Gangaur Vrat 2026: 20 या 21 मार्च, कब रखा जाएगा गणगौर व्रत? जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल तृतीया तिथि 21 मार्च को देर रात 2 बजकर 30 मिनट से प्रारंभ होगी और इसका समापन 21 मार्च को ही रात 11 बजकर 56 मिनट पर होगा. ऐसे में गणगौर व्रत 21 मार्च दिन शनिवार को रखा जाएगा.

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मान्यता है कि देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए गणगौर का व्रत किया था. मान्यता है कि देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए गणगौर का व्रत किया था.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:04 PM IST

Gangaur Vrat 2026: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को गणगौर व्रत रखने की परंपरा है. इस दिन सुहागिनें पति के दीर्घायु और सुखमय जीवन की कामना के लिए उपवास रखती हैं. मान्यता है कि देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए गणगौर का व्रत किया था. पार्वती की तपस्या रंग लाई और शिव सदा-सदा के लिए पार्वती के हो गए. तभी से इस व्रत को रखने की परंपरा चली आ रही है. हरियाणा और राजस्थान सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में यह व्रत बहुत प्रमुखता के साथ रखा जाता है.

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गणगौर व्रत 2026 तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल तृतीया तिथि 21 मार्च को देर रात 2 बजकर 30 मिनट से प्रारंभ होगी और इसका समापन 21  मार्च को ही रात 11 बजकर 56 मिनट पर होगा. ऐसे में गणगौर व्रत 21 मार्च दिन शनिवार को रखा जाएगा.

गणगौर व्रत के शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4 बजकर 49 मिनट से 5 बजकर 36 मिनट तक
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 04 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक
पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 7 बजकर 55 मिनट से 9 बजकर 26 मिनट तक

गणगौर व्रत की पूजा विधि
इस दिन सवेरे-सवेरे उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें. चौकी पर भगवान शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें. पूजा स्थल को गंगाजल के छिड़काव से पवित्र कर लें. इसके बाद माता पार्वती को रोली और कुमकुम से तिलक करें. फिर भगवान शिव को चंदन का तिलक लगाएं. भगवान के सामने घी का दीपक जलाएं. माता पार्वती को वस्त्र, श्रृंगार सामग्री अर्पित करें. उन्हें फल, फूल व मिठाई का भोग लगाएं. साथ ही दूर्वा अर्पित करना भी शुभ माना जाता है. इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती से पति की लंबी उम्र दांपत्य जीवन में खुशहाली की कामना करें. आखिर में गणगौर व्रत कथा का पाठ जरूर करें.

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