तेजस्वी को RJD का नया ताज... लालू यादव की पार्टी का महाजुटान क्या परिवारिक कलह खत्म कर पाएगा?

आरजेडी में तेजस्वी यादव को कमान सौंपे जाने की जोरदार चर्चा है. और, इसके लिए राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई है. मीसा भारती के समर्थकों की भी अपनी मांग है - लालू यादव के सामने पार्टी और परिवार दोनों को एकजुट रखने की चुनौती है.

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आरजेडी नेता लालू यादव और तेजस्वी यादव. (Photo: Social Media) आरजेडी नेता लालू यादव और तेजस्वी यादव. (Photo: Social Media)

मृगांक शेखर

  • नई दिल्ली,
  • 21 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:29 PM IST

25 जनवरी को आरजेडी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई है. दिन में 11:30 बजे. लोकनायक जयप्रकाश नारायण सभागार में - ये पटना के होटल मौर्या के अशोक हाल का नाम है. 

राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय महासचिव भोला यादव की तरफ से जारी पत्र में सबको समय से पहुंचने को कहा गया है. आरजेडी की बैठक को लेकर काफी चर्चा है, और तरह तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, जिसका लब्बोलुआब यही है कि तेजस्वी यादव को और ताकतवर बनाया जा सकता है, और थोड़ी चर्चा मीसा भारती को लेकर भी है. ये सब ऐसे वक्त हो रहा है जब लालू यादव अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को भी साथ रहने के लिए बोल चुके हैं.

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तेजस्वी यादव का और ताकतवर बनना

हाल फिलहाल जो खबरें आ रही हैं, उनमें तेजस्वी यादव को बहुत कुछ मिलने की बातें हो रही हैं. और, न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, आरजेडी कार्यकर्ताओं की तरफ से तेजस्वी यादव को ‘कार्यकारी अध्यक्ष’ बनाए जाने की भी मांग हो रही है. 

एक रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2025 में पटना में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई थी, जिसमें आरजेडी के संविधान में संशोधन करके तेजस्वी यादव को लालू यादव के बराबर अधिकार दिए गए थे, जिसके मुताबिक लालू यादव के अध्यक्ष रहते हुए भी तेजस्वी यादव बराबरी का फैसला ले सकते हैं. आरजेडी का टिकट दे सकते हैं, और अनुशासनात्मक कार्रवाई भी कर सकते हैं.

अध्यक्ष जैसा एक और अधिकार तेजस्वी यादव को पहले ही मिल चुका था. ये पार्टी अध्यक्ष का वो अधिकार होता है जिसके तहत वो पार्टी का नाम, चुनाव निशान और झंडा बदल सकता है. 

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बिहार चुनाव के दौरान अगर तेजस्वी यादव पर अहंकारी हो जाने और मनमानी करने जैसे आरोप लगे, तो संघर्ष भी करना पड़ा. सबसे बड़ा संघर्ष तो महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाए जाने को लेकर था. और, चुनावी हार ने सारी मेहनत पर पानी फेर दिया. 

परिवार में अलग ही कलह मची हुई थी. तेज प्रताप यादव को घर और परिवार से निकाले जाने के बावजूद बवाल थम नहीं रहा था. रोहिणी आचार्य अलग ही मुहिम चला रही थीं, जिसका तेजस्वी यादव ने विधायकों की बैठक में बगैर नाम लिए जिक्र भी किया था. 

बोलते वक्त तेजस्वी यादव भावुक हो गए थे. चुनावी हार के बाद समीक्षा बैठक हो रही थी, जिसमें विधायक दल का नेता भी चुना जाना था. तेजस्वी यादव का कहना था, पार्टी देखूं या परिवार? क्या करूं मैं? आप चाहे तो मेरी जगह किसी और को विधायक दल का नेता चुन सकते हैं. 

लेकिन, तभी लालू यादव आगे आए, और हालात को संभाला. लालू यादव ने तेजस्वी यादव के मेहनत की तारीफ की. और, समझाया कि वो पार्टी देखें, और परिवार वो खुद देख लेंगे. जैसे तेजस्वी यादव को लालू यादव ने अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया था, वैसे ही फिर से जता दिया कि तेजस्वी यादव के हाथ में ही कमान है. 

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चुनाव तक तो परिवार को लेकर चुप रहे, लेकिन मकर संक्रांति के मौके पर तेज प्रताप यादव के दही-चूड़ा पार्टी में पहुंचे. लालू यादव ने बड़े बेटे को परिवार के साथ रहने के लिए कहा है. अभी तक परिवार के साथ होने जैसा कोई संकेत तो नहीं मिला है, लेकिन कार्यकारिणी की बैठक में तेजस्वी यादव पर सवाल उठाने वालों का मुंह बंद करने की कोशिश जरूर लगती है. 

आरजेडी का एक धड़ा मीसा भारती के पक्ष में

तेजस्वी यादव परिवार में सबसे छोटे हैं, और मीसा भारती सबसे बड़ी हैं. आरजेडी कार्यकर्ताओं का एक धड़ा मीसा भारती को ही कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के पक्ष में बताया जा रहा है. सूत्रों के हवाले से आई खबर में बताया गया है कि आरजेडी कार्यकर्ता चाहते हैं कि ये पद लालू परिवार की सबसे बड़ी बेटी मीसा भारती को मिलना चाहिए. मीसा भारती पहले से ही आरजेडी कार्यकर्ताओं में लोकप्रिय रही हैं, लेकिन राजनीतिक मामलों में उनकी भूमिका भी प्रियंका गांधी वाड्रा जैसी मानी जाती है. मुसीबत के वक्त जरूर याद किया जाता है. 

पाटलीपुत्र से सांसद मीसा भारती के एक समर्थक का कहना है, 'ये तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर भरोसे की कमी का सवाल नहीं है... सच तो ये है कि हमारी प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी लंबे समय से आरजेडी को पितृसत्तात्मक संगठन के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है, जिसमें महिलाओं को उनका हक नहीं मिलता है.

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बिहार में आरजेडी की मौजूदा स्थिति

1997 में जब से आरजेडी बनी है, लालू यादव ही राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. चारा घोटाले में जेल जाते वक्त जैसे राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाया गया था, लालू यादव ने संगठक के काम के लिए कुछ दिन के लिए एक कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाया था. लेकिन, जैसे ही गड़बड़ी की भनक लगी, हटा भी दिया था. 

तब रंजन यादव को आरजेडी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था. कार्यकारी अध्यक्ष के पास भी राष्ट्रीय अध्यक्ष जितने ही अधिकार होते हैं. जब लालू को मालूम हुआ कि रंजन यादव विधायक दल की बैठक बुला सकते हैं, और बुलाने की तैयारी भी कर रहे हैं, समय रहते छुट्टी भी कर दी. असल में, रंजन यादव खुद ही मुख्यमंत्री बनने की तैयारी करने लगे थे. 

आरजेडी की वेबसाइट पर बड़े नेताओं की प्रोफाइल है, जिसमें लालू यादव और राबड़ी देवी के बाद तेजस्वी यादव का नाम देखने को मिलता है. प्रोफाइल में ही लालू यादव के बारे में बताया गया है कि वो आरजेडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. एक अन्य पेज पर पदाधिकारियों के रूप में सिर्फ दो लोगों के नाम हैं, और तस्वीरें हैं. 

जगदानंद सिंह के बारे में लिखा है कि वो आरजेडी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष हैं, और उनके नीचे तेजस्वी यादव का नाम है - लेकिन उनके बारे में लिखा है कि वो बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं. 

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