखिलेश यादव देश और समाज के हित में श्रीकृष्ण द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चल रहे हैं.

फौजी ने हाल ही में अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मुद्दे का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि यदि अखिलेश यादव राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर आवाज उठा रहे हैं तो वह सभी मंदिरों और समाज के हर वर्ग के हितों की भी चिंता करते हैं. हवन का उद्देश्य भी समाज में न्याय, धर्म और सद्भाव की स्थापना की प्रार्थना करना था.

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वहीं, इस पूरे मामले पर बीजेपी ने कड़ी आपत्ति जताई है. पार्टी के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि जिन लोगों की राजनीति हमेशा तुष्टिकरण पर आधारित रही है और जिन्होंने राम मंदिर निर्माण में बाधाएं खड़ी कीं, उनके नेता को भगवान के रूप में प्रस्तुत करना सनातन धर्म और करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं का अपमान है.

बीजेपी ने सपा कार्यकर्ताओं से इस कृत्य के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है. पार्टी का कहना है कि धार्मिक आस्थाओं से जुड़े प्रतीकों का राजनीतिक इस्तेमाल नहीं होना चाहिए और इससे लोगों की भावनाएं आहत होती हैं.

इस पोस्टर को लेकर अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. एक ओर समाजवादी पार्टी इसे संविधान और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बता रही है, वहीं बीजेपी इसे धार्मिक भावनाओं का अपमान करार देकर सपा पर निशाना साध रही है.

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