भारत में Uber और Ola जैस बिग प्लेयर्स के बावजूद Rapido एक ऐसा भारतीय स्टार्टअप बन गया जो बड़ी टेक कंपनियों को टक्कर दे रहा है. दरअसल ये कंपनी किसी लेगेसी ब्रांड का हिस्सा नहीं, एक स्टार्टअप है. हाल ही में कंपनी ने नई फंडिंग जुटाई, जिसके बाद उसकी वैल्यू करीब 3 अरब डॉलर पहुंच गई. रैपिडो की शुरुआत 2015 में हुई थी. इसके तीन को-फाउंडर्स हैं- अरविंद सांका, पवन गुंटुपल्ली और एस. आर. ऋषिकेश
कंपनी के सीईओ अरविंद सांका है. हाल ही में मिले 240 मिलियन डॉलर्स निवेश के साथ अरविंद सांका की हिस्सेदारी की कीमत भी इतनी बढ़ गई कि वह कम उम्र में करोड़पति की लिस्ट में आ गए.
दिलचस्प बात यह है कि करीब 10 साल पहले रैपिडो की शुरुआत सिर्फ एक छोटे स्टार्टअप के तौर पर हुई थी. उस समय भारत में Uber और Ola का दबदबा था. ऐसे में नई कंपनी के लिए अपनी जगह बनाना आसान नहीं था.
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रैपिड ने यहां एक अलग स्ट्रैटिजी अपनाई. शुरुआत में कैब के बजाए इस कंपनी ने बाइक टैक्सी पर फोकस किया. कम किराया और ट्रैफिक में जल्दी पहुंचने की वजह से लोगों ने इस सर्विस को इस्तेमाल करना शुरू किया. शुरुआत से अब तक इस कंपनी की छवि बाइक की रही है. लेकिन बाद में कंपनी ने ऑटो और कैब सर्विस भी शुरू कर दी.
IIT भुवनेश्वर से पढ़ाई
अरविंद सांका ने 2015 में अपने दो साथियों पवन गुंटुपल्ली और एस. आर. ऋषिकेश के साथ ये ऐप शुरू किया थी. शुरुआत में कंपनी को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. कई राज्यों में बाइक टैक्सी को लेकर नियम क्लियर नहीं थे और दूसरी तरफ Uber-Ola जैसी बड़ी कंपनियां पहले से बाजार में मौजूद थीं. इसके बावजूद रैपिडो ने धीरे-धीरे अपनी मौजूदगी बढ़ाई.
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अरविंद सांका की पढ़ाई IIT भुवनेश्वर से हुई है. उन्होंने साल 2008 से 2012 के बीच मैकेनिकल इंजीनियरिंग में B.Tech किया. कॉलेज के दौरान उन्होंने टाटा मोटर्स में इंटर्नशिप भी की, जहां उन्हें ऑटो और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को करीब से समझने का मौका मिला. पढ़ाई पूरी करने के बाद अरविंद सांका ने फ्लिपकार्ट जॉइन किया. वहां उन्होंने सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स टीम में काम किया.
पहले उन्होंने theKarrier नाम का स्टार्टअप शुरू किया. यह शहर के अंदर सामान ढोने वाले छोटे ट्रकों को ग्राहकों से जोड़ने वाला प्लेटफॉर्म था. हालांकि यह मॉडल ज्यादा सफल नहीं हो पाया, लेकिन इसी दौरान टीम को यह समझ आया कि भारत में लोगों के रोज के सफर की समस्या कहीं बड़ी है. यहीं से रैपिडो का आइडिया निकला.
आजतक टेक्नोलॉजी डेस्क