Pitru Paksha 2026: घर की इस दिशा में वास्तु की गड़बड़ देती है पितृ दोष का संकेत, इन 3 तरीकों से समझें

यदि किसी व्यक्ति को अपनी जन्म कुंडली की जानकारी नहीं है तो वास्तु के माध्यम से भी वास्तु दोष के संभावित संकेतों को समझा जा सकता है. वास्तु शास्त्र में दक्षिण-पश्चिम यानी साउथ-वेस्ट दिशा को पितरों की दिशा माना गया है.

Advertisement
दक्षिण-पश्चिम दिशा पृथ्वी तत्व की मानी जाती है, इसलिए यहां जमीन का धंसा हुआ या नीचा होना वास्तु की दृष्टि से उचित नहीं माना जाता है. (Photo: ITG) दक्षिण-पश्चिम दिशा पृथ्वी तत्व की मानी जाती है, इसलिए यहां जमीन का धंसा हुआ या नीचा होना वास्तु की दृष्टि से उचित नहीं माना जाता है. (Photo: ITG)

अंशु पारीक

  • नई दिल्ली,
  • 12 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:33 PM IST

पितृ दोष को ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण योग माना गया है. जब पूर्वजों से जुड़े किसी प्रकार के कर्म, असंतोष या अधूरे दायित्व का प्रभाव जीवन में दिखाई देता है तो उसे पितृ दोष से जोड़कर देखा जाता है. कुंडली में ग्रहों की स्थिति और उनसे बनने वाले योगों के आधार पर पितृ दोष का आकलन किया जाता है. यदि किसी व्यक्ति को अपनी जन्मकुंडली की जानकारी नहीं है तो वास्तु के माध्यम से भी इसके संभावित संकेतों को समझा जा सकता है. वास्तु शास्त्र में दक्षिण-पश्चिम यानी साउथ-वेस्ट दिशा को पितरों की दिशा माना गया है. आइए 26 सितंबर से शुरू हो रहे पितृपक्ष से पहले आपको बताते हैं कि कैसे वास्तु संबंधी गड़बड़ी से पितृ दोष को पहचाना जा सकता है.

Advertisement

पितरों की दिशा है साउथ-वेस्ट
वास्तु के अनुसार घर का दक्षिण-पश्चिम हिस्सा पृथ्वी तत्व से संबंधित होता है. यह दिशा स्थिरता, परिवार की जड़ों और पूर्वजों से जुड़े प्रभावों का प्रतिनिधित्व करती है. इसलिए घर में इस दिशा का संतुलित और व्यवस्थित होना महत्वपूर्ण माना जाता है. यदि साउथ-वेस्ट हिस्से में लगातार किसी प्रकार की कमी, कटाव, गड्ढा या अनुचित निर्माण हो तो इसका प्रभाव परिवार की स्थिरता और वातावरण पर पड़ सकता है. घर में बच्चों के विवाह में रुकावट, संबंधों में परेशानी, संतान का न होना जैसी परेशानियां देखने को मिल सकती हैं.

पितरों का आशीर्वाद बना रहे और घर में सकारात्मक वातावरण कायम रहे, इसके लिए दक्षिण-पश्चिम दिशा को साफ, मजबूत और व्यवस्थित रखना चाहिए. इस दिशा में अनावश्यक सामान का ढेर लगाने के बजाय भारी और उपयोगी वस्तुओं को व्यवस्थित रूप से रखा जा सकता है.

Advertisement

साउथ-वेस्ट में गड्ढा न हो
दक्षिण-पश्चिम दिशा पृथ्वी तत्व की मानी जाती है, इसलिए यहां जमीन का धंसा हुआ या नीचा होना वास्तु की दृष्टि से उचित नहीं माना जाता है. घर के इस हिस्से में किसी भी तरह का गड्ढा, बोरिंग या भूमिगत पानी से जुड़ी व्यवस्था होने पर वास्तु दोष माना जाता है. इसी तरह यदि साउथ-वेस्ट में सीवेज टैंक या ऐसी संरचना बनाई गई है, जिससे जमीन का यह हिस्सा खाली या कमजोर हो रहा हो, तो उसे भी वास्तु की दृष्टि से जांचना चाहिए.

इस दिशा का फर्श घर के दूसरे हिस्सों की तुलना में थोड़ा ऊंचा होना बेहतर माना जाता है. दक्षिण-पश्चिम का हिस्सा नीचे होने पर पृथ्वी तत्व की स्थिरता प्रभावित करता है. इसलिए निर्माण के समय इस दिशा के लेवल का विशेष ध्यान रखना चाहिए.

रंगों का भी रखें ध्यान
दक्षिण-पश्चिम दिशा में काला, नीला और हरा रंग अधिक मात्रा में इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए. इन रंगों के प्रयोग को इस दिशा की ऊर्जा के लिए अनुकूल नहीं माना जाता. इसके स्थान पर इस हिस्से में पृथ्वी तत्व के अनुरूप सौम्य और स्थिरता प्रदान करने वाले रंगों का प्रयोग किया जा सकता है. जैसे पीला, गुलाबी, सफेद.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »