कॉमेडियन वीर दास ने US में सुनाई ये कविता, लोग बताने लगे 'देश-विरोधी'

अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में स्टैंडअप कॉमेडी के दौरान वीर दास ने 'टू इंडियाज' नाम की एक कविता पढ़ी. इस वीडियो का एक सेगमेंट वीर दास ने अपने यूट्यूब चैनल पर अपलोड कर दिया.

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कॉमेडियन और एक्टर वीर दास (File Photo) कॉमेडियन और एक्टर वीर दास (File Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 नवंबर 2021,
  • अपडेटेड 6:04 PM IST

कॉमेडियन और एक्टर वीर दास विवादों में हैं. अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में स्टैंडअप कॉमेडी के दौरान वीर दास ने 'टू इंडियाज' नाम की एक कविता पढ़ी. इस वीडियो का एक सेगमेंट वीर दास ने अपने यूट्यूब चैनल पर अपलोड कर दिया. इस पर सोशल मीडिया पर कुछ यूज़र्स उन्हें विदेश में जाकर भारत का अपमान करने वाला बता रहे हैं.

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इस वीडियो को ट्विटर पर शेयर करते हुए बीजेपी कार्यकर्ता प्रीति गांधी ने लिखा, 'वीर दास आप एक भारत से आते हैं, जहां आप अपने ही राष्ट्र का अपमान करके जीवन यापन करते हैं! आप एक ऐसे भारत से आते हैं, जो आपकी घिनौनी, अपमानजनक बकवास को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के रूप में पेश करने की अनुमति देता है! आप एक ऐसे भारत से आते हैं, जिसने आपकी बदनामी को लंबे समय तक सहन किया है!'

वीर दास के द्वारा पढ़ी गई कविता का कुछ अंश-

मैं उस भारत से आता हूं, जहां AQI 9000 है लेकिन हम फ़िर भी अपनी छतों पर लेटकर रात में तारे देखते हैं.

मैं उस भारत से आता हूं, जहां हम दिन में औरतों की पूजा करते हैं और रात में गैंगरेप करते हैं.

मैं उस भारत से आता हूं जहां आप हमारी हंसी की खिलखिलाहट हमारे घर की दीवारों के पार से भी सुन सकते हैं
और मैं उस भारत से भी आता हूं जो कॉमेडी क्लब की दीवारें तोड़ देता है, जब उसके अंदर से हंसी की आवाज़ आती है.

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मैं उस भारत से आता हूं, जहां ओल्ड लीडर्स अपने मरे पिता के बारे में बात करना बंद नहीं करते और न्यू लीडर्स अपनी जीवित मां के रास्तों पर चलना शुरू नहीं करते.

मैं उस भारत से आता हूं, जहां की एक बड़ी आबादी 30 साल से छोटी है लेकिन फिर भी 75 साल के लीडर्स के 150 साल पुराने आइडियाज़ को सुनना बंद नहीं करती.

मैं उस भारत से आता हूं, जहां लोग क्लब के बाहर सड़कों पर सोते हैं लेकिन साल में 20 बार तो सड़क ही क्लब होती है.

मैं उस भारत से आता हूं, जहां हम वेजेटेरियन होने में गर्व महसूस करते हैं लेकिन उन्हीं किसानों को कुचल देते हैं, जो ये सब्ज़ियां उगाते हैं.

मैं उस भारत से आता हूं जो कभी चुप नहीं होता और मैं उस भारत से आता हूं जो कभी नहीं बोलता.

मैं उस भारत से आता हूं, जहां बच्चे मास्क लगा कर एक दूसरे का हाथ थामते हैं और मैं उस भारत से भी आता हूं, जहां के लीडर्स बिना मास्क लगाए गले मिलते हैं

मैं उस भारत से आता हूं, जहां हम बॉलीवुड की वजह से ट्विटर पर बंटे होते हैं लेकिन थिएटर के अंधेरे में उसी बॉलीवुड की वजह से एक साथ होते हैं.

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मैं उस भारत से आता हूं, जहां हम जब भी ‘ग्रीन’ के साथ खेलते हैं ब्लीड ब्लू का नारा देते हैं लेकिन ग्रीन से हारने पर हम अचानक से ऑरेंज हो जाते हैं.

मैं उस भारत से आता हूं, जहां म्यूजिक हमारा ‘बहुत हार्ड’ है लेकिन जज़्बात ‘बहुत सॉफ्ट’ हैं.

मैं उस भारत से आता हूं, जो ये देखेगा और कहेगा ‘ये कॉमेडी नहीं है.. जोक कहां है ?’ और मैं उस भारत से भी आता हूं, जो ये देखेगा और जानेगा कि ये बहुत बड़ा जोक ही है. बस फ़नी नहीं है”.

 

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