शॉपिंग मॉल में बच्चे से हुई 'गलती', पिता से वसूले गए 3 लाख रुपये से अधिक

बच्चे की 'गलती' से एक मूर्ति गिर कर टूट गई. जिसके बाद उसके पिता से 3.3 लाख का जुर्माना वसूल लिया गया. लेकिन सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस छिड़ गई.

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मूर्ति के लिए देना पड़ा 3.3 लाख का हर्जाना (Credit- HK Teletubbies) मूर्ति के लिए देना पड़ा 3.3 लाख का हर्जाना (Credit- HK Teletubbies)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 मई 2022,
  • अपडेटेड 1:28 PM IST
  • मूर्ति की रिटेल कीमत 5 लाख रुपए से ज्यादा
  • 5.9 फीट की थी मूर्ति

एक टॉय शॉप में करीब 5 लाख रुपए की एक मूर्ति लगी थी. वह गिरकर टूट गई. जिसके बाद CCTV फुटेज देखकर मूर्ति गिराने वाले को पकड़ा गया और उससे हर्जाना वसूला गया. लेकिन हर्जाने को कई लोग गलत ठहरा रहे हैं.

चीन के हॉन्ग कॉन्ग का मोंगकॉक जिला. यहां लैंगहम प्लेस शॉपिंग मॉल के टॉय शॉप में 5.9 फीट की गोल्डन मूर्ति टुकड़ों में फर्श पर पड़ी दिखी. जिससे शॉप के स्टाफ के बीच सनसनी फैल गई. उन लोगों ने CCTV फुटेज चेक किया. जिसमें एक लड़का उस मूर्ति से सट के खड़ा दिखा. जब मूर्ति गिरने लगी तो उसने बचाने की भी कोशिश की, लेकिन वह असफल रहा. जिसके बाद मूर्ति जमीन पर गिर पड़ी.

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जब यह घटना हुई, तब लड़के के पिता चेंग, शॉप से बाहर फोन पर बात कर रहे थे. लेकिन जब मूर्ति के गिरने की आवाज उन तक पहुंची, तो उन्होंने पीछे मुड़कर देखा.

चेंग ने कहा- मेरा बेटा स्थिर खड़ा था. वह बस खिलौने को देख रहा था. इस घटना से मेरा बेटा इतना डर गया था कि उसे स्कूल तक छोड़ना पड़ा. उसने मुझसे पूछा मूर्ति इतनी डरावनी क्यों दिख रही थी.

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बेटे की गलती को मानकर, चेंग मूर्ति के पैसे देने को तैयार हो गए. मूर्ति की रिटेल कीमत 5 लाख रुपए से ज्यादा थी, लेकिन दुकानदार ने डिस्काउंट किया और उन्हें करीब 3.3 लाख रुपए का भुगतान करना पड़ा.

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दुकान के मालिक, KK Plus ने दावा किया कि मूर्ति का हर्जाना आपसी सहमति से तय किया गया था. दुकान की तरफ से जारी बयान में कहा गया- इस घटना पर तुरंत कार्रवाई की गई और सब कुछ क्लियर हो गया.

सोशल मीडिया पर भी मामला को लेकर बहस छिड़ गई. कुछ लोग शॉपकीपर को दोषी ठहरा रहे थे, वहीं दूसरा पक्ष बच्चे के खिलाफ दिखा. कुछ का मानना था कि बच्चे के पिता से झूठ बोलकर पैसे लिए गए. दूसरे पक्ष का कहना था कि मूर्ति को घेरकर रखा जाना चाहिए था, ताकि कोई करीब ही ना जा सके. कुछ लोगों को यह भी मानना था कि पैरेंट्स को बच्चे को संभालना चाहिए था.

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