श्री राम सिर्फ नाम नहीं हैं, राम आस्था हैं, राम इस देश का विश्वास हैं. सदियों की प्रतीक्षा, पीढ़ियों का बलिदान और ना जाने कितनी आंखों के आंसुओं से सींचकर भव्य मंदिर की चौखट खड़ी हुई है. इस देश में सुबह की पहली किरण 'राम-राम' से फूटती है और जीवन का अंतिम सफ़र भी इसी नाम के सहारे पूरा होेता है. जिस मर्यादा पुरुषोत्तम ने एक क्षण में राजपाट को तिनके की तरह छोड़ दिया, त्याग की उस पराकाष्ठा के घर में.