हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में कसौली के गिल्बर्ट ट्रेल और अपर मॉल इलाके में मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे भयंकर जंगल की आग लग गई. आग इतनी तेजी से फैली कि स्थानीय प्रशासन, वन विभाग और फायर ब्रिगेड की टीमें अकेले उसे काबू नहीं कर पा रही थीं. इस संकट की घड़ी में भारतीय सेना और वायुसेना ने रात भर चले एक साहसिक और समन्वित अभियान में हिस्सा लेकर आग पर काबू पा लिया. Photo: PTI
सेना की कसौली ब्रिगेड ने तुरंत कार्रवाई शुरू की. जमीनी स्तर पर सैनिकों ने आग की लपटों को रोकने के लिए फायर ब्रेक बनाए, जबकि भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टरों ने चंडीगढ़ के सुकना झील से पानी भरकर बांबी बकेट के जरिए बार-बार आग पर पानी की बौछार की. Photo: PTI
करीब 60 किलोमीटर दूर से पानी लाकर हेलीकॉप्टरों द्वारा की गई ये बमबारी आग बुझाने में बेहद कारगर साबित हुई. रात भर चले इस संयुक्त अभियान में सेना के जवान, फायर टेंडर, पानी के टैंकर और स्थानीय लोगों की मदद से आग को मुख्य प्रभावित इलाकों में सफलतापूर्वक नियंत्रित कर लिया गया. Photo: PTI
इस अभियान में शामिल सभी जवान और उपकरण सुरक्षित रहे. किसी भी प्रकार की जनहानि या चोट की कोई खबर नहीं आई. पश्चिमी कमान के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह ने मौके पर पहुंचकर पूरे अभियान की समीक्षा की. उन्होंने जवान की साहसिकता और रात भर बिना थके काम करने की सराहना की और कई जवानों को तुरंत प्रशस्ति पत्र प्रदान किए. Photo: PTI
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पूरे हिमाचल प्रदेश में जंगल की आग की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं. सोलन सहित कई जिलों में लगातार आग की घटनाएं हो रही हैं. हिमाचल के प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजय सूद के अनुसार, इस साल अब तक राज्य में 232 जंगल की आग की घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें करीब 2,900 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ है और लगभग 67 लाख रुपये का नुकसान हुआ है. Photo: PTI
उन्होंने बताया कि ऊना जैसे इलाकों में तापमान 40 डिग्री के करीब पहुंच गया है, जबकि शिमला में भी तापमान लगातार बढ़ रहा है. मंडी में 85, धर्मशाला में 56, शिमला में 10 और सोलन में 6 आग की घटनाएं दर्ज हुई हैं. सोलन के सारी इलाके में दो जगहों पर लगी आग गांवों की ओर बढ़ने लगी थी. वहां भी वायुसेना के हेलीकॉप्टरों की मदद ली गई और 15 घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया. Photo: PTI
वन विभाग ने पूरे राज्य में करीब 2,000 संवेदनशील बीट्स पर फायर फाइटर्स तैनात कर रखे हैं. वर्तमान में विभाग के पास 10-12 ड्रोन हैं, जिनकी संख्या बढ़ाने की योजना है. इस सीजन में राज्य भर में 3,000 किलोमीटर लंबी फायर लाइन तैयार की गई है. 12,000 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में कंट्रोल्ड बर्निंग की गई है. Photo: PTI
हर सर्कल स्तर पर रैपिड रिस्पॉन्स टीम बनाई गई है, जिससे प्रतिक्रिया का समय पहले की तुलना में बेहतर हुआ है. इसके अलावा मोबाइल ऐप और फायर इंजन पोर्टल भी सक्रिय किया गया है, ताकि आग की सूचना तुरंत अधिकारियों तक पहुंच सके. Photo: PTI
उत्तराखंड के चमोली जिले में भी जंगल की आग ने एक इंसानी जान ले ली. बादन गड़ इलाके के बूंग गांव की 52 वर्षीय महिला सुरेशी देवी मंगलवार शाम अपने मवेशियों को चारा खिलाने और दूध दुहने गई थीं. आसपास के जंगल में लगी आग उनके गोशाले तक पहुंच गई. महिला ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन बुरी तरह झुलस गईं. गांव वालों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई. Photo: PTI
वन विभाग के रेंजर रविंद्र कुमार निराला ने बताया कि महिला को गंभीर जलन के साथ अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन वे रास्ते में ही चल बसीं. बूंग गांव के प्रधान नरेंद्र बिष्ट ने जंगल की बार-बार लग रही आग पर वन विभाग की लापरवाही का आरोप लगाते हुए मृतका के परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है. Photo: PTI
हिमाचल और उत्तराखंड दोनों ही पहाड़ी राज्यों में बढ़ती गर्मी और सूखे के कारण जंगल की आग की घटनाएं बढ़ रही हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान और मानवीय गतिविधियां इन आगों को और भड़का रही हैं. दोनों राज्यों की सरकारें और वन विभाग अब और ज्यादा सतर्क हो गए हैं, लेकिन लंबे समय में जंगलों की सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन से निपटने की ठोस रणनीति बनाना जरूरी हो गया है. Photo: PTI