सिद्धारमैया को कर्नाटक से हटाना कांग्रेस के लिए कितना जोखिम भरा

कांग्रेस कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदलने का मन बना चुकी है. कोशिशें तो राजस्थान और छत्तीसगढ़ के मामलों में भी हुई थी, लेकिन अशोक गहलोत और भूपेश बघेल पर दबाव बनाना संभव नहीं हो सका. मजबूत तो हर तरह से सिद्धारमैया भी हैं, लेकिन केरल में मुख्यमंत्री पद पर मनमाफिक फैसले के बाद आलाकमान का हौसला बढ़ा लगता है.

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार. (Photo: PTI) कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार. (Photo: PTI)

मृगांक शेखर

  • नई दिल्ली,
  • 27 मई 2026,
  • अपडेटेड 1:23 PM IST

कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन का काउंट डाउन शुरू हो चुका है. वैसे तो कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ऐसी खबरों को खारिज कर चुके हैं, लेकिन सूत्रों के हवाले से आई हर मीडिया रिपोर्ट में कर्नाटक को नया मुख्यमंत्री मिलना पक्का माना जा रहा है. 

20 नवंबर, 2025 को कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के ढाई साल का कार्यकाल पूरा हुआ, तो डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार और उनके समर्थकों ने आलाकमान के सामने मुख्यमंत्री बदलने की डिमांड शुरू कर दी थी. बैठकों और मुलाकातों के बहाने जैसे तैसे मामला टालने की कोशिश हुई, लेकिन 20 मई को सरकार के तीन साल पूरे होने के बाद से नेतृत्व में बदलाव को लेकर डीके गुट फिर से एक्टिव हो गया, और दिल्ली में बैठक बुलानी पड़ी. 

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असल में, सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री पद से हटाना कांग्रेस नेतृत्व के लिए काफी जोखिम भरा है. सिद्धारमैया को हटाया जाना महज कोई मुख्यमंत्री बदलने जैसा नहीं है, बल्कि कर्नाटक की सामाजिक राजनीति के बड़े चेहरे को बदलने जैसा है - खासकर तब जब राहुल गांधी के एजेंडे ओबीसी का मुद्दा सबसे ऊपर चल रहा हो.

कर्नाटक में क्या होने वाला है

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के कल गुरुवार (28 मई) को इस्तीफा देने की खबर करीब करीब पक्की मानी जा रही है. खबर ये भी है कि कांग्रेस उनकी जगह डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बना सकती है. और, ये सब संभव है दोनों की ब्रेकफास्ट पर अगली मुलाकात के बाद. 

मंगलवार (27 मई) को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और सांसद राहुल गांधी के साथ लंबी बैठक हुई थी. सूत्रों के हवाले से आई खबरों में बताया गया है कि बैठक में आलाकमान की तरफ से सिद्धारमैया को इस्तीफा देने की सलाह दी गई. लेकिन, लगे हाथ यह भी आश्वासन दिया गया कि मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से उनकी भूमिका कम नहीं होगी. राज्यसभा की सीट और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस में उनको अहम भूमिका दी जाएगी. 

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लगता है कांग्रेस पुराने अनुभवों से सबक ले चुकी है. सबक की एक झलक हाल ही में केरल में मुख्यमंत्री के नाम पर फैसले में भी दिखी थी. जैसी मुलाकातें और बैठक सिद्धारमैया और कर्नाटक को लेकर हो रही हैं, पहले राजस्थान और छत्तीसगढ़ को लेकर भी हो चुकी हैं, लेकिन वे सब बेनतीजा रहीं. 

ऐसा भी लगता है कि कांग्रेस आलाकमान को जो सम्मान और महत्व सिद्धारमैया दे रहे हैं, राजस्थान के मुख्यमंत्री रहते अशोक गहलोत और छत्तीसगढ़ के सीएम रहते भूपेश बघेल ने कभी नहीं दिया. अशोक गहलोत तो गांधी परिवार के संदेशवाहकों को बगैर मिले बैरंग दिल्ली लौटा देते थे. भूपेश बघेल ने भी किसी न किसी बहाने पांच साल बिता ही दिए थे - और नतीजा यह हुआ कि अगले ही चुनाव में कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई.

कर्नाटक में कांग्रेस पुरानी गलतियां दोहराना नहीं चाहती. कर्नाटक में अभी दो साल का कार्यकाल बचा है. और, कांग्रेस चाहती है कि नए चेहरे के साथ चुनाव में उतरे, जिससे सत्ता विरोधी लहर को काउंटर करना भी आसान हो. सिद्धारमैया अभी 78 के हैं, अगले चुनाव तक 80 साल के हो जाएंगे. 

