Sawan Somwar 2026: भूत-प्रेत और दैत्य! जानें कौन हैं भगवान शिव के 4 सबसे शक्तिशाली गण?

Sawan Somwar 2026: क्या आप जानते हैं कि केदारनाथ, काशी और महाकाल जैसे पवित्र ज्योतिर्लिंगों की सुरक्षा कौन करता है? और माता सती के अपमान पर भगवान शिव ने अपनी जटा से किस भयंकर सेनापति को उत्पन्न किया था? सावन के पहले सोमवार पर पढ़ें शिव पुराण में वर्णित भगवान शिव के 4 सबसे बलशाली गणों और सेनापतियों की अद्भुत और अनसुनी कथा.

Advertisement
भगवान के प्रमुख गण (Photo: ITG) भगवान के प्रमुख गण (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 9:01 AM IST

Sawan Somwar 2026: आज सावन का पहला सोमवार है, जो कि भगवान शिव की भक्ति बहुत ही विशेष माना जाता है. इस दिन श्रद्धालु महादेव को प्रसन्न करने के लिए जल, बेलपत्र और पूजा सामग्री अर्पित करते हैं. हिंदू धर्म में शिव पुराण को भगवान शिव का प्रमुख ग्रंथ माना गया है. शिव पुराण में भगवान शिव, उनके परिवार और उनसे जुड़ी कई महत्वपूर्ण घटनाओं का वर्णन मिलता है. लेकिन यह ग्रंथ केवल शिव जी की लीलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उनके शक्तिशाली गणों और सेनापतियों का भी उल्लेख मिलता है, जो अत्यंत रहस्यमय और बलशाली थे.

Advertisement

शिव पुराण के अनुसार, महादेव के असंख्य गण थे, जो उनके प्रति पूरी तरह समर्पित रहते थे और उनके लिए कुछ भी करने को तैयार रहते थे. इन गणों में राक्षस, भूत-प्रेत, पिशाच, गंधर्व आदि शामिल थे. इन सबकी एक विशाल सेना थी, जिसके कुछ मुख्य और अत्यंत शक्तिशाली सेनापति थे.

भैरव बाबा

इनमें सबसे प्रमुख नाम भैरव बाबा का आता है. भैरव बाबा को महादेव के सभी पवित्र स्थलों का रक्षक माना जाता है. आज भी कई बड़े शिव मंदिरों के आसपास भैरव जी के मंदिर देखे जा सकते हैं. मान्यता है कि केदारनाथ, उज्जैन के महाकाल और काशी विश्वनाथ जैसे प्रमुख ज्योतिर्लिंगों की रक्षा स्वयं भैरव अलग-अलग रूपों में करते हैं. भैरव जी को अनेक दिव्य अस्त्रों और गुप्त विद्याओं का ज्ञाता माना जाता है.

वीरभद्र

इसके बाद आते हैं वीरभद्र, जिन्हें भगवान शिव का रौद्र रूप माना जाता है. उनकी उत्पत्ति दक्ष प्रजापति के यज्ञ से जुड़ी कथा से होती है. जब माता सती ने अपने पिता के यज्ञ में अपमान सहन न कर हवन कुंड में कूदकर प्राण त्याग दिए, तब क्रोधित होकर शिव जी ने अपनी जटाओं से वीरभद्र को उत्पन्न किया. वीरभद्र ने यज्ञ को नष्ट कर दिया और दक्ष प्रजापति का सिर धड़ से अलग कर दिया. उन्हें शिव का सबसे शक्तिशाली और क्रोधित गण माना जाता है.

Advertisement

घंटाकर्ण

तीसरे प्रमुख गण के रूप में घंटाकर्ण का नाम लिया जाता है. इन्हें भगवान शिव का शक्तिशाली सेनापति और यक्षराज कुबेर का भी सहयोगी माना जाता है. कुछ मान्यताओं में इन्हें भैरव का ही रूप बताया गया है. इनका उल्लेख कई धार्मिक स्थलों और कथाओं में मिलता है, जहां इन्हें वीर और युद्धकुशल माना गया है.

नंदी जी

अब बात करते हैं सबसे महत्वपूर्ण और प्रमुख गण नंदी जी की. नंदी जी को भगवान शिव का वाहन और उनके गणों का मुखिया माना जाता है. कथा के अनुसार, नंदी ऋषि शिलाद के पुत्र थे. अल्पायु होने के कारण उन्होंने कठोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अमरत्व प्रदान किया और अपना वाहन बना लिया. नंदी जी की भक्ति और निष्ठा के कारण उन्हें सभी गणों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है. कहा जाता है कि नंदी जी अत्यंत शक्तिशाली थे और उनके साथ युद्ध करना बहुत कठिन था. जो भी उनके विरुद्ध जाता था, उसे महादेव के क्रोध का सामना करना पड़ता था. इसी कारण आज भी हर शिव मंदिर में शिवलिंग के साथ नंदी जी की प्रतिमा अवश्य स्थापित की जाती है.

इस प्रकार शिव पुराण हमें यह बताता है कि भगवान शिव के गण केवल साधारण नहीं थे, बल्कि वे अद्भुत शक्तियों से संपन्न और पूरी तरह अपने स्वामी के प्रति समर्पित थे.

---- समाप्त ----

TOPICS:
Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »