Dussehra 2026: असुर था तो क्यों रावण की राख घर लाते हैं लोग? जानें ये शुभ है या अशुभ

रावण दहन के बाद अक्सर आपने लोगों को उसकी राख घर लाते हुए देखा होगा. कई जगहों पर ऐसी लोक मान्यताएं हैं कि रावण दहन की राख घर की चौखट से बांधने से नकारात्मक ऊर्जा का घर में प्रवेश नहीं होता है. आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं.

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मान्यता है कि रावण की राख घर में रखने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं होता है. (Photo: ITG) मान्यता है कि रावण की राख घर में रखने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं होता है. (Photo: ITG)

अंशु पारीक

  • नई दिल्ली,
  • 20 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 5:33 PM IST

दशहरे पर रावण दहन के बाद एक परंपरा कुछ स्थानों पर देखने को मिलती है. लोग रावण के पुतले की राख या जली हुई लकड़ियों को घर लाते हैं और उन्हें अस्थियों के समान मानकर घर की चौखट पर बांध देते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा और बुरी आत्माएं घर में प्रवेश नहीं कर पाती है. लेकिन इस परंपरा को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल उठता है कि आखिर रावण के पुतले की राख को घर की सुरक्षा का प्रतीक मानना कितना उचित है? जिस रावण का दहन असत्य, अहंकार और अधर्म के अंत के संदेश के रूप में किया जाता है, उसी के अवशेषों से सुरक्षा की उम्मीद करना क्या दशहरे के मूल संदेश के विपरीत नहीं है?

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धार्मिक दृष्टि से दशहरा केवल एक पुतले को जलाने का पर्व नहीं है. यह बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है. भगवान श्रीराम मर्यादा, सत्य, करुणा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं. जबकि रावण का चरित्र उसके अहंकार, परस्त्री हरण और अधर्म के कारण उसके पतन का संदेश देता है. रावण विद्वान और शिवभक्त था, लेकिन उसके ज्ञान और सामर्थ्य पर अहंकार हावी हो गया. अंततः उसका यही अहंकार उसके विनाश का कारण बना. ऐसे में रावण के पुतले की राख को घर की रक्षा करने वाली वस्तु मानने से पहले इस परंपरा के आधार और उसके पीछे छिपे प्रतीकात्मक अर्थ पर विचार करना जरूरी है.

क्या रावण की राख बुरी शक्तियों को रोक सकती हैं?
लोक मान्यताओं में कई ऐसी प्रथाएं प्रचलित हैं, जिनका पालन लोग पीढ़ियों से करते आ रहे हैं. रावण दहन की राख को चौखट पर बांधना भी कुछ क्षेत्रों में ऐसी ही एक मान्यता हो सकती है. हालांकि, बुरी आत्माओं को रोकने का यह उपाय शास्त्र सम्मत नहीं है. केवल किसी परंपरा के लंबे समय से प्रचलित होने से यह सिद्ध नहीं होता कि उसमें बताई गई मान्यता भी सत्य है.

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रावण का पुतला प्रतीकात्मक होता है. उसकी राख और लकड़ियां भी उसी पुतले के जले हुए अवशेष हैं. ये वास्तविक रावण की अस्थियां नहीं है. इसलिए इन्हें रावण की अस्थियों के समान मानकर घर में रखना भी प्रतीकात्मक धारणा है. घर की सुरक्षा के लिए इन अवशेषों को अनिवार्य मानना उचित नहीं कहा जा सकता. परिवार की सुख-शांति और सुरक्षा का संबंध सदाचार, आपसी विश्वास, सकारात्मक वातावरण और व्यावहारिक सावधानियों से भी जुड़ा है.

आस्था के साथ विवेक भी जरूरी
धार्मिक परंपराओं का सम्मान करना भारतीय संस्कृति की विशेषता है. लेकिन हर मान्यता को बिना विचार किए स्वीकार करना आवश्यक नहीं. दशहरे पर रावण दहन का उद्देश्य उसके अवशेषों को सुरक्षित रखना नहीं है, बल्कि उसके चरित्र से जुड़ी बुराइयों का त्याग करने का संदेश देना है. यदि कोई व्यक्ति राख को केवल परंपरा या स्मृति के रूप में रखता है तो यह अलग बात है. लेकिन उसे बुरी आत्माओं से बचाने वाला निश्चित उपाय मानने के लिए प्रमाणित आधार होना चाहिए.

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