दिल्ली में डेरा डाले एक कांग्रेस नेता ने अंग्रेजी अखबार द हिंदू को बताया कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में आलाकमान सिद्धारमैया को तुरंत हटाने का जोखिम लेने के पक्ष में नहीं है. सिद्धारमैया को AHINDA (अल्पसंख्यक, पिछड़े और दलित) सपोर्ट और ओबीसी समुदाय में प्रभाव उनकी सबसे बड़ी ताकत है, जिसकी वजह से कांग्रेस भी फूंक फूंक कर कदम बढ़ा रही है. कांग्रेस नेता के मुताबिक, कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन तभी संभव है, जब सिद्धारमैया खुद राहुल गांधी की सलाह पर मुख्यमंत्री पद छोड़ने को तैयार हों. 

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अव्वल तो, सूत्रों के मुताबिक, माना जा रहा है कि सिद्धारमैया को इस्तीफा देने की कोई हड़बड़ी नहीं है. सिद्धारमैया ने सोचने की मोहलत ली है, और चाहें तो मनमाफिक फैसला ले सकते हैं. सिद्धारमैया को नेतृत्व की तरफ से डीके शिवकुमार के लिए रास्ता साफ करने की जोर देकर सलाह दी गई है, लेकिन सिद्धारमैया ने प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है, ध्यान रहे. 

⁠डीके कांग्रेस की कमजोर कड़ी हैं

डीके शिवकुमार कांग्रेस की कमजोर कड़ी अब भी बने हुए हैं. चुनाव बाद उनके मुख्यमंत्री नहीं बन पाने में उनके ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोप भी आड़े आए थे, और सिद्धारमैया अपनी छवि से लेकर कर्नाटक की सामाजिक संरचना में फिट होने तक, हर तरह से भारी पड़े थे. 

डीके शिवकुमार के समर्थकों का दावा है कि 2023 में कांग्रेस आलाकमान ने ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री का फॉर्मूला दिया था, लेकिन अशोक गहलोत और भूपेश बघेल की तरह सिद्धारमैया भी बीते 6 महीने से ऐसी बातों को नजरअंदाज करते रहे हैं. सिद्धारमैया कांग्रेस नेतृत्व को इस बात के लिए आगाह भी कर चुके हैं कि अगर उनको हटाया गया तो कर्नाटक में पार्टी टूट जाएगी. दलील यह है कि सिद्धारमैया को काफी संख्या में (50-60 से लेकर 70 तक) विधायकों का सपोर्ट हासिल है.

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रिपोर्ट के मुताबिक, सिद्धारमैया ने यह भी साफ कर दिया है कि वो डीके शिवकुमार के नीचे काम नहीं करेंगे. और, यही वजह है कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे सिद्धारमैया को दिल्ली में महत्वपूर्ण भूमिका देने का ऑफर दे रहे हैं. 

डीके शिवकुमार भ्रष्टाचार के आरोप में जेल भी जा चुके हैं, और फिलहाल जमानत पर हैं. कांग्रेस नेतृत्व के लिए डीके शिवकुमार दोधारी तलवार साबित हो सकते हैं. मुख्यमंत्री बनाए जाने पर डीके शिवकुमार के हेमंत सोरेन और अरविंद केजरीवाल की तरह जांच एजेंसियों के निशाने पर फिर से आ जाने की आशंका है, और मुख्यमंत्री न बनाए जाने की सूरत में उनके एकनाथ शिंद बन जाने का खतरा है. 

कुरुबा समुदाय से आने के कारण सिद्धारमैया पिछड़े वर्ग के लोगों में मजबूत पकड़ हैं. सिद्धारमैया को हटाए जाने पर ओबीसी वोटर के बीच गलत संदेश जा सकता है. ओबीसी के जरिए राहुल गांधी के सोशल जस्टिस का एजेंडा बैकफायर कर सकता है, और ऐसे में बीजेपी और जेडीएस कांग्रेस के खिलाफ हमलावर हो सकते हैं. 

सिद्धारमैया अगर तैयार होते हैं तो 18 जून को नीतीश कुमार की तरह राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर सकते हैं, और उसी तरह अपने इस्तीफे की घोषणा भी कर सकते हैं. नीतीश कुमार की ही तरह सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र के लिए भी मंत्री पद का ऑफर दिए जाने की बात सुनी गई है. राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है, और अगर वो फिर से उच्च सदन नहीं भेजे जाते तो विपक्ष के नेता का पद भी सिद्धारमैया को मिल सकता है. बहरहाल, अभी तो स्थिति यही है कि सिद्धारमैया ने प्रस्ताव पर विचार के लिए समय मांगा है. और, विचार करने के लिए एक ही दिन बचा है. 

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