Hindu Dharam: उत्तराखंड की रहस्यमयी गुफा में छिपा है कलयुग के अंत का राज! जानें कब और कैसे आएगी महाप्रलय

Hindu Dharam: क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसी गुफा भी है जहां प्रवेश करते ही शेषनाग के फन की आकृति दिखती है और चारों धामों के दर्शन एक साथ होते हैं? स्कंद पुराण के अनुसार, गुफा में मौजूद कलयुग का खंभा लगातार बढ़ रहा है और जिस दिन ऊपर लटक रहा पिंड इससे मिल जाएगा, उसी दिन महाप्रलय आएगी.

Advertisement
हिंदू धर्म (Photo: AI Generated) हिंदू धर्म (Photo: AI Generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:55 AM IST

Hindu Dharam: आपने कलयुग से संबंधित बहुत सारी बातें सुनी होंगी. स्कंद पुराण में उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में स्थित गंगोलीहाट के पास पाताल भुवनेश्वर गुफा का उल्लेख मिलता है. जिसका रहस्य कलयुग से जुड़ा हुआ है. मान्यता है कि यह गुफा भगवान शिव का निवास स्थान है, जहां भक्त आकर पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की कामना करते हैं. यह गुफा लगभग 90 फीट गहराई में पहाड़ी के अंदर स्थित है. अल्मोड़ा से शेराघाट होते हुए करीब 160 किलोमीटर की दूरी तय करके गंगोलीहाट पहुंचा जा सकता है. यह गुफा अपने आप में एक अद्भुत और रहस्यमयी स्थान मानी जाती है.

Advertisement

पाताल भुवनेश्वर गुफा का रहस्य और पौराणिक मान्यताएं

गुफा के अंदर जाने के लिए टेढ़ी-मेढ़ी और फिसलन भरी लगभग 80 सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं. नीचे पहुंचने पर एक अलग ही दुनिया का अनुभव होता है, जहां प्राचीन काल का इतिहास जैसे जीवंत दिखाई देता है. यहां पत्थरों से बने विभिन्न आकार और शिल्प कई रहस्यों को अपने भीतर समेटे हुए हैं. गुफा की दीवारों पर शेषनाग और अनेक देवी-देवताओं की आकृतियां देखी जा सकती हैं. प्रवेश द्वार के पास ही शेषनाग के फन जैसी आकृति बनी हुई है, जिसके बारे में मान्यता है कि धरती उसी पर टिकी हुई है.

इस गुफा में छह खंभे हैं, जिन्हें चार युग- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलयुग, का प्रतीक माना जाता है. कहा जाता है कि पहले तीन खंभों में कोई बदलाव नहीं होता, लेकिन कलयुग का खंभा धीरे-धीरे बढ़ रहा है. इसके ऊपर छत से एक पिंड लटक रहा है, जो हर 7 करोड़ वर्षों में लगभग एक इंच बढ़ता है. मान्यता है कि जिस दिन यह पिंड उस खंभे से मिल जाएगा, उस दिन कलियुग का अंत और महाप्रलय होगा.

Advertisement

पौराणिक कथाओं के अनुसार, त्रेतायुग में राजा ऋतुपर्ण ने इस गुफा को सबसे पहले देखा था. द्वापर युग में पांडव यहां आए थे, और कलयुग में लगभग 833 ईस्वी में जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने इस स्थान का पुनः दर्शन किया और यहां तांबे का शिवलिंग स्थापित किया था.

आज यह गुफा देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है. यहां आने वाला हर व्यक्ति इसकी अद्भुत बनावट और रहस्यमयी वातावरण को देखकर आश्चर्यचकित रह जाता है. मान्यता है कि इस गुफा में चारों धामों के दर्शन एक साथ होते हैं. यहां शिव जी की जटाओं से बहती गंगा की धारा जैसी आकृति और अमृत कुंड के दर्शन भी होते हैं. कुछ पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, स्वर्ग का मार्ग भी यहीं से शुरू होता है. पाताल भुवनेश्वर गुफा की असली सुंदरता और भव्यता का अनुभव केवल वहां जाकर ही किया जा सकता है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »