15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश को हथियार उठाने वाले नक्सलवाद से मुक्ति मिल गई, लेकिन अब वक्त है दिमागी नक्सल को पहचानने का और उन्हें आइसोलेट करने का. इस बयान का लगभग सभी विपक्षी दलों ने विरोध किया. सरकार और विपक्ष दोनों की दलील अलग है. आखिर देश में 'दिमागी नक्सल' को लेकर बहस क्यों छिड़ी है? देखें ब्लैक एंड व्हाइट.