राजा मानधाता की तपस्या से जुड़ा है ओंकारेश्वर धाम, जानें महादेव के इस मंदिर की कहानी

Omkareshwar Jyotirlinga: मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के किनारे बसा ओंकारेश्वर धाम 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. इस मंदिर का संबंध राजा मानधाता की तपस्या से बताया जाता है. आइए जानते हैं ओंकारेश्वर धाम की खासियत और इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं.

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ओंकारेश्वर मंदिर की मान्यता (Photo: ITG) ओंकारेश्वर मंदिर की मान्यता (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 7:59 AM IST

Omkareshwar Jyotirlinga: मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के तट पर बसा ओंकारेश्वर धाम भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. यहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु महादेव के दर्शन करने पहुंचते हैं. नर्मदा के घाट, मंदिरों में गूंजती घंटियां और चारों ओर भक्तिमय माहौल इस जगह को खास बनाते हैं. प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक आस्था का संगम होने के कारण ओंकारेश्वर देश के प्रमुख तीर्थस्थलों में गिना जाता है. आइए जानते हैं ओंकारेश्वर धाम की खासियत और इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं।

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मानधाता द्वीप पर दिखता है ओम का आकार

ओंकारेश्वर की खास पहचान यहां स्थित मानधाता द्वीप है. मान्यता है कि इस द्वीप को ऊपर से देखने पर इसका आकार ‘ॐ’ जैसा दिखाई देता है. इसी वजह से इस जगह का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा मानधाता ने इसी पर्वत पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए लंबे समय तक कठोर तपस्या की थी. कहा जाता है कि उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें दर्शन दिए. इसी धार्मिक मान्यता के चलते इस धाम का नाम ओंकारेश्वर पड़ा.

आदि शंकराचार्य से भी जुड़ा है ओंकारेश्वर

ओंकारेश्वर का संबंध आदि शंकराचार्य से भी जुड़ा हुआ है. मान्यता है कि उन्होंने अपनी आध्यात्मिक यात्रा के दौरान यहां समय बिताया था. अद्वैत वेदांत की परंपरा में भी इस स्थान का खास महत्व माना जाता है. यही वजह है कि यहां भगवान शिव के भक्तों के साथ-साथ आध्यात्मिक ज्ञान और भारतीय संस्कृति में रुचि रखने वाले लोग भी पहुंचते हैं. मंदिर परिसर और नर्मदा नदी के आसपास का शांत वातावरण श्रद्धालुओं को भक्ति और सुकून का अनुभव कराता है.

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ओंकारेश्वर के साथ ममलेश्वर के दर्शन क्यों हैं जरूरी?

ओंकारेश्वर के दर्शन के साथ ममलेश्वर महादेव के दर्शन का भी विशेष महत्व बताया जाता है. ममलेश्वर मंदिर नर्मदा नदी के दूसरे तट पर स्थित है। इसे अमलेश्वर के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ओंकारेश्वर आने वाले श्रद्धालु ममलेश्वर महादेव के दर्शन भी करते हैं. कई भक्तों का मानना है कि दोनों मंदिरों के दर्शन करने से ओंकारेश्वर की तीर्थयात्रा पूर्ण होती है. इसी वजह से श्रद्धालु नर्मदा नदी के दोनों किनारों पर स्थित इन प्राचीन शिव मंदिरों में दर्शन करने पहुंचते हैं.

नर्मदा के घाट और मंदिरों का शांत माहौल

ओंकारेश्वर और ममलेश्वर धाम अपनी धार्मिक मान्यताओं के साथ प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाने जाते हैं. नर्मदा नदी के घाट, पूजा करते श्रद्धालु और मंदिरों में गूंजते मंत्र यहां के माहौल को खास बनाते हैं. भगवान शिव के दर्शन करने और मन की शांति पाने के लिए हर साल बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचते हैं। 

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