अंग्रेजों के जमाने में कैसी होती थी दावत, 130 साल पुराना शाही मेन्यू हो रहा वायरल!

भारत के राजा-महाराजा अपनी दावतों में क्या खाते थे और उस दौर का मेनू कैसा होता था.सोशल मीडिया पर ऐसी ही एक शाही दावत का मेन्यू अब वायरल हो रहा है.

Advertisement
इतिहासकार नेहा वर्मानी 130 साल पुराना एक शाही मेन्यू शेयर किया है (Photo:X/@nehavermani) इतिहासकार नेहा वर्मानी 130 साल पुराना एक शाही मेन्यू शेयर किया है (Photo:X/@nehavermani)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:44 AM IST

राजा-महाराजाओं की जिंदगी हमेशा से लोगों की दिलचस्पी का विषय बनी रहती है. उनकी जिंदगी कैसी होती है, उनका खान-पान, कपड़े और रहने का तरीका.इन सबको जानने की लोगों में हमेशा जिज्ञासा रही है. वैसे इन सवालों के जवाब इतिहास के पन्नों में ही मिलते हैं. ऐसा ही एक सवाल है कि राजा-महाराजाओं की दावत कैसी होती थी, उनके मेन्यू में क्या शामिल होता था. वह दौर जब भारत अंग्रेजों का गुलाम था, इस सवाल का जवाब एक वायरल मेन्यू में मिलता है.

Advertisement

इतिहासकार नेहा वर्मानी, जो मुगल भारत और दक्षिण एशिया की खानपान परंपराओं पर शोध करती हैं, उन्होंने करीब 130 साल पुराना एक शाही मेन्यू शेयर किया है, जिसे देखकर लोग हैरान रह गए.

यह मेन्यू 31 जनवरी 1897 की एक शाही दावत का है, जिसे बड़ौदा के महाराजा ने ग्वालियर के महाराजा सिंधिया के सम्मान में आयोजित किया था. यह दावत गुजरात स्थित भव्य लक्ष्मी विलास पैलेस में ब्रिटिश काल के दौरान हुई थी. वर्मानी के मुताबिक, यह मेन्यू ऐसा है जैसे किसी फ्रेंच रॉयल किचन की किताब से निकला हो, बस उसमें भारतीय रजवाड़ों का स्वाद मिलाया गया है.

वर्मानी ने पोस्ट में लिखा कि उम्मीद नहीं थी कि 19वीं सदी में बड़ौदा के महाराजा द्वारा आयोजित डिनर ऐसा दिखेगा-ट्रफल्स, आर्टिचोक और ढेरों फ्रेंच नाम… बिल्कुल आश्चर्यजनक.

देखें पोस्ट

डिनर में क्या परोसा गया था?

Advertisement

मेन्यू पर नजर डालते ही साफ समझ आता है कि दावत का स्वाद पूरी तरह फ्रेंच अंदाज में रखा गया था. शुरुआत बादाम से बने मुलायम कस्टर्ड से हुई, जो मेहमानों के लिए एक हल्का लेकिन शाही स्टार्टर था. इसके बाद ब्रेज़्ड फिश को गाढ़ी मेयोनेज सॉस के साथ परोसा गया. फिर ट्रफल्स की सुगंध से भरपूर चिकन सूप और इटैलियन तरीके से तैयार किए गए मटन कटलेट टेबल पर थे.

मुख्य व्यंजनों में मटर के साथ रोस्टेड पार्ट्रिज शामिल था, जो फ्रेंच राजसी खाने की झलक देता है. आर्टिचोक को डेमी-ग्लास सॉस में पकाकर पेश किया गया था, और सब्जियों व चावल से बनी एक करी भी थी, जिसे फ्रेंच शैली में नया नाम दिया गया था.

मिठाई में क्रीम से भरे सेब और पिस्ता आइसक्रीम ने दावत को राजसी अंदाज में पूरा किया. पूरा मेन्यू विदेशी व्यंजनों से भरा था.इतना कि एक भी पारंपरिक भारतीय डिश इसमें नजर नहीं आती थी.

'भारतीय राजे-महाराजे यूरोपीय रईसों जैसा जीवन जीते थे'

जब सोशल मीडिया पर लोगों ने इस मेन्यू को देखा तो कई कमेंट सामने आए. एक यूजर ने लिखा-इटली के पिट्टी पैलेस देखने के बाद समझ आया कि भारतीय राजे-महाराजे यूरोपीय रईसों जैसा जीवन जीते थे. वहीं, रवि नाम के यूजर ने लिखा कि दिलचस्प तो है, लेकिन मेरे लिए बिल्कुल अलग तरह से. उस समय भारत की 90 फीसदी आबादी बेहद गरीब थी, बदतर हालात में जी रही थी, और ये रजवाड़े ऐसे विदेशी पकवानों पर टूटे पड़ रहे थे जिनका नाम तक ठीक से नहीं बोल पाते थे. सच में, यह पढ़कर घिन से सिहरन होती है.

Advertisement

वहीं बैंगलुरियन बोंग नाम के यूजर ने लिखा कि भगवान का शुक्र है कि हम इन खून चूसने वाले राजा-महाराजाओं से छुटकारा पा चुके हैं. फिर भी आज भारत में कुछ लोग इनकी निकम्मी अगली पीढ़ी को 'हिज रॉयल हाईनेस' कहकर पुकारते हैं.

शाही स्वाद और वैश्विक प्रभाव की झलक

कई लोगों का कहना था कि यह मेन्यू सिर्फ व्यंजनों की सूची नहीं, बल्कि 19वीं सदी के भारतीय राजघरानों की उस दुनिया की झलक है, जहां भारतीय परंपरा और यूरोपीय प्रभाव एक ही थाली में परोसे जाते थे. इससे पता चलता है कि उस दौर का भारतीय अभिजात वर्ग दुनिया के खानपान और संस्कृति से कितना गहराई से जुड़ा हुआ था.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »