स्कोरबोर्ड कहता है कि मंगलवार (9 जून) को भारत A ने श्रीलंका A को 8 रन से हरा दिया. लेकिन अगर पूरे मैच को करीब से देखा जाए तो यह जीत जितनी रोमांचक थी, उतनी ही कई सवाल भी छोड़ गई. ऋतुराज गायकवाड़ के शानदार शतक और डेथ ओवरों में अरशद खान-अंशुल कंबोज की बेहतरीन गेंदबाजी के बावजूद भारतीय टीम का प्रदर्शन पूरी तरह संतोषजनक नहीं कहा जा सकता.
सबसे ज्यादा नजरें 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी पर थीं. भारत A के लिए लिस्ट-A क्रिकेट में पहला मैच खेल रहे युवा बल्लेबाज ने शुरुआत तो अच्छी की. उन्होंने तीन चौके भी लगाए और आत्मविश्वास से भरे नजर आए. लेकिन जल्दबाजी में खेला गया एक शॉट उनकी पारी का अंत बन गया. मोहम्मद शिराज की गेंद पर मिड-ऑफ के ऊपर से खेलने की कोशिश में वह कप्तान सहान अराचिगे को कैच दे बैठे. 14 रन की यह पारी उस खिलाड़ी से जुड़ी उम्मीदों के मुकाबले काफी छोटी रही, जिस पर पूरे मैच से पहले चर्चा हो रही थी.
भारत की शुरुआत भी बेहद खराब रही. टीम ने पांच ओवर के भीतर सिर्फ 16 रन पर वैभव सूर्यवंशी और प्रभसिमरन सिंह के विकेट गंवा दिए. इसके बाद प्रियांश आर्य ने 32 रन बनाए, लेकिन ऋतुराज गायकवाड़ के साथ गलतफहमी में रनआउट होकर लौट गए. 69 रन पर तीन विकेट गिरने के बाद भारत दबाव में था.
यहीं से ऋतुराज गायकवाड़ ने अपनी क्लास दिखाई. उन्होंने कप्तान तिलक वर्मा के साथ चौथे विकेट के लिए 150 रन जोड़कर पारी को संभाला. गायकवाड़ ने 112 गेंदों में 101 रन बनाए और अपने लिस्ट-A करियर का 21वां शतक जड़ा. मुश्किल परिस्थितियों, तेज हवाओं और गेंदबाजों को मदद देने वाली पिच पर यह पारी मैच का सबसे बड़ा अंतर साबित हुई.
हालांकि इस साझेदारी का दूसरा पहलू भी था. तिलक वर्मा ने 97 गेंदों पर 60 रन बनाए. आंकड़ों में यह पारी अच्छी दिखती है, लेकिन मैच की स्थिति को देखते हुए यह काफी धीमी रही. जब गायकवाड़ रनगति बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे, तब तिलक का ज्यादा ध्यान स्ट्राइक रोटेट करने पर था. उन्होंने अपना अर्धशतक 86 गेंदों में पूरा किया.
दरअसल एक समय भारत 290 या उससे अधिक स्कोर की तरफ बढ़ता दिख रहा था. खुद प्लेयर ऑफ द मैच ऋतुराज गायकवाड़ ने भी मैच के बाद कहा कि टीम 290 से ऊपर के स्कोर की सोच रही थी, लेकिन श्रीलंकाई गेंदबाजों ने वापसी करते हुए भारत को रोक दिया. ऐसे में तिलक की धीमी बल्लेबाजी पर सवाल उठना लाजिमी है. अगर मध्य ओवरों में रनगति थोड़ी बेहतर रहती तो भारत कहीं अधिक सुरक्षित स्कोर तक पहुंच सकता था.
भारत के लिए राहत की बात यह रही कि आयुष बदोनी और सूर्यांश शेडगे ने आखिर में तेजी दिखाई. बदोनी ने 18 गेंदों पर 24 और शेडगे ने 14 गेंदों पर नाबाद 26 रन बनाकर टीम को 277/6 तक पहुंचाया.
लक्ष्य का पीछा करते हुए श्रीलंका A ने भारत को पूरे मैच में परेशान किया. वापसी कर रहे निरोशन डिकवेला (47) और अविष्का फर्नांडो (45) ने पहले विकेट के लिए 93 रन जोड़े. इसके बाद सदीरा समरविक्रमा (46) और कप्तान सहान अराचिगे (74) ने भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा.
श्रीलंका को जीत के लिए चाहिए थे 10 गेंदों में 9 रन और फिर....
एक समय श्रीलंका को अंतिम 10 गेंदों में सिर्फ 9 रन चाहिए थे और उसके पास तीन विकेट बचे थे. यहीं से मैच पलटा. अंशुल कंबोज ने सटीक यॉर्कर पर सहान को बोल्ड कर दिया. इसके बाद दबाव में श्रीलंका ने लगातार गलतियां कीं. वानुजा सहान रनआउट हुए और अंतिम ओवर में अरशद खान ने तीन विकेट झटककर भारत को अविश्वसनीय जीत दिला दी.
तिलक वर्मा ने बताया किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत
मैच के बाद कप्तान तिलक वर्मा ने भी माना कि टीम को गेंदबाजी में सुधार की जरूरत है. उन्होंने कहा कि 270 का स्कोर अच्छा था, लेकिन गेंदबाज शुरुआती स्पेल में सही क्षेत्रों में गेंदबाजी नहीं कर सके. वहीं उन्होंने अंशुल कंबोज की यॉर्कर और अर्शद खान के अंतिम स्पेल को मैच का टर्निंग पॉइंट बताया.
दूसरी ओर श्रीलंकाई कप्तान सहान अराचिगे का मानना था कि उनके आउट होने के बाद भी मैच उनकी टीम के हाथ में था, लेकिन वानुजा सहान का रनआउट निर्णायक साबित हुआ.
इस जीत में भारत A को दो बड़े पॉजिटिव मिले, ऋतुराज गायकवाड़ का शतक और डेथ ओवरों में गेंदबाजों का दमदार प्रदर्शन. लेकिन साथ ही तीन चिंताएं भी सामने आईं, वैभव सूर्यवंशी का जल्दी आउट होना, तिलक वर्मा की धीमी बल्लेबाजी और शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों की महंगी गेंदबाजी.
इसलिए दांबुला में मिली जीत रिकॉर्ड बुक में भले दर्ज हो गई हो, लेकिन भारतीय टीम मैनेजमेंट के लिए यह मैच सिर्फ जश्न नहीं, बल्कि आत्ममंथन का भी मौका लेकर आया है.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क