दो मैच, दो जीत, पांच गोल और अगले दौर में जगह पक्की... कागज पर देखें तो मौजूदा चैम्पियन अर्जेंटीना का वर्ल्ड कप अभियान अब तक लगभग परफेक्ट रहा है. लेकिन डलास में ऑस्ट्रिया पर 2-0 की जीत के बाद एक ऐसा सवाल भी सामने खड़ा है, जिसे कोच लियोनेल स्कालोनी शायद नजरअंदाज नहीं कर सकते- अगर लियोनेल मेसी नहीं, तो गोल कौन करेगा?
शुरुआती पेनल्टी चूकने के बावजूद मेसी ने जवाब अपने अंदाज में दिया. 38वें मिनट में थियागो अल्मादा और फाकुंडो मेडिना की शानदार मूव के बाद मेसी ने बाएं पैर से गोल दागकर अर्जेंटीना को बढ़त दिलाई. फिर इंजरी टाइम में एक और गोल करके जीत पर मुहर लगा दी.
इस डबल के साथ मेसी ने वर्ल्ड कप में अपने गोलों की संख्या 18 तक पहुंचा दी. उन्होंने मिरोस्लाव क्लोज का रिकॉर्ड पीछे छोड़ा और टूर्नामेंट इतिहास में नया मुकाम हासिल कर लिया. इस वर्ल्ड कप में उनके नाम सिर्फ दो मैचों में पांच गोल हैं.
यहीं से कहानी दिलचस्प भी हो जाती है और थोड़ी चिंताजनक भी.
5 गोल... और पांचों मेसी के
समस्या यह नहीं है कि अर्जेंटीना खराब खेल रही है. बिल्कुल नहीं. गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज ने लगातार दो मैचों में एक भी गोल नहीं खाया है. क्रिस्टियन रोमेरो और लिसांड्रो मार्टिनेज की जोड़ी मजबूत दिखी है. मिडफील्ड में रोड्रिगो डी पॉल, एंजो फर्नांडेज और एलेक्सिस मैक एलिस्टर की तिकड़ी अब भी वैसा ही संतुलन दे रही है, जैसा कतर में खिताब जीतने के दौरान दिखा था.
लेकिन अटैक में तस्वीर अलग है. ऑस्ट्रिया के खिलाफ मेसी सिर्फ दो गोल करने वाले खिलाड़ी नहीं थे. उन्होंने मैच में सबसे ज्यादा 7 शॉट लगाए और विरोधी बॉक्स में सबसे ज्यादा 8 बार गेंद को छुआ. यह आंकड़ा स्कालोनी के लिए सबसे बड़ी चेतावनी है.
क्योंकि टीम में लाउतारो मार्टिनेज, जूलियन अल्वारेज और अल्मादा जैसे अटैकिंग खिलाड़ी मौजूद हैं, फिर भी सबसे बड़ा खतरा 38 साल के मेसी ही बने हुए हैं.
यानी अर्जेंटीना का सबसे खतरनाक फिनिशर भी मेसी हैं, सबसे ज्यादा मौके लेने वाले खिलाड़ी भी मेसी हैं और सबसे ज्यादा निर्णायक क्षण पैदा करने वाले खिलाड़ी भी मेसी हैं.
सिर्फ गोल नहीं, पूरी कहानी मेसी लिख रहे हैं
अल्जीरिया के खिलाफ पहले मैच में भी यही पैटर्न दिखा था. अर्जेंटीना ने 3-0 से जीत दर्ज की और तीनों गोल मेसी ने किए. उन्होंने टीम में सबसे ज्यादा छह शॉट लगाए और सबसे ज्यादा मौके भी बनाए. मतलब मेसी सिर्फ मूव्स को खत्म नहीं कर रहे, बल्कि उन्हें बना भी रहे हैं.
वह गेंद रिसीव कर रहे हैं, मौके बना रहे हैं, शॉट ले रहे हैं, गोल कर रहे हैं और दबाव वाले पलों में टीम को निकाल भी रहे हैं.
अर्जेंटीना के लिए यह वरदान है. लेकिन यही बात आगे चलकर जोखिम भी बन सकती है.
बाकी खिलाड़ी क्या कर रहे हैं?
यह कहना गलत होगा कि बाकी खिलाड़ी योगदान नहीं दे रहे. डी पॉल ने अल्जीरिया के खिलाफ असिस्ट किया था. मैक एलिस्टर के शॉट से रिबाउंड बनकर दूसरा गोल आया. ऑस्ट्रिया के खिलाफ मेडिना ने असिस्ट दिया, अल्मादा की डमी शानदार रही और लाउतारो ने पेनल्टी हासिल की.
यानी बिल्ड-अप है, मूवमेंट है, सिस्टम है. लेकिन स्कोरबोर्ड पर सिर्फ एक नाम है- मेसी. दो मैचों में अर्जेंटीना के पांच गोल हुए हैं. पांचों मेसी ने किए हैं. बाकी पूरी टीम का गोल कॉलम अब भी खाली है.
ग्रुप स्टेज में यह रोमांचक कहानी लग सकती है, लेकिन नॉकआउट में यही चीज समस्या बन सकती है.
विरोधी टीमों के लिए पढ़ना आसान होता जा रहा
जैसे-जैसे टूर्नामेंट आगे बढ़ेगा, विरोधी टीमें अर्जेंटीना की इस निर्भरता को समझेंगी. वे जानती हैं कि मिडफील्ड मजबूत है, डिफेंस संगठित है, लेकिन अंतिम वार कौन करता है? जवाब सिर्फ एक है- मेसी. ऐसे में बड़े मुकाबलों में रणनीति साफ होगी. मेसी को स्पेस मत दो, उनके बाएं पैर की दिशा बंद करो और बाकी खिलाड़ियों को मैच जिताने की चुनौती दो.
यहीं स्कालोनी को लाउतारो मार्टिनेज और जूलियन अल्वारेज से ज्यादा उम्मीद होगी. अर्जेंटीना को मेसी से कम नहीं चाहिए. उन्हें दूसरों से ज्यादा चाहिए.
मेसी-लीड और मेसी-डिपेंडेंट में फर्क
मेसी के नेतृत्व वाली अर्जेंटीना वर्ल्ड कप जीत सकती है. लेकिन मेसी पर पूरी तरह निर्भर अर्जेंटीना किसी भी मुश्किल रात में फंस सकती है. एक मजबूत डिफेंस, एक खराब दिन, एक मिस्ड चांस या एक बेहद शारीरिक मुकाबला पूरी कहानी बदल सकता है.
ऑस्ट्रिया ने हार के बावजूद इसकी झलक दिखाई. उन्होंने प्रेस किया, मुकाबला कठिन बनाया और कई बार अर्जेंटीना को असहज भी किया. उनके पास फिनिशिंग क्वालिटी नहीं थी, इसलिए चैम्पियन बच निकले.
लेकिन नॉकआउट में हर टीम ऑस्ट्रिया जैसी नहीं होगी...
अर्जेंटीना पहले ही अगले दौर में पहुंच चुकी है. ऐसे में जॉर्डन के खिलाफ आखिरी ग्रुप मैच सिर्फ तीन अंक का मुकाबला नहीं है. यह मौका है अटैकिंग जिम्मेदारी बांटने का. लाउतारो को गोल चाहिए. अल्वारेज को लय चाहिए. अल्मादा को सिर्फ क्रिएटर नहीं, फिनिशर भी बनना होगा.
... क्योंकि वर्ल्ड कप जीतने के लिए सिर्फ एक महान खिलाड़ी काफी नहीं होता. मेसी अभी भी हेडलाइन हैं. रिकॉर्ड उनके नाम हो रहे हैं. स्टेडियम उनकी वजह से भर रहे हैं. लेकिन अर्जेंटीना का टाइटल डिफेंस सिर्फ 'लियोनेल मेसी और बाकी सब' की कहानी नहीं बन सकता. अगर ट्रॉफी फिर से ब्यूनस आयर्स ले जानी है, तो मेसी के साथ किसी और को भी आगे आना होगा.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क