Grahan or Amavasya Dosh: ज्योतिष में ग्रहों की चाल और उनके बीच बनने वाले संबंधों को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. खासतौर पर अमावस्या और पूर्णिमा जैसी तिथियों पर ग्रहों की स्थिति में होने वाले बदलाव को लेकर कई तरह की ज्योतिषीय गणनाएं की जाती हैं. इस बार 11 सितंबर 2026 को भाद्रपद अमावस्या पड़ रही है. इसी दौरान चंद्रमा की स्थिति में बदलाव के कारण एक विशेष ग्रह संबंध बनने की बात कही जा रही है, जिसे ज्योतिष में विष योग कहा जाता है.
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस योग का प्रभाव सभी राशियों पर एक जैसा नहीं होता. कुछ जातकों को इस दौरान मानसिक दबाव, आर्थिक मामलों में सावधानी या कामकाज में रुकावट जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है. खासतौर पर सिंह, तुला और कुंभ राशि के जातकों को इस अवधि में सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है. हालांकि ज्योतिषीय फलादेश व्यक्ति की पूरी जन्मकुंडली के आधार पर अलग-अलग हो सकता है.
11 सितंबर को कैसे बनेगा विष योग?
भाद्रपद अमावस्या 11 सितंबर को है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस दिन चंद्रमा सिंह राशि से निकलकर करीब रात 7:08 बजे कन्या राशि में प्रवेश करेंगे. इसके बाद चंद्रमा और शनि के बीच सप्तम दृष्टि संबंध बनने की बात कही जा रही है. ज्योतिष में चंद्रमा को मन, भावनाओं और मानसिक स्थिति का कारक माना जाता है, जबकि शनि को कर्म, अनुशासन, देरी और कठिन परिस्थितियों से जोड़कर देखा जाता है. इन दोनों के बीच बनने वाला विशेष संबंध कुछ राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है.
बताया गया है कि इस योग का प्रभाव 11 सितंबर की रात से शुरू होकर 13 सितंबर की देर रात तक रह सकता है. हालांकि कुछ ज्योतिषीय व्याख्याओं में इसके प्रभाव को आगे की अवधि से भी जोड़कर देखा जा रहा है. इसलिए इस दौरान किसी भी बड़े फैसले में जल्दबाजी न करने की सलाह दी जाती है.
सिंह राशि
सिंह राशि वालों के लिए यह समय धन और परिवार से जुड़े मामलों में सावधानी बरतने वाला हो सकता है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस दौरान चंद्रमा आपकी कुंडली के दूसरे भाव में और शनि आठवें भाव में रहेंगे.
ऐसे में पैसों से जुड़े किसी बड़े फैसले में जल्दबाजी करने से बचना बेहतर माना जा रहा है. निवेश, संपत्ति या किसी बड़े वित्तीय लेनदेन से पहले पूरी जानकारी जरूर जुटाएं. किसी के कहने पर पैसा लगाने या बिना जांच-पड़ताल के आर्थिक फैसला लेने से बचें.
तुला राशि
तुला राशि के जातकों के लिए यह अवधि नौकरी और आर्थिक मामलों में सतर्क रहने वाली हो सकती है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार चंद्रमा आपके बारहवें भाव में और शनि छठे भाव में रहेंगे.
इस दौरान कार्यस्थल पर विरोधियों या प्रतिस्पर्धियों से सावधान रहने की जरूरत हो सकती है. ऑफिस में किसी काम को जल्दबाजी में पूरा करने के बजाय एक बार उसकी अच्छी तरह जांच कर लें. छोटी सी गलती भी आपके लिए परेशानी का कारण बन सकती है.
कुंभ राशि
कुंभ राशि के जातकों के लिए यह समय थोड़ा अधिक चुनौतीपूर्ण रह सकता है. ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस दौरान चंद्रमा आपके आठवें भाव में और शनि दूसरे भाव में रहेंगे. इस स्थिति को अचानक आने वाली परेशानियों और मानसिक दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है.
इस दौरान आपको लग सकता है कि मेहनत के अनुसार परिणाम नहीं मिल रहा है. ऐसी स्थिति में निराश होने की बजाय धैर्य बनाए रखना जरूरी होगा. किसी भी समस्या का समाधान जल्दबाजी में करने के बजाय शांत दिमाग से सोचें. पैसों के मामले में किसी को बिना सोचे-समझे उधार देने या जोखिम भरे सौदे में शामिल होने से बचें. इस समय बचत को प्राथमिकता देना आपके लिए बेहतर हो सकता है.
अमावस्या पर क्या कर सकते हैं?
भाद्रपद अमावस्या का धार्मिक दृष्टि से भी विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन स्नान, दान, पितरों का स्मरण और तर्पण जैसी धार्मिक परंपराएं निभाई जाती हैं. कई लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र, तिल या अन्य वस्तुओं का दान भी करते हैं.
अमावस्या के दिन घर की साफ-सफाई करके शाम के समय दीपक जलाने और ईश्वर का स्मरण करने की भी परंपरा है. धार्मिक मान्यताओं में इसे आत्मशुद्धि और पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर माना जाता है.
क्या रखें सावधानी?
विष योग की ज्योतिषीय मान्यता को देखते हुए इस अवधि में इन तीन राशियों के जातकों को खासतौर पर बड़े आर्थिक जोखिम, अनावश्यक विवाद और जल्दबाजी में लिए गए फैसलों से बचने की सलाह दी जाती है. हालांकि किसी भी व्यक्ति पर ग्रहों का वास्तविक प्रभाव उसकी जन्मकुंडली और दशा आदि पर निर्भर माना जाता है.
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