भारत के पूर्वी तट पर एक बार फिर चक्रवाती तूफान का खतरा मंडरा रहा है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार चक्रवाती तूफान मुरासु पश्चिम मध्य और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में सक्रिय है. यह तूफान तेज गति से उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ रहा है और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों पर असर डालने वाला है.
स्काईमेट वेदर और आईएमडी के आंकड़ों के आधार पर यह स्पष्ट है कि मुरासु अब गंभीर चक्रवाती तूफान (सीवियर साइक्लोनिक स्टॉर्म) में बदल चुका है. इसकी हवा की गति 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है और झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक के हो सकते हैं. तूफान नेल्लोर और नरसापुर के बीच ओंगोल के करीब आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट को पार करने की संभावना है. यह लैंडफॉल 2 नवंबर की आधी रात से 3 नवंबर की सुबह के बीच हो सकती है.
विजयवाड़ा में मुरासु चक्रवात के कारण सोमवार को इंडिगो एयरलाइंस की 10 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं. बंगाल की खाड़ी में सक्रिय इस गंभीर चक्रवाती तूफान के चलते आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में भारी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी है. विजयवाड़ा हवाई अड्डे पर उड़ानें प्रभावित हुईं. यात्रियों को वैकल्पिक व्यवस्था के लिए एयरलाइन से संपर्क करने की सलाह दी गई है. मौसम विभाग के अनुसार तूफान आंध्र तट की ओर बढ़ रहा है. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उड़ानें रद्द की गईं. यात्री अपनी बुकिंग की स्थिति चेक करें.
चक्रवात मुरासु से तटीय इलाकों में तेज हवाएं, ऊंची लहरें, बाढ़ और भूस्खलन का खतरा है. आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में कमजोर घरों, बिजली के खंभों और पेड़ों के गिरने की आशंका है. भारी बारिश से नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है और निचले इलाकों में जलभराव हो सकता है. मछुआरे समुद्र में न जाएं. कृषि क्षेत्र में खड़ी फसलें प्रभावित हो सकती हैं. प्रशासन को राहत शिविर तैयार रखने, निकासी की योजना बनाने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की जरूरत है. आम लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देना चाहिए, अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए और आपात स्थिति के लिए जरूरी सामान तैयार रखना चाहिए. बिजली कटौती की संभावना को देखते हुए टॉर्च, मोबाइल चार्जर और पीने का पानी इकट्ठा रखें.
स्काईमेट वेदर के राज्यवार वर्षा पूर्वानुमान के अनुसार सबसे ज्यादा असर आंध्र प्रदेश पर पड़ने वाला है. यहां 1 से 4 नवंबर तक बेहद भारी बारिश की आशंका है. 2 और 3 नवंबर को पीक पीरियड रहेगा जब कुछ जगहों पर 204 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश हो सकती है. रेड अलर्ट जारी किया गया है. तेलंगाना में 2 से 4 नवंबर तक हल्की से मध्यम बारिश होगी और 3 नवंबर को कुछ जगहों पर बेहद भारी बारिश संभव है. यहां ऑरेंज अलर्ट है. तमिलनाडु और पुडुचेरी में 1 से 3 नवंबर तक मध्यम से भारी बारिश होगी. तिरुवल्लुर, चेन्नई, चेंगलपट्टू, कांचीपुरम, पुडुचेरी और कारैकल जैसे इलाके खास तौर पर प्रभावित हो सकते हैं.
ओडिशा में 2 से 4 नवंबर तक भारी से बहुत भारी बारिश (7 से 20 सेंटीमीटर) की संभावना है. गजपति, गंजम, कोरापुट और रायगड़ा जिले मुख्य रूप से प्रभावित होंगे. छत्तीसगढ़ और मध्य भारत में भी 2 से 4 नवंबर तक दक्षिण छत्तीसगढ़ में भारी बारिश और मध्य प्रदेश, कोंकण-गोवा तथा मध्य महाराष्ट्र में छिटपुट बारिश हो सकती है. पूर्वोत्तर भारत में 1 से 5 नवंबर तक हल्की से मध्यम छिटपुट बारिश की उम्मीद है. असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा प्रभावित हो सकते हैं जबकि अरुणाचल प्रदेश में 2 नवंबर के आसपास अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश संभव है.
आईएमडी के नवीनतम अपडेट के मुताबिक मुरासु 2 नवंबर 2026 को सुबह करीब 2:30 बजे पश्चिम मध्य और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में केंद्रित था. यह चेन्नई से करीब 260 किलोमीटर पूर्व-उत्तर-पूर्व में, नेल्लोर से 290 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व में और मछलीपट्टनम से 320 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण-पूर्व में स्थित था. पिछले छह घंटों में यह लगभग 20 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ा और तीव्र होकर गंभीर चक्रवाती तूफान बन गया. पूर्वानुमान ट्रैक के अनुसार तूफान आंध्र प्रदेश तट की ओर बढ़ रहा है और ओंगोल के आसपास लैंडफॉल करने की संभावना है. लैंडफॉल के बाद यह कमजोर पड़ते हुए मध्य भारत की ओर बढ़ सकता है.
चक्रवातों के नामकरण की प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत होती है. नाम ऐसे चुने जाते हैं जो आसान हों, लोगों से जुड़े हों और किसी व्यक्ति विशेष के नाम न हों. मुरासु नाम तमिल भाषा से लिया गया है. मुरासु एक बड़ा ढोल या नगाड़ा होता है जो युद्ध के समय, उत्सवों में या खतरे की चेतावनी देने के लिए बजाया जाता था. यह नाम इसलिए चुना गया ताकि लोग आसानी से याद रख सकें और सतर्क रहें. आंध्र प्रदेश पर असर डालने वाले इस चक्रवात को तमिल नाम मिलना क्षेत्रीय सहयोग और साझा मौसम चेतावनी प्रणाली का उदाहरण है. दक्षिण भारत के राज्यों में चक्रवात अक्सर बंगाल की खाड़ी से आते हैं और नामकरण में क्षेत्रीय भाषाओं का इस्तेमाल आम बात है.