5 लाख रुपये खेत में गाड़कर भूला किसान, सालभर बाद निकले तो दीमक चट कर चुकी थी पूरी रकम

राजस्थान के बालोतरा में एक किसान की जिंदगी भर की कमाई उसकी भूलने की आदत और नशे की लत की भेंट चढ़ गई. प्लॉट बेचकर मिले 5 लाख रुपये चोरी और फिजूलखर्ची से बचाने के लिए खेत में गाड़ दिए, लेकिन जगह याद नहीं रही. करीब एक साल बाद रकम मिली तो 500-500 के ज्यादातर नोट दीमक से बुरी तरह नष्ट हो चुके थे.

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पत्नी-बेटों से छिपाकर खेत में गाड़े थे नोट.(Photo: Dinesh Bohra/ITG) पत्नी-बेटों से छिपाकर खेत में गाड़े थे नोट.(Photo: Dinesh Bohra/ITG)

दिनेश बोहरा

  • बालोतरा,
  • 09 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 4:11 PM IST

राजस्थान के बालोतरा जिले में एक किसान को अपनी मेहनत की कमाई सुरक्षित रखने का ऐसा तरीका भारी पड़ गया कि लाखों रुपये देखते ही देखते कागज के टुकड़ों में बदल गए. पचपदरा थाना क्षेत्र के नेवाई गांव निवासी किसान मांगीलाल मेघवाल ने करीब एक साल पहले अपना प्लॉट बेचा था. इसके बदले उसे 5 लाख रुपये मिले थे.

दरअसल, मांगीलाल अपने परिवार के साथ खेत में बनी कच्ची ढाणी में रहता है. पचपदरा में मौजूद प्लॉट बेचने के बाद उसका इरादा खेत में पक्का कमरा बनवाने का था. रकम को चोरी होने और बेवजह खर्च होने से बचाने के लिए उसने 5 लाख रुपये एक पॉलीथिन में रखे और खेत में गड्ढा खोदकर जमीन के अंदर दबा दिए.

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इसके बाद किसान ने इस बात की जानकारी पत्नी और बेटों तक को नहीं दी. बताया गया कि मांगीलाल को नशे की लत है और वह अक्सर चीजें भूल जाता है. कुछ समय बीतने के बाद जब पक्का कमरा बनवाने के लिए पैसे की जरूरत पड़ी, तो उसे याद आया कि उसने रकम खेत में कहीं दबाई थी. लेकिन तब तक वह जगह उसकी याददाश्त से पूरी तरह निकल चुकी थी.

10 बीघा खेत में रकम तलाशता रहा परिवार

मांगीलाल ने अपने स्तर पर खेत में कई जगह पैसे खोजे, लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिली. करीब 10 बीघा में फैले खेत में आखिर रकम कहां दबाई गई थी, इसका उसे कोई अंदाजा नहीं था. परेशान होकर उसने पत्नी और बेटों को पूरी बात बताई. शुरुआत में परिवार को उसकी बात पर भरोसा नहीं हुआ, लेकिन बाद में सभी ने खेत में अलग-अलग जगह खुदाई शुरू कर दी.

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परिजनों ने काफी तलाश की, मगर जमीन के नीचे दबे नोटों का कोई सुराग नहीं मिला. वक्त बीतता गया और परिवार ने भी उम्मीद छोड़ दी. किसान को शायद यह अंदाजा भी नहीं था कि जिस रकम को उसने सुरक्षित रखने के लिए जमीन में छिपाया था, वह धीरे-धीरे नमी और दीमक की चपेट में आ रही है.

करीब एक साल बाद बारिश का मौसम आया और खेत में बुवाई की तैयारी शुरू हुई. इसी दौरान एक रात जमीन से रुपयों वाली पॉलीथिन की थैली बाहर निकल आई. अंधेरा होने के कारण परिवार की नजर उस पर नहीं पड़ी. अगले दिन जब मांगीलाल की पत्नी और बेटा खेत की तारबंदी ठीक कर रहे थे, तभी उनकी नजर उस थैली पर गई.

सुबह थैली खुली तो उड़ गए होश

परिजनों ने जब पॉलीथिन को खोलकर देखा तो उनके होश उड़ गए. उसके अंदर 500-500 रुपये के नोट पड़े थे, लेकिन उनकी हालत बेहद खराब थी. नोटों को दीमक ने जगह-जगह से काट दिया था और कई नोट छोटे-छोटे टुकड़ों में बदल चुके थे. परिवार को समझते देर नहीं लगी कि जिस रकम को बचाकर रखने की कोशिश की गई थी, वह अब लगभग बर्बाद हो चुकी है.

इसके बावजूद परिवार ने बचे हुए नोटों को संभाला और उन्हें बदलवाने की उम्मीद में पचपदरा स्थित एसबीआई बैंक पहुंचा. वहां बैंक कर्मचारियों ने कटे-फटे नोटों की हालत देखने के बाद उन्हें लेने से इनकार कर दिया. परिवार ने उम्मीद नहीं छोड़ी और बालोतरा स्थित एसबीआई की मुख्य शाखा का भी रुख किया.

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बालोतरा की मुख्य शाखा में भी परिवार को निराशा हाथ लगी. बैंक की ओर से उन नोटों को बदलने से इनकार कर दिया गया. इस तरह 5 लाख रुपये की वह रकम, जिसे किसान ने भविष्य की जरूरत के लिए संभालकर रखा था, दीमक की वजह से बर्बादी के कगार पर पहुंच गई. घटना के बाद मांगीलाल की पत्नी और बेटे उसकी भूलने की आदत को लेकर उसे ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.

चोरी से बचाने के लिए छिपाई थी रकम, अब बैंक भी नहीं बदल रहा नोट

मांगीलाल ने परिवार से रकम छिपाकर इसलिए खेत में दबाई थी, ताकि चोरी न हो और पैसे फिजूलखर्ची में न निकल जाएं. लेकिन नशे की लत और भूलने की समस्या के चलते वह खुद ही उस जगह को भूल गया, जहां उसने अपनी जिंदगी की बड़ी बचत जमीन के नीचे छिपाई थी.

करीब एक साल तक मिट्टी के भीतर पड़ी पॉलीथिन और उसमें रखे नोटों पर दीमक का असर होता रहा. बारिश और खेत में चल रही गतिविधियों के बीच आखिरकार थैली ऊपर आ गई. अगर उस दिन पत्नी और बेटे की नजर उस पर नहीं पड़ती, तो शायद परिवार को रकम के बारे में दोबारा कभी पता भी नहीं चलता.

यह मामला परिवार के लिए सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि एक बड़ी सीख भी बन गया है. पांच लाख रुपये की रकम जुटाने में किसान ने वर्षों की मेहनत लगाई होगी, लेकिन उसे सुरक्षित रखने के लिए अपनाया गया तरीका ही उसकी सबसे बड़ी परेशानी बन गया. अब परिवार बैंक से भी मदद की उम्मीद कर रहा है, जबकि शुरुआती तौर पर दोनों शाखाओं से उन्हें रकम बदलने से मना कर दिया गया है.

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