Shani Guru Sanyog 2026: ज्योतिष शास्त्र में शनि और देवगुरु बृहस्पति (गुरु) को सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली ग्रह माना जाता है. जहां शनि देव कर्मफलदाता और न्याय के देवता हैं, वहीं गुरु ज्ञान, समृद्धि और वृद्धि के कारक हैं. जब भी इन दोनों बड़े ग्रहों की चाल में बदलाव होता है, तो देश-दुनिया के साथ-साथ सभी 12 राशियों के जीवन में बड़ा उथल-पुथल देखने को मिलता है.
साल 2026 में 27 जुलाई से शनि देव अपनी वक्री चाल शुरू कर चुके हैं, जो 11 दिसंबर 2026 तक चलेगी. दूसरी तरफ, गुरु ग्रह 14 जुलाई से 9 अगस्त 2026 तक अस्त अवस्था में रहते हुए अतिचारी (तीव्र) गति से गोचर कर रहे हैं. वक्री शनि की सख्त नजर और गुरु की अतिचारी स्थिति का यह दुर्लभ संयोग कुछ राशियों के लिए वित्तीय, मानसिक और पारिवारिक चुनौतियां लेकर आ सकता है. आइए जानते हैं कि इन महत्वपूर्ण तारीखों के बीच किन राशियों को विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है.
मेष राशि (Aries)
मेष राशि के जातकों के लिए वक्री शनि और अतिचारी गुरु की स्थिति अचानक खर्चों में भारी बढ़ोतरी ला सकती है. आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है. कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों या अधिकारियों के साथ किसी बात को लेकर मतभेद उत्पन्न हो सकते हैं. 11 दिसंबर तक पैसों का लेन-देन और कोई भी बड़ा निवेश बहुत सोच-समझकर करें. व्यर्थ के विवादों से दूर रहें.
मिथुन राशि (Gemini)
मिथुन राशि वालों को इस दौरान अपने करियर और सेहत पर खास ध्यान देने की जरूरत होगी. काम में मनचाहा परिणाम न मिलने से मानसिक तनाव बढ़ सकता है. भागदौड़ अधिक रहेगी, जिससे शारीरिक थकान और स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. गुरु के अतिचारी प्रभाव के कारण जल्दबाजी में कोई भी बड़ा करियर निर्णय न लें. अपनी दिनचर्या और खान-पान को संतुलित रखें.
कन्या राशि (Virgo)
कन्या राशि के जातकों को पारिवारिक और वैवाहिक जीवन में थोड़ी सतर्कता बरतनी होगी. जीवनसाथी के साथ संवाद की कमी के कारण गलतफहमियां बढ़ सकती हैं. साझेदारी (Partnership) के काम में रुकावटें आ सकती हैं. 9 अगस्त तक वाणी पर संयम रखें और उग्र होने से बचें. व्यावसायिक समझौतों पर हस्ताक्षर करने से पहले दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें.
मीन राशि (Pisces)
चूंकि शनि देव मीन राशि में ही वक्री हो रहे हैं, इसलिए इस राशि के लोगों पर इसका सीधा और गहरा प्रभाव देखने को मिलेगा. बनते हुए कार्यों में बेवजह की देरी हो सकती है. मन में अनजाना भय या चिंता बनी रह सकती है. किसी पर भी आंख मूंदकर भरोसा न करें. धैर्य बनाए रखें और नियमित रूप से अपनी योजनाओं का पुनर्मूल्यांकन करते रहें.
अशुभ प्रभावों से बचने के ज्योतिषीय उपाय
- प्रत्येक शनिवार को शनिदेव की पूजा करें, सरसों के तेल का दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें.
- गुरुवार के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें. किसी मंदिर में चने की दाल या केसरिया मिठाई का दान करें.
- ऊं शं शनैश्चराय नमः और ऊं बृं बृहस्पतये नमः मंत्रों का नियमित रूप से जाप करें.
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