साल 2009 में गरीबों के लिए करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 4,000 आवासों का निर्माण कराया गया था जो अब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है. 2013 में सरकार बदलने से पहले इनका वितरण नहीं हो सका. इसके बाद योजना वर्षों तक ठंडे बस्ते में पड़ी रही. इस दौरान चोर इन घरों की खिड़कियां, दरवाजे और सरिया तक उखाड़कर ले गए. बाद में जब फिर गहलोत सरकार सत्ता में लौटी तब तक ये घर खंडहर हो चुके थे. इस खडहर नुमा घर के लिए लाभार्थियों ने 2.25 लाख रुपये देने से भी इनकार कर दिया.