खराब फेफड़े और 70% कमजोर आंखें... कोटा में 'क्लासमेट' बनकर मां ने बेटे को बना दिया IITian

बिहार के सीतामढ़ी के रहने वाले गुंजन कुमार का IIT पहुंचने का सपना बीमारी की वजह से टूटता नजर आ रहा था. जेईई परीक्षा से पहले फेफड़ा कोलेप्स होने के कारण वह तीन महीने तक बिस्तर पर रहा. ऐसे समय में उसकी मां ने बरसों बाद किताब उठाई, ऑनलाइन क्लास से नोट्स बनाए और बेटे का सपना साकार कर दिया.

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 मां के नोट्स बने सफलता की कुंजी.(Photo: Chetan Gurjar /ITG)  मां के नोट्स बने सफलता की कुंजी.(Photo: Chetan Gurjar /ITG)

चेतन गुर्जर

  • कोटा,
  • 05 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:45 AM IST

आईआईटी (IIT) तक पहुंचने का सपना देखने वाले हजारों छात्रों की तरह बिहार के सीतामढ़ी की रहने वाली गुंजन कुमार भी कोटा पहुंचे थे. लेकिन परीक्षा से कुछ महीने पहले जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया कि उनका सपना अधूरा होता नजर आने लगा. जेईई एडवांस्ड से पहले गुंजन न्यूमोथोरेक्स यानी फेफड़ा कोलेप्स होने की गंभीर समस्या का शिकार हो गए और तीन महीने तक बिस्तर से उठ भी नहीं सके.

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यहीं से शुरू हुई एक मां की असली परीक्षा. बेटे की पढ़ाई रुकती देख मां गुंजा ने वर्षों बाद फिर से किताबें उठाईं. ऑनलाइन क्लास के साथ बैठकर उन्होंने हर लेक्चर देखा, अपने हाथों से नोट्स तैयार किए और फिर उन्हीं नोट्स से बेटे को पढ़ाया. मां की मेहनत रंग लाई और गुंजन अब आईआईटी दिल्ली में कंप्यूटर साइंस ब्रांच में दाखिला लेने जा रहे हैं.

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दरअसल, यह कहानी सिर्फ एक छात्र की सफलता नहीं, बल्कि उस मां के समर्पण की भी है जिसने अपने बेटे के सपने को अपना सपना बना लिया. जब बेटा कमजोर पड़ गया, तब मां उसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई.

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बीमारी ने रोकी रफ्तार, मां ने संभाल ली पढ़ाई

गुंजन दो वर्षों से कोटा में रहकर एलन करियर इंस्टीट्यूट से जेईई की तैयारी कर रहे थे. सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन 5 अक्टूबर 2025 को रूटीन टेस्ट देने के अगले दिन अचानक उनके सीने में तेज दर्द शुरू हो गया.

डॉक्टरों की जांच में पता चला कि अत्यधिक भारी सामान उठाने की वजह से उनके बाएं फेफड़े पर दबाव पड़ा और वह कोलेप्स हो गया. न्यूमोथोरेक्स की वजह से उन्हें करीब तीन महीने तक बेड रेस्ट करना पड़ा. इस दौरान वह क्लास तक अटेंड नहीं कर सके.

ऐसे समय में मां गुंजा ने हार नहीं मानी. बीएड कर चुकीं गृहिणी गुंजा खुद बेटे के साथ कोटा में रह रही थीं. उन्होंने हर ऑनलाइन क्लास देखी, विस्तार से नोट्स तैयार किए और बेटे को पढ़ाई से जुड़े रहने में मदद की.

मां के नोट्स बने सफलता की कुंजी

गुंजन बताते हैं कि बीमारी के दौरान मां के बनाए नोट्स उनके लिए सबसे बड़ा सहारा बने. उन्हीं नोट्स की मदद से उन्होंने छूटा हुआ सिलेबस पूरा किया और दोबारा तैयारी में जुट गए.

गुंजन की आंखों की रोशनी भी काफी कमजोर है. उनकी 70 प्रतिशत से अधिक दृष्टि प्रभावित है और उन्हें 9.5 नंबर का चश्मा लगाना पड़ता है. इसके बावजूद उन्होंने कभी अपनी कमजोरी को अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया.

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जेईई मेन में उन्होंने 91.8 पर्सेंटाइल हासिल किया. वहीं जेईई एडवांस्ड में पीडब्ल्यूडी-ओबीसी कैटेगरी में ऑल इंडिया रैंक 50 और पीडब्ल्यूडी कॉमन रैंक 120 प्राप्त की. अब उन्हें आईआईटी दिल्ली में कंप्यूटर साइंस ब्रांच में प्रवेश मिलेगा.

2021 के टॉपर से मिली प्रेरणा, अब खुद बने मिसाल

गुंजन ने बताया कि कोटा आने से पहले उन्होंने इंटरनेट पर जेईई की सर्वश्रेष्ठ कोचिंग के बारे में जानकारी जुटाई. इसी दौरान उन्होंने वर्ष 2021 के जेईई मेन और एडवांस्ड ऑल इंडिया टॉपर मृदुल अग्रवाल का वीडियो देखा. उसी से प्रेरित होकर उन्होंने कोटा जाकर तैयारी करने का फैसला किया.

दसवीं में 82.5 प्रतिशत और बारहवीं में 70 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले गुंजन ने 2023 में कोटा पहुंचकर एलन करियर इंस्टीट्यूट में दाखिला लिया. उनके पिता राजनारायण प्रसाद बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन में इंजीनियर हैं, जबकि उनका छोटा भाई भी फिलहाल कोटा में रहकर जेईई की तैयारी कर रहा है.

गुंजन कहते हैं कि परिस्थितियां हमेशा आपके पक्ष में नहीं होतीं. परीक्षा सिर्फ पढ़ाई की नहीं, बल्कि हौसले की भी होती है. वहीं उनकी मां गुंजा कहती हैं कि बेटे का सपना ही उनका सपना था. एलन करियर इंस्टीट्यूट के निदेशक नवीन माहेश्वरी ने भी इस कहानी को विद्यार्थियों और अभिभावकों दोनों के लिए प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि कोटा सिर्फ परीक्षा की तैयारी नहीं, बल्कि चुनौतियों से लड़ना भी सिखाता है.

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