इतिहास रचकर अंतरिक्ष पहुंचा विक्रम-1... जानिए अपने साथ क्या-क्या ले गया

भारत के पहले प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 की सफल उड़ान के साथ 6 खास पेलोड भी अंतरिक्ष पहुंचे. इनमें स्पेस का कचरा हटाने वाला रोबोट, लैब में बना हीरा, नए सैटेलाइट और भारत के महान वैज्ञानिकों की मिनिएचर प्रतिमाएं शामिल हैं.

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ये हैं वो पेलोड्स जो विक्रम-1 रॉकेट के साथ अंतरिक्ष में गए हैं. (Photo: Skyroot Aerospace) ये हैं वो पेलोड्स जो विक्रम-1 रॉकेट के साथ अंतरिक्ष में गए हैं. (Photo: Skyroot Aerospace)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 18 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:06 PM IST

भारत के पहले प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 ने अपनी पहली उड़ान सफलतापूर्वक पूरी कर ली है. इस मिशन के साथ सिर्फ सैटेलाइट ही नहीं, बल्कि 6 खास पेलोड भी अंतरिक्ष में पहुंचे हैं. इनमें नई स्पेस टेक्नोलॉजी की जांच करने वाला सैटेलाइट, स्पेस का कचरा हटाने वाला रोबोट, एक छोटा सैटेलाइट, जर्मनी का टेक्नोलॉजी पेलोड, लैब में बना हीरा और भारत के तीन महान वैज्ञानिकों की छोटी प्रतिमाएं शामिल हैं. इनका मकसद नई तकनीक को परखना, अंतरिक्ष को सुरक्षित बनाना और आने वाले स्पेस मिशनों को बेहतर बनाना है.

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विक्रम-1 की यह उड़ान भारत के निजी स्पेस सेक्टर के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. इस मिशन में भारत और विदेश की कंपनियों के पेलोड भी शामिल हैं. इससे पता चलता है कि अब भारतीय प्राइवेट कंपनियां सिर्फ रॉकेट ही नहीं बना रहीं, बल्कि दुनिया की नई स्पेस टेक्नोलॉजी को भी अंतरिक्ष तक पहुंचा रही हैं.

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साल 2020 में भारत सरकार ने निजी कंपनियों के लिए स्पेस सेक्टर खोला था. इसके बाद कई स्टार्टअप इस क्षेत्र में आए. स्काईरूट एयरोस्पेस उन्हीं में से एक है. विक्रम-1 करीब 480 किलोग्राम तक का पेलोड लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में ले जाने की क्षमता रखता है. इस मिशन में भेजे गए सभी पेलोड का अपना अलग काम है.

कौन-कौन से पेलोड गए हैं रॉकेट में?

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स्काईरूट एयरोस्पेस का SCOPE Satellite इस मिशन का अपना एक्सपेरिमेंटल पेलोड है. इसका इस्तेमाल अंतरिक्ष में नई तकनीकों की जांच करने के लिए किया जाएगा. इससे मिलने वाली जानकारी फ्यूचर के रॉकेट और स्पेस मिशनों को बेहतर बनाने में मदद करेगी.

भारतीय कंपनी Cosmoserve Space का Mission EMBRACE भी विक्रम-1 के साथ अंतरिक्ष पहुंचा है. इसमें ऐसे रोबोटिक सिस्टम की जांच होगी, जो फ्यूचर में स्पेस में घूम रहे बेकार सैटेलाइट और रॉकेट के टुकड़ों को हटाने में मदद कर सकते हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक पृथ्वी की ऑर्बिट में लाखों छोटे-बड़े मलबे के टुकड़े मौजूद हैं, जो दूसरे सैटेलाइट और मिशनों के लिए खतरा बन सकते हैं.

Grahaa Space का SOLARAS Satellite भी इस मिशन का हिस्सा है. इसका मकसद लो अर्थ ऑर्बिट में छोटे सैटेलाइट की क्षमता दिखाना है. ऐसे सैटेलाइट कम खर्च में कई तरह के काम कर सकते हैं.

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विक्रम-1 के साथ जर्मनी का uD3PP और mD3RN पेलोड भी भेजा गया है. इसका उद्देश्य अंतरिक्ष में नई स्पेस टेक्नोलॉजी की जांच करना है. अगर यह सफल रहा तो भविष्य के कई मिशनों में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.

इस मिशन में Cosmic Bloom नाम का लैब में बना हीरा भी भेजा गया है. इसे विज्ञान और कला को साथ लाने की एक खास कोशिश माना जा रहा है. यह इस मिशन का सबसे अलग पेलोड है.

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विक्रम-1 अपने साथ डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, डॉ. विक्रम साराभाई और नोबेल विजेता डॉ. सी.वी. रमन की छोटी प्रतिमाएं भी लेकर गया है. इन्हें 18 कैरेट सोने से बने एक छोटे रॉकेट के अंदर रखा गया है. यह भारत के महान वैज्ञानिकों को श्रद्धांजलि देने और युवाओं को प्रेरित करने की एक खास पहल है.

विक्रम-1 की पहली उड़ान सिर्फ एक रॉकेट लॉन्च नहीं है. यह भारत के निजी स्पेस सेक्टर की बढ़ती ताकत और नई तकनीक का भी उदाहरण है. इस मिशन के साथ गए 6 पेलोड फ्यूचर में स्पेस रिसर्च, नई टेक्नोलॉजी और अंतरिक्ष को सुरक्षित बनाने में मदद कर सकते हैं.                                                                                                                                                       रिपोर्टः ऐश्वर्या पाटिल
 

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