Gupt Navratri 2026: माघ गुप्त नवरात्र आज से शुरू, ये रहेगा घटस्थापना का शुभ मुहूर्त, नोट करें सही टाइमिंग

Gupt Navratri 2026: माघ गुप्त नवरात्र की आज से शुरुआत हो चुकी है, जो 28 जनवरी तक चलेंगे. गुप्त नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के गुप्त तरीके से उपासना की जाती है. इस नवरात्र में मां दुर्गा की 10 महाविद्याओं जैसे मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी माता, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धूम्रवती माता, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा की जाती है.

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गुप्त नवरात्र 2026 आज से शुरू (Photo: ITG) गुप्त नवरात्र 2026 आज से शुरू (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:36 AM IST

Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्र को आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से बहुत पवित्र समय माना जाता है. नवरात्र का मुख्य उद्देश्य मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की आराधना करना होता है. हिंदू धर्म में नवरात्र साल में चार बार आती है- आषाढ़ गुप्त नवरात्र, माघ गुप्त नवरात्र, चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र. नवरात्र का पर्व नौ दिनों और नौ रातों तक चलता है, जिसमें मां दुर्गा की विशेष पूजा की जाती है. माघ महीने में पड़ने वाली नवरात्र को माघ गुप्त नवरात्र कहा जाता है. इस वर्ष माघ गुप्त नवरात्र की शुरुआत 19 जनवरी 2026 यानी आज से हो रही है. खास बात यह है कि यह नवरात्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से आरंभ हो रही है.

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गुप्त नवरात्र 2026 शुभ मुहूर्त (Gupt Navratri 2026 Ghatsthapna Muhurat)

गुप्त नवरात्र की प्रतिपदा तिथि 19 जनवरी यानी आज रात 1 बजकर 21 मिनट से शुरू हो चुकी है और इसका समापन 20 जनवरी यानी कल रात 2 बजकर 14 मिनट पर होगा. आज घटस्थापना का मुहूर्त सुबह 7 बजकर 14 मिनट से शुरू हो चुका है, जो कि सुबह 10 बजकर 46 मिनट तक रहेगा. इसके अलावा, कोई अगर इसमें घटस्थापना न कर पाए तो उनके लिए अभिजीत मुहूर्त भी हैं, जिसका मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा. 

गुप्त नवरात्र 2026 पूजन विधि (Gupt Navratri 2026 Pujan Vidhi)

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें. पूजा स्थल को स्वच्छ करके वहां लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं. इसके बाद मां दुर्गा या देवी के किसी गुप्त स्वरूप की प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित करें. कलश स्थापना करें. कलश में जल भरकर उसमें आम या अशोक के पत्ते रखें और ऊपर नारियल रखें. कलश को मां दुर्गा का प्रतीक माना जाता है. इसके बाद गणेश जी का स्मरण करें और पूजा का संकल्प लें.

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मां दुर्गा को रोली, अक्षत, फूल, सिंदूर, चुनरी और भोग अर्पित करें. घी का दीपक जलाएं और धूप दिखाएं. इसके बाद दुर्गा सप्तशती, चंडी पाठ या बीज मंत्रों का जप करें. गुप्त नवरात्रि में विशेष रूप से मंत्र जप, साधना और ध्यान का महत्व होता है. पूजा के अंत में मां दुर्गा की आरती करें और उनसे सुख-शांति, शक्ति और बाधा निवारण की प्रार्थना करें. संभव हो तो नौ दिनों तक सात्त्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें. मान्यता है कि श्रद्धा से की गई गुप्त नवरात्रि की पूजा से साधक को विशेष आध्यात्मिक फल की प्राप्ति होती है.

गुप्त नवरात्र 2026 महत्व (Gupt Navratri 2026 Significance)

गुप्त नवरात्र बहुत ही विशेष व्रत माना जाता है. इन नौ दिनों का मुख्य उद्देश्य मां दुर्गा की आराधना करना होता है, इसलिए यह पर्व श्रद्धालुओं के लिए विशेष होता है. भक्त पूरे नौ दिन और नौ रात मां दुर्गा की उपासना करते हैं. गुप्त नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा गुप्त रूप से की जाती है और इस समय का विशेष संबंध तंत्र विद्या से माना जाता है. इस दौरान साधक और तांत्रिक मां दुर्गा की आराधना कर उनसे कृपा प्राप्त करते हैं. गुप्त नवरात्र के समय साधक इस अवधि का पूरा लाभ उठाते हैं और हठ योग, ध्यान, जप, तंत्रोक्त और शाबर मंत्रों का जाप, हवन तथा कठोर व्रत जैसे आध्यात्मिक और धार्मिक साधनों का अभ्यास करते हैं. मान्यता है कि इस प्रकार श्रद्धा और नियम के साथ की गई साधना से साधकों को सिद्धि और आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है.

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