भारत ने श्रीलंका को हराकर महिला एशिया कप की ट्रॉफी अपने नाम कर ली थी. लेकिन असली तस्वीर मैच खत्म होने के बाद सामने आई. ट्रॉफी प्रेजेंटेशन के लिए मंच तैयार था, एसीसी अध्यक्ष और पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी वहां मौजूद थे, लेकिन भारतीय टीम मंच पर नहीं पहुंची. चैम्पियन टीम ने नकवी के हाथों ट्रॉफी लेने से साफ इनकार कर दिया. यानी खिताब भारत का था, लेकिन नकवी के हाथों ट्रॉफी उठाने वाली तस्वीर नहीं बनी.
रविवार (13 सितंबर) को दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में भारत ने रिकॉर्ड आठवीं बार महिला एशिया कप का खिताब अपने नाम किया. शेफाली वर्मा और स्मृति मंधाना की शानदार बल्लेबाजी के बाद भारतीय गेंदबाजों ने श्रीलंका को 111 रनों पर समेट दिया. मैदान पर भारत की जीत में कोई सवाल नहीं था. सवाल सिर्फ इतना रह गया कि ट्रॉफी प्रेजेंटेशन में आखिर हुआ क्या?
फाइनल से पहले ही BCCI ने अपना रुख साफ कर दिया था
इस पूरे घटनाक्रम की सबसे अहम बात यह है कि यह अचानक लिया गया फैसला नहीं था. रिपोर्ट के मुताबिक BCCI ने फाइनल से पहले ही एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) को बता दिया था कि अगर मोहसिन नकवी प्रेजेंटेशन में मौजूद रहे, तो भारतीय टीम उनसे ट्रॉफी स्वीकार नहीं करेगी. यानी प्रेजेंटेशन के वक्त जो हुआ, वह आखिरी पल का फैसला नहीं था.
नकवी इस समय एसीसी के अध्यक्ष होने के साथ पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चेयरमैन और पाकिस्तान के गृह मंत्री भी हैं. यही भूमिका इस पूरे मामले को संवेदनशील बनाती है. भारत ने टूर्नामेंट में हिस्सा लिया, मैच खेले और खिताब जीता, लेकिन नकवी से ट्रॉफी लेने के मामले में अपना रुख नहीं बदला.
मंच पर नकवी थे, लेकिन चैम्पियन टीम नहीं
प्रेजेंटेशन सेरेमनी में श्रीलंका की टीम ने अपने पुरस्कार और उपविजेता का चेक स्वीकार किया. नकवी ने श्रीलंकाई कप्तान चामरी अटापट्टू को पुरस्कार भी दिया. इसके बाद भारतीय खिलाड़ियों के पुरस्कार समारोह में आने की बारी थी, लेकिन टीम मंच पर नहीं पहुंची.
भारतीय टीम की तरफ से सर्वश्रेष्ठ फील्डर का पुरस्कार BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने दिया. लेकिन विजेता ट्रॉफी लेने के लिए भारतीय टीम मंच पर नहीं आई. इस तरह एशिया कप का चैम्पियन भारत बना, मगर आधिकारिक प्रेजेंटेशन की तस्वीर ट्रॉफी के बिना रह गई.
पिछले साल पुरुष एशिया कप के फाइनल में भी भारत ने नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार किया था. तब नकवी ट्रॉफी लेकर स्टेडियम से चले गए थे. इस बार ऐसा नहीं हुआ. नकवी पुरस्कार समारोह के बाद स्टेडियम से चले गए, लेकिन ट्रॉफी अपने साथ नहीं ले गए.
रौब दिखाने आए थे नकवी, ट्रॉफी देने की बारी आई तो चैम्पियन ही गायब
मोहसिन नकवी एसीसी अध्यक्ष की हैसियत से ट्रॉफी प्रेजेंटेशन के मंच पर मौजूद थे. सामने एशिया कप की ट्रॉफी थी और इंतजार था चैम्पियन टीम का. लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने मंच पर आकर नकवी के हाथों ट्रॉफी लेना ही स्वीकार नहीं किया.
न टीम पहुंची, न ट्रॉफी उठी और न वह तस्वीर बन पाई, जो आमतौर पर किसी चैम्पियन टीम की जीत का हिस्सा होती है. नकवी ट्रॉफी देने आए थे, मगर देने के लिए सामने कोई भारतीय खिलाड़ी नहीं था.
मैदान पर भारत ने अपना काम कर दिया था. मंच पर उसने अपना रुख भी साफ कर दिया. रौब दिखाने के लिए मंच तैयार था, लेकिन चैम्पियन ने ही उस मंच से दूरी बना ली.
