'3 नो बॉल, 60 रन...', रवि बिश्नोई की महंगी गेंदबाजी ने खड़े किए बड़े सवाल, मैनचेस्टर टी20 में सामने आई ये कमजोरी

इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टी20I मुकाबले में भारत को 4 विकेट से हार का सामना करना पड़ा. मैनचेस्टर टी20I में रवि बिश्नोई के 4 ओवर में 60 रन और तीन नो-बॉल ने टीम इंडिया की स्पिन रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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 मैनचेस्टर टी20 में दिखा रवि बिश्नोई का फ्लॉप शो  (Photo: Reuters) मैनचेस्टर टी20 में दिखा रवि बिश्नोई का फ्लॉप शो (Photo: Reuters)

आजतक स्पोर्ट्स डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 06 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:30 AM IST

मैनचेस्टर में 4 जुलाई (शनिवार) को इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में रवि बिश्नोई का प्रदर्शन भारत की हार की सबसे बड़ी वजहों में से एक रहा. बिश्नोई ने अपने चार ओवरों में बिना कोई विकेट लिए 60 रन लुटाए.

सबसे ज्यादा नुकसान उनके 17वें ओवर में हुआ, जहां उन्होंने तीन नो-बॉल फेंकी और इंग्लैंड के बल्लेबाज जैकब बेथेल ने फ्री-हिट का पूरा फायदा उठाकर मैच का रुख बदल दिया.

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हालांकि किसी भी गेंदबाज का खराब दिन हो सकता है, लेकिन बिश्नोई के इस प्रदर्शन ने टीम इंडिया की स्पिन रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब चर्चा सिर्फ एक खराब स्पेल की नहीं, बल्कि इस बात की है कि आखिर उन्हें भारत की टी20 टीम में फर्स्ट चॉइस स्पिनर क्यों माना जा रहा है.

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बिश्नोई की गेंदबाजी शैली पर उठे सवाल

रवि बिश्नोई को लेग स्पिनर कहा जाता है, लेकिन उनकी गेंदबाजी मुख्य रूप से गुगली पर आधारित रहती है. उनके पास पारंपरिक लेग ब्रेक से ज्यादा टर्न या ड्रिफ्ट देखने को नहीं मिलती. 

उनकी सफलता गति, फ्लैट ट्रैजेक्टरी और गलत दिशा में घूमने वाली गेंद (गुगली) पर निर्भर करती है. समस्या तब पैदा होती है जब बल्लेबाज उनकी गुगली को पढ़ लेते हैं.

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ऐसे में उनके पास न तो ज्यादा टर्न का विकल्प बचता है और ना ही लगातार रन रोकने की क्षमता दिखाई देती है. मैनचेस्टर में यही कमजोरी खुलकर सामने आई.

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तीन नो-बॉल ने बढ़ाई मुश्किल

टी20 मैच में किसी स्पिनर का तीन नो-बॉल फेंकना बेहद दुर्लभ और महंगा साबित होता है. स्पिनर से उम्मीद होती है कि वह रन गति पर नियंत्रण रखे और दबाव बनाए. लेकिन बिश्नोई की गेंदबाजी ने इंग्लैंड को दबाव से बाहर निकलने का मौका दे दिया.

भारत ने इंग्लैंड को पहले ही ओवर में दो झटके दिए थे और सामने 190 रनों का मजबूत लक्ष्य भी था. ऐसे में टीम को सिर्फ अनुशासित गेंदबाजी की जरूरत थी, लेकिन बिश्नोई ऐसा करने में नाकाम रहे.

आईपीएल प्रदर्शन भी चर्चा में

रवि बिश्नोई हाल ही में लखनऊ सुपर जायंट्स से रिलीज होने के बाद राजस्थान रॉयल्स से जुड़े हैं. हालांकि आईपीएल में भी उनकी जगह हमेशा पूरी तरह सुरक्षित नहीं रही. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब फ्रेंचाइजी स्तर पर भी उनकी भूमिका तय नहीं दिखती, तो भारतीय टीम उन्हें लगातार क्यों मौका दे रही है.

टीम इंडिया को चाहिए स्पष्ट रणनीति

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भारत के स्पिन गेंदबाजी कोच साईराज बहुतुले के रहते यह भी सवाल उठ रहा है कि बिश्नोई के खेल में सुधार के लिए क्या योजना बनाई गई है. क्या उन्हें मजबूत लेग ब्रेक विकसित करने पर काम कराया जा रहा है, या फिर टीम सिर्फ उनकी मौजूदा शैली पर भरोसा कर रही है?

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करियर खत्म नहीं, लेकिन जवाब जरूरी

एक खराब मैच के आधार पर रवि बिश्नोई के करियर पर सवाल उठाना जल्दबाजी होगी. वह अभी युवा हैं और वापसी करने की क्षमता रखते हैं. लेकिन मैनचेस्टर का प्रदर्शन यह जरूर बताता है कि अब टीम इंडिया को उनके रोल और चयन को लेकर स्पष्ट सोच अपनानी होगी.

अगर कोई स्पिनर ना लगातार विकेट दिला पा रहा है, ना रन रोक पा रहा है और ना ही बल्लेबाजी में योगदान देता है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या वह भारत की टी20 टीम में रहने का हकदार है.

(Report: Vijay Singh)

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