सिजेरियन डिलीवरी के बाद 5 महिलाओं की मौत, WHO पहुंचा मामला, फार्मा डिस्ट्रीब्यूटर का लाइसेंस भी कैंसिल

कोटा में सीजेरियन डिलीवरी के बाद पांच महिलाओं की मौत के मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत सरकार से इस मामले में जानकारी मांगी है. वहीं पंजाब और हिमाचल प्रदेश में जैक्सन लेबोरेट्रीज की उन निर्माण इकाइयों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं, जहां ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन बनाए जाते थे. मामले की जांच अभी जारी है.

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5 मौतों के बाद WHO ने मांगा जवाब. (Photo: Representational) 5 मौतों के बाद WHO ने मांगा जवाब. (Photo: Representational)

aajtak.in

  • कोटा ,
  • 26 जून 2026,
  • अपडेटेड 7:04 PM IST

राजस्थान के कोटा में सीजेरियन डिलीवरी के बाद पांच महिलाओं की मौत के मामले ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींच लिया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत सरकार से इस पूरे मामले की जानकारी मांगी है. वहीं केंद्र सरकार ने भी राजस्थान सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके. इस बीच ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन बनाने वाली जैक्सन लेबोरेट्रीज की पंजाब और हिमाचल प्रदेश स्थित निर्माण इकाइयों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं.

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स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से भेजा गया पत्र नियमित अंतरराष्ट्रीय निगरानी प्रक्रिया का हिस्सा है. इसे किसी उत्पाद या निर्माता के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. संगठन का उद्देश्य यह पता लगाना है कि यह घटना केवल एक क्षेत्र तक सीमित है या इसका असर उन अन्य देशों पर भी पड़ सकता है, जहां संबंधित दवा की आपूर्ति हुई हो.

केंद्र ने भी मांगी राजस्थान सरकार से रिपोर्ट

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार ने राजस्थान सरकार से इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि महिलाओं की मौत और संक्रमण के मामलों में वास्तविक स्थिति क्या थी और आगे किस प्रकार की कार्रवाई की जानी चाहिए.

संयुक्त जांच के बाद रद्द हुए लाइसेंस

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अधिकारियों के मुताबिक केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन और पंजाब तथा हिमाचल प्रदेश के औषधि नियामकों ने जैक्सन लेबोरेट्रीज की निर्माण इकाइयों का संयुक्त निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान कंपनी की इकाइयों में गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस यानी जीएमपी मानकों के पालन की जांच की गई. जांच टीमों को निरीक्षण के दौरान कई कमियां मिलीं. संयुक्त टीम की सिफारिश के आधार पर संबंधित राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरणों ने कंपनी की संबंधित निर्माण इकाइयों के लाइसेंस रद्द कर दिए.

सरकार ने अपनाई जीरो टॉलरेंस नीति

स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई दवा निर्माण और गुणवत्ता मानकों के उल्लंघन के प्रति सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को दर्शाती है. मामले की जांच अभी जारी है और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर लागू नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी.

WHO ने क्यों मांगी जानकारी

स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन दुनिया भर में दवाओं की सुरक्षा और गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए समय-समय पर विभिन्न देशों के नियामक संस्थानों से जानकारी मांगता है. इसका उद्देश्य संभावित सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम का आकलन करना होता है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन का पत्र किसी उत्पाद या निर्माता को दोषी ठहराने वाला नहीं है. यह केवल वैश्विक फार्माकोविजिलेंस और नियामक निगरानी व्यवस्था का सामान्य हिस्सा है.

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क्या है पूरा मामला

कोटा के जेके लोन अस्पताल और सरकारी मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी विंग में 5 मई से 17 मई के बीच सीजेरियन डिलीवरी के बाद पांच महिलाओं की मौत हो गई थी. कुछ अस्पतालों में संक्रमण के मामले भी सामने आए थे. जांच के दौरान ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की आपूर्ति को लेकर सवाल उठे. इन्हीं इंजेक्शनों का निर्माण जैक्सन लेबोरेट्रीज द्वारा किया गया था. इसी कड़ी में कंपनी की निर्माण इकाइयों का निरीक्षण किया गया और नियामकीय कार्रवाई की गई.

फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है. केंद्र सरकार, राज्य सरकार, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन और विश्व स्वास्थ्य संगठन सभी अपने-अपने स्तर पर मामले से जुड़ी जानकारी जुटा रहे हैं. जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि महिलाओं की मौत और ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के बीच क्या संबंध था और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी.

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