दलीप ट्रॉफी 2026 के लिए ईस्ट जोन ने जैसे ही 15 साल के वैभव सूर्यवंशी को उपकप्तान बनाया, क्रिकेट जगत में बहस छिड़ गई. सवाल उठने लगे कि महज 8 फर्स्ट क्लास मैच खेलने वाले किशोर को इतनी बड़ी जिम्मेदारी क्यों दी गई, जबकि टीम में अभिमन्यु ईश्वरन जैसे अनुभवी कप्तान और मोहम्मद शमी-मुकेश कुमार जैसे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी मौजूद हैं. आलोचनाओं के बीच अब ईस्ट जोन के चयनकर्ताओं ने इस फैसले के पीछे की सोच का खुलासा किया है.
चयन समिति के सदस्य और झारखंड के प्रतिनिधि मनीष वर्धन ने ईएसपीएनक्रिकइन्फो से कहा कि वैभव को उपकप्तान बनाना मौजूदा प्रदर्शन का इनाम नहीं, बल्कि भविष्य में नेतृत्व के लिए तैयार करने की योजना का हिस्सा है.
उन्होंने कहा, 'हम सिर्फ आज के बारे में नहीं सोच रहे हैं. उपकप्तान कप्तान के साथ रहकर टीम चलाने का तरीका सीखता है. हम चाहते थे कि वैभव टीम के साथ ज्यादा जुड़ें और नेतृत्व की जिम्मेदारियों को करीब से समझें. वह बेहद प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं और लगातार परिपक्व हो रहे हैं.'
पूर्व ओडिशा क्रिकेटर और चयनकर्ता प्रभंजन मलिक ने भी क्रिकबज से बातचीत में इस फैसले का बचाव किया. उन्होंने कहा कि वैभव को कप्तान नहीं बल्कि उपकप्तान बनाया गया है और टीम की कमान ईशान किशन के हाथ में रहेगी.
मलिक ने कहा, 'ईशान विकेटकीपर हैं और पूरे मैच के दौरान हर पल खेल में शामिल रहते हैं. ऐसा नहीं है कि वैभव पूरे दिन कप्तानी करेंगे. लेकिन उन्हें नेतृत्व सीखने का मौका मिलेगा. हम चाहते हैं कि वह जिम्मेदारी लेना सीखें. कौन जानता है, एक दिन वह भारत के कप्तान भी बन सकते हैं. इसी सोच के साथ उन्हें उपकप्तान बनाया गया है.'
चयनकर्ताओं का कहना है कि वैभव के लिए यह पहली नेतृत्व भूमिका नहीं है, वह बिहार की रणजी टीम के उपकप्तान रह चुके हैं. इसके अलावा भारत की अंडर-19 विश्व कप विजेता टीम के भी उपकप्तान थे. आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स के लिए शानदार प्रदर्शन और जिम्बाब्वे दौरे पर प्लेयर ऑफ द सीरीज बनने के बाद चयनकर्ताओं का भरोसा उन पर और मजबूत हुआ.
रिपोर्ट के मुताबिक, अनुभवी अभिमन्यु ईश्वरन को जानबूझकर उपकप्तान नहीं बनाया गया. चयन समिति का मानना था कि 100 से ज्यादा फर्स्ट क्लास मैच खेलने वाले, बंगाल और इंडिया-ए की कप्तानी कर चुके खिलाड़ी को ईशान किशन के अधीन उपकप्तान बनाना उचित नहीं होगा. इसलिए भविष्य को ध्यान में रखते हुए वैभव को यह जिम्मेदारी सौंपी गई.
मनीष वर्धन ने कहा कि उपकप्तान का पद किसी खिलाड़ी की वरिष्ठता का पैमाना नहीं होता, बल्कि सीखने का अवसर होता है. चयन समिति चाहती है कि वैभव टीम प्रबंधन, रणनीति और नेतृत्व की बारीकियों को अभी से समझें, ताकि आगे चलकर भारतीय क्रिकेट को एक मजबूत लीडर मिल सके.
सोशल मीडिया पर फैसले की आलोचना के बावजूद चयनकर्ता अपने निर्णय पर कायम हैं. प्रभंजन मलिक ने कहा, "हर किसी को अपनी राय रखने का अधिकार है. हम उसका सम्मान करते हैं, लेकिन हमने वही फैसला लिया जो हमें टीम और खिलाड़ी के भविष्य के लिए सबसे बेहतर लगा. यह पूरे चयन पैनल का सामूहिक निर्णय था.'
23 अगस्त से बेंगलुरु में शुरू हो रही दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन का पहला मुकाबला नॉर्थ जोन से होगा. चयनकर्ताओं का मानना है कि अगर वैभव इस टूर्नामेंट में बल्ले से अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की नजर उन पर और मजबूत होगी. ऐसे में यह टूर्नामेंट उनके लिए सिर्फ रन बनाने का नहीं, बल्कि भविष्य के भारतीय टेस्ट टीम के दावेदार के रूप में अपनी दावेदारी मजबूत करने का भी बड़ा मंच साबित हो सकता है.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क