इस बार फैसला टीम का नहीं, BCCI की लाइन का हिस्सा था
घटना के बाद भारतीय टीम के मुख्य कोच अमोल मजूमदार ने BCCI के फैसले का समर्थन किया. उन्होंने टीम की एकजुटता का संकेत देते हुए कहा कि टीम बोर्ड के रुख के साथ खड़ी है.
BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने भी बाद में इस फैसले का कारण भारत-पाकिस्तान के मौजूदा रिश्तों और बदले हुए माहौल से जोड़ा. उनका तर्क था कि भारत ने बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंट में खेलना स्वीकार किया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर औपचारिकता को उसी तरह स्वीकार करना भी जरूरी है.
यानी यह किसी खिलाड़ी का व्यक्तिगत फैसला नहीं था. यह भारतीय क्रिकेट बोर्ड के स्तर पर लिया गया फैसला था, जिसे टीम ने मैदान पर लागू किया.
पिछले साल की कहानी फिर दोहराई गई
इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए पिछले साल का एशिया कप फाइनल याद करना जरूरी है. पुरुष टीम के फाइनल में पाकिस्तान को हराने के बाद भी भारत ने नकवी से ट्रॉफी और पदक लेने से इनकार कर दिया था. उस समय प्रेजेंटेशन समारोह लंबा खिंचा और भारतीय टीम को मंच पर ट्रॉफी नहीं मिली. बाद में इस मामले ने BCCI और ACC के बीच भी तनाव बढ़ाया.
इस बार वही टकराव महिला एशिया कप में दिखाई दिया. फर्क सिर्फ इतना रहा कि इस बार BCCI ने पहले ही ACC को अपनी स्थिति बता दी थी और इसलिए फाइनल के बाद प्रेजेंटेशन समारोह में भारतीय टीम की गैरमौजूदगी पूरी तरह अप्रत्याशित नहीं थी.
भारत की जीत, नकवी की मौजूदगी और फिर वही तस्वीर
इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर भी नकवी की मौजूदगी और ट्रॉफी प्रेजेंटेशन को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं. एक प्रतिक्रिया में कहा गया, भारत ने कप जीता, लेकिन सुर्खियां नकवी के हिस्से में चली गईं.
एक अन्य प्रतिक्रिया में कहा गया कि नकवी की मौजूदगी तय होते ही ट्रॉफी विवाद की आशंका साफ थी. कुछ प्रतिक्रियाओं में यह भी आरोप लगाया गया कि वह अपनी मौजूदगी से सिर्फ अपना अहंकार बढ़ाना चाहते थे.
हालांकि इन टिप्पणियों से अलग मैदान की तस्वीर अपने आप काफी कुछ कहती है. एसीसी अध्यक्ष के तौर पर नकवी ट्रॉफी देने के लिए मंच पर मौजूद थे, लेकिन विजेता भारतीय टीम ने उनसे ट्रॉफी लेना स्वीकार नहीं किया.
ट्रॉफी नहीं मिली, लेकिन खिताब भारत का रहा
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी बात यह है कि भारत ने ट्रॉफी किसी मैच में हारकर नहीं छोड़ी. भारत टूर्नामेंट का चैंपियन है. रिकॉर्ड आठवीं बार महिला एशिया कप जीतने की उपलब्धि उसके नाम है.
इसलिए मैदान की कहानी और मंच की कहानी अलग-अलग हैं. मैदान पर भारत ने क्रिकेट से फैसला किया. मंच पर भारत ने अपना प्रशासनिक और राजनीतिक रुख दिखाया.
भारत ने खिताब जीता, लेकिन प्रेजेंटेशन की वह औपचारिक तस्वीर नहीं बनी, जिसमें विजेता टीम एसीसी अध्यक्ष के हाथों ट्रॉफी उठाती है. लगातार दूसरे साल ऐसा हुआ, जब भारतीय चैंपियन टीम ने नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार किया.
When Mohsin Naqvi's presence was confirmed, we knew trophy fiasco was going to happen again. The humiliation of Mohsin Naqvi & Pakistan is completely justified. Forget protocol and designation. Anywhere and everywhere, Pakistan and any entity SHOULD be humiliated consistently pic.twitter.com/vZv3FA7tZv
— Siddharth Viswanathan (@VishySid84) September 13, 2026
और आखिर में इस पूरे घटनाक्रम की सबसे कड़वी तस्वीर यही रही- रौब दिखाने आए थे नकवी, ट्रॉफी देने की बारी आई तो चैम्पियन ने मंच ही ठुकरा दिया, और 'वो' बेआबरू होकर लौटे.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क