आग बुझ चुकी है, वो आग भी जो लखनऊ में सोमवार दोपहर सवा दो बजे लगी. वो अग्नि भी जो आज 15 चिताओं में लगी. लेकिन 15 परिवारों के साथ देश के हर आम आदमी के सीने में सवालों की आग सुलग रही है. वो जानना चाहते हैं कि कभी पुल गिरेगा, कभी सड़क धंसेगी, कभी होटल में आग लगेगी, कभी कोचिंग में आग, कभी स्कूल में आग लगेगी, कभी अस्पताल में आग. क्या जनता की जान की कीमत ही नहीं है?