Chaturmas 2026: कल या परसों, कब से शुरू होने वाले हैं चातुर्मास? जानें पंडित से सही तिथि और नियम

Chaturmas 2026: चातुर्मास 2026 की शुरुआत 25 जुलाई से हो रही है, जब भगवान विष्णु योग निद्रा में जाते हैं. इस दौरान कई शुभ कार्य वर्जित होते हैं, लेकिन भक्ति, व्रत और संयम से जीवन में सुख-समृद्धि लाई जा सकती है. जानें क्या करें और क्या न करें.

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20 नवंबर 2026 को देवोत्थान एकादशी के साथ ही चातुर्मास समाप्त हो जाएगा.(Photo: ITG) 20 नवंबर 2026 को देवोत्थान एकादशी के साथ ही चातुर्मास समाप्त हो जाएगा.(Photo: ITG)

अरुणेश कुमार शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 23 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:43 AM IST

Chaturmas 2026: चातुर्मास हिंदू धर्म में आत्म-साधना, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का सबसे पवित्र काल माना जाता है. इस वर्ष 25 जुलाई से इसकी शुरुआत हो रही है. जब भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी के दिन योग निद्रा में चले जाते हैं, तब से लेकर देवउठनी एकादशी तक के समय को चातुर्मास कहा जाता है. 

चूंकि इन चार महीनों में सृष्टि के संचालक भगवान विष्णु शयन काल में होते हैं, इसलिए इस दौरान सभी प्रकार के मांगलिक कार्य वर्जित हो जाते हैं. हालांकि, यह समय भक्ति, तप और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है. चातुर्मास के दौरान आपके जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहे और सेहत अच्छी रहे, इसके लिए शास्त्रों में कुछ नियम बताए गए हैं. आइए पंडित अरुणेश कुमार शर्मा जी से जानते हैं कि इस दौरान क्या करना चाहिए और किन चीजों से बचना चाहिए.

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चातुर्मास में क्या करें?

आराधना और मंत्र जाप 
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की नियमित पूजा करें. "ऊं नमो भगवते वासुदेवाय" या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना इस समय बेहद फलदायी होता है.

सात्विक जीवनशैली 
इन चार महीनों में केवल एक समय भोजन करने या सात्विक आहार लेने का नियम बनाना चाहिए.

दान-पुण्य 
चातुर्मास में अन्न, वस्त्र, छाता, कपूर और जूतों का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है. जरूरतमंदों की मदद करें.

जमीन पर शयन 
शास्त्रों के अनुसार, चातुर्मास के दौरान जो लोग पलंग का त्याग करके भूमि पर सोते हैं, उन्हें विशेष मानसिक और शारीरिक लाभ मिलता है.

दीपदान 
रोजाना शाम को तुलसी के पौधे के पास और घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जरूर जलाएं.

चातुर्मास में क्या न करें?

1. इस अवधि में विवाह, सगाई, जनेऊ संस्कार, मुंडन, नया व्यापार शुरू करना और गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य पूरी तरह से वर्जित रहते हैं.

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2. भोजन में प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा और नशीली चीजों का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए.

3. बासी भोजन और बाहर के खाने से परहेज करें.

4. चातुर्मास के चार महीनों में सेहत को ठीक रखने के लिए चार विशेष खाद्य पदार्थों को छोड़ने का नियम है:

5. हरी पत्तेदार सब्जियां (जैसे पालक, मेथी आदि) नहीं खानी चाहिए, क्योंकि मानसून में इनमें कीड़े होने का डर रहता है.

6. दही का सेवन वर्जित होता है.

7. दूध का सेवन करने से बचना चाहिए.

8. इन चार महीनों में किसी की निंदा न करें, झूठ न बोलें और न ही किसी पर क्रोध करें. ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करें.

वैज्ञानिक दृष्टिकोण 
चातुर्मास का समय पूरी तरह से मानसून का होता है. इस मौसम में हमारी पाचन अग्नि मंद हो जाती है और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए इस दौरान हल्का, सुपाच्य और सात्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है ताकि शरीर निरोगी रहे.